अमित शाह का राहुल गांधी पर तंज, बोले- प्रधानमंत्री बनना है तो मॉक पार्लियामेंट में ही बने रहिए, असली बारी कभी नहीं आएगी
Amit Shah on Rahul Gandhi: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर मॉक पार्लियामेंट को लेकर तंज कसते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री बनना है तो वहीं बने रहिए, असली राजनीति में आपकी बारी नहीं आएगी। INDIA गठबंधन ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक पब्लिक इम्पीचमेंट आयोजित किया। जानिए SIR, वोट चोरी के आरोप, संसद के विशेष सत्र की मांग और अमित शाह के बयान से जुड़ा पूरा राजनीतिक घटनाक्रम।
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। INDIA गठबंधन की मॉक पार्लियामेंट और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग की कार्रवाई को लेकर शाह ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री बनना है तो मॉक पार्लियामेंट में ही बने रहें, क्योंकि असल राजनीति में उनकी बारी कभी नहीं आने वाली।
शाह की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन ने दिल्ली में मॉक पार्लियामेंट आयोजित कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ किया। विपक्ष इस कार्यक्रम के जरिए चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहा है।
राहुल गांधी पर अमित शाह का तंज क्या है?
अमित शाह ने विपक्ष के मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं तो उन्हें मॉक पार्लियामेंट में ही प्रधानमंत्री बने रहना चाहिए। असली संसद और चुनावी राजनीति में उनकी प्रधानमंत्री बनने की बारी नहीं आने वाली।
शाह का यह बयान बीजेपी और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक टकराव को और तेज करता है। बीजेपी लगातार राहुल गांधी और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठाने का आरोप लगा रही है। वहीं, कांग्रेस और INDIA गठबंधन का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है।
INDIA गठबंधन ने दिल्ली में की मॉक पार्लियामेंट
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में 31 अक्टूबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन ने मॉक पार्लियामेंट का आयोजन किया। इस कार्यक्रम को बाद में ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ नाम दिया गया। इसमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने स्पीकर की भूमिका निभाई, जबकि खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रस्ताव पेश किया।
कार्यक्रम में राहुल गांधी, सोनिया गांधी और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। आयोजन की बैठक व्यवस्था पुराने संसद भवन के सेंट्रल हॉल की तर्ज पर तैयार की गई थी।
इस दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई।
विपक्ष ने चुनाव आयोग और SIR पर उठाए सवाल
INDIA गठबंधन लंबे समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।
मॉक पार्लियामेंट में विपक्ष ने छह प्रमुख आरोपों को प्रतीकात्मक प्रस्ताव का हिस्सा बनाया। इनमें चुनावों को प्रभावित करने की साजिश, मतदाता सूची से नाम हटाना, फॉर्म-6 में बदलाव, ECINET के जरिए मतदाता सूची पर नियंत्रण और चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति जैसे मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, यह एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम था। इसे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होने वाली वास्तविक महाभियोग या पद से हटाने की कार्रवाई नहीं माना जा सकता।
अमित शाह ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को दी थी चुनौती
इससे पहले अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में बीजेपी की बैठक के दौरान राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को चुनावी मतदाता सूची के मुद्दे पर संसद में बहस करने की चुनौती दी थी।
शाह ने कहा था कि बीजेपी संसद के विशेष सत्र में वोट चोरी के आरोपों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और सदन में चर्चा के बजाय सड़कों पर प्रदर्शन करने का आरोप लगाया।
शाह ने कहा कि बीजेपी के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और विपक्ष को अपने आरोप संसद में रखने चाहिए।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली
दिल्ली में मॉक पार्लियामेंट के बाद INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी की। इस रैली के जरिए विपक्ष चुनाव आयोग, SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने की योजना बना रहा है।
वहीं, बीजेपी विपक्ष के इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रही है। ऐसे में चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
अमित शाह के ताजा बयान ने इस राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। अब देखना होगा कि संसद के विशेष सत्र की मांग और विपक्ष के आंदोलन के बीच यह विवाद आगे क्या राजनीतिक मोड़ लेता है।
