बिहार में बाढ़ के कारण फसल बर्बाद होने से परेशान किसानों के लिए राहत पाने का मौका अब सीमित समय के लिए बचा है। राज्य सरकार की कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत प्रभावित किसान 25 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऐसे में पात्र किसानों को समय रहते अपना आवेदन पूरा करना होगा।
सितंबर 2026 के आखिरी सप्ताह में आई बाढ़ से कई इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचा था। इसकी भरपाई के लिए कृषि विभाग ने राज्य के 9 जिलों की 43 प्रखंडों की 289 चिह्नित पंचायतों के किसानों से आवेदन मांगे हैं। योजना के तहत खेती की जमीन और फसल की श्रेणी के हिसाब से आर्थिक सहायता दी जाएगी।
बिहार सरकार ने फसल क्षति के लिए जमीन की श्रेणी के आधार पर अनुदान की दरें तय की हैं। असिंचित जमीन पर खेती करने वाले किसानों को 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता मिल सकती है। सिंचित जमीन के लिए यह राशि 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और गन्ने जैसी बहुवर्षीय फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक निर्धारित है।
हालांकि, योजना के तहत अधिकतम दो हेक्टेयर जमीन के लिए ही अनुदान दिया जाएगा। न्यूनतम सहायता राशि भी तय की गई है, ताकि पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार राहत मिल सके।
| जमीन और फसल की श्रेणी | अनुदान की दर |
|---|---|
| असिंचित जमीन | ₹8,500 प्रति हेक्टेयर तक |
| सिंचित जमीन | ₹17,000 प्रति हेक्टेयर तक |
| बहुवर्षीय फसल, जैसे गन्ना | ₹22,500 प्रति हेक्टेयर तक |
न्यूनतम अनुदान असिंचित जमीन के लिए 1,000 रुपये, सिंचित जमीन के लिए 2,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए 2,500 रुपये निर्धारित है। अंतिम सहायता राशि पात्रता और विभागीय नियमों के अनुसार तय होगी।
कृषि विभाग की जानकारी के मुताबिक, योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनके खेत प्रभावित पंचायतों की सूची में शामिल हैं। इसके लिए इन 9 जिलों को चिह्नित किया गया है:
इन जिलों के 43 प्रखंडों की 289 पंचायतों में पात्र किसानों से आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन करने से पहले किसान डीबीटी कृषि पोर्टल पर अपने प्रखंड और पंचायत की सूची जरूर जांच लें। केवल जिले का नाम सूची में होना अपने आप में पात्रता की पुष्टि नहीं करता।
इस योजना में रैयत यानी अपनी जमीन पर खेती करने वाले किसानों के साथ गैर-रैयत किसानों को भी आवेदन का मौका दिया गया है। हालांकि, दोनों श्रेणियों के किसानों को निर्धारित दस्तावेज जमा करने होंगे।
रैयत किसानों के लिए: वर्तमान भूमि कब्जा प्रमाणपत्र (LPC) या पिछले तीन वित्तीय वर्षों में जारी मान्य LPC अथवा लगान रसीद की जरूरत होगी।
गैर-रैयत किसानों के लिए: निर्धारित प्रारूप में स्वघोषणा प्रमाणपत्र देना होगा। इसे संबंधित वार्ड सदस्य, मुखिया या सरपंच और कृषि समन्वयक से सत्यापित कराना जरूरी है।
इसके अलावा, आवेदन के लिए 13 अंकों की किसान पंजीकरण संख्या जरूरी है। आधार सत्यापन और किसान परिवार का विवरण भी देना होगा। आवेदन में गलत या अधूरी जानकारी देने पर फॉर्म रद्द हो सकता है।
बाढ़ से फसल का नुकसान झेलने वाले पात्र किसान बिहार कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले जरूरी दस्तावेज और किसान पंजीकरण संख्या तैयार रखें।
आवेदन की प्रक्रिया इस प्रकार है:
आवेदन से पहले पोर्टल पर प्रभावित पंचायतों की सूची और पात्रता की शर्तें जरूर पढ़ें। योजना से जुड़ी सहायता के लिए किसान कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 पर संपर्क कर सकते हैं।
कृषि विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आवेदन की प्रक्रिया 18 अक्टूबर 2026 से शुरू हुई थी और इसकी अंतिम समय-सीमा 25 अक्टूबर 2026 रात 10 बजे तक है। इसलिए पात्र किसानों को आखिरी समय का इंतजार किए बिना आवेदन पूरा कर लेना चाहिए।
बाढ़ से फसल को नुकसान झेल चुके किसानों के लिए यह अनुदान अगली खेती की तैयारी में मददगार हो सकता है। लेकिन लाभ पाने के लिए प्रभावित पंचायत में पात्रता, सही दस्तावेज और आवेदन की सभी शर्तें पूरी करना जरूरी है।
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