देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र अगले कुछ दिनों में और मजबूत हो सकता है। मौसम प्रणाली के चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका है, जिसका असर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और आसपास के इलाकों में देखने को मिल सकता है। ऐसे में किसानों को खेतों में पानी की निकासी और कटी हुई फसल की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 24 से 26 अक्टूबर के बीच तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। केरल और माहे में भी 24 और 25 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर तेज बारिश की आशंका है। लक्षद्वीप में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।
बारिश के साथ कुछ इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका है। इससे निचले इलाकों में जलभराव, यातायात में परेशानी और खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को स्थानीय मौसम चेतावनियों के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है।
बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे मजबूत हो सकता है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, यह सिस्टम 26 अक्टूबर के आसपास चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटों की ओर बढ़ने की आशंका है।
इस मौसमी गतिविधि के कारण 27 और 28 अक्टूबर को तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत भारी से अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। ओडिशा में भी 27 से 29 अक्टूबर के बीच तेज बारिश की संभावना है। कुछ इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भी आने वाले दिनों में बारिश का असर देखने को मिल सकता है।
बारिश की आशंका को देखते हुए किसानों के लिए फसल की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। खेतों में पानी जमा होने से फसलों की जड़ों को नुकसान हो सकता है, जबकि तेज हवा और बारिश से खड़ी फसल गिरने का खतरा रहता है।
किसान इन बातों का ध्यान रखें:
किसानों को सलाह है कि अपने जिले के मौसम पूर्वानुमान और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के आधार पर ही कृषि कार्य करें।
गुजरात के जूनागढ़ में मूंगफली बाजार में भी गतिविधि तेज होने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, मंडी में रोजाना करीब 20 हजार से 40 हजार बोरियों की आवक हो रही है। इससे मूंगफली के कारोबार में रौनक दिखाई दे रही है। हालांकि, किसानों को बिक्री से पहले स्थानीय मंडी में चल रहे भाव, गुणवत्ता और खरीद की स्थिति की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
दक्षिण भारत में भारी बारिश और बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही मौसम प्रणाली को देखते हुए अगले कुछ दिन अहम रहेंगे। बारिश का असर राज्य और जिले के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। किसानों को फसल की सुरक्षा, जल निकासी और मौसम की आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए।
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