न्यूज़

Right to Recall: अब जनता बीच कार्यकाल में हटा सकती है चुना हुआ नेता, जानें कैसे होती है वोटिंग?

लोकतंत्र में आमतौर पर जनता अपने प्रतिनिधि को पांच साल के लिए चुनती है. इसके बाद अगर जनप्रतिनिधि उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता या उसके कामकाज से लोग संतुष्ट नहीं होते, तो मतदाताओं को अगले चुनाव तक इंतजार करना पड़ता है. लेकिन कुछ राज्यों में ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत जनता कार्यकाल पूरा होने से पहले ही चुने हुए प्रतिनिधि को पद से हटाने के लिए वोट कर सकती है. इसे ‘राइट टू रिकॉल’ यानी वापस बुलाने का अधिकार कहा जाता है.

मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले की जेरोन खालसा नगर परिषद में इसी व्यवस्था के तहत 4 नवंबर 2026 को मतदान कराया गया. यहां नगर परिषद अध्यक्ष कुसुम पस्तोर को पद से हटाने के प्रस्ताव पर मतदाताओं ने वोट डाले. इस मामले ने एक बार फिर देश में राइट टू रिकॉल की व्यवस्था को चर्चा में ला दिया है.

क्या होता है Right to Recall?

राइट टू रिकॉल एक लोकतांत्रिक व्यवस्था है, जिसके तहत मतदाताओं को अपने चुने हुए प्रतिनिधि को उसका कार्यकाल पूरा होने से पहले पद से हटाने का अधिकार मिलता है. यह व्यवस्था उन परिस्थितियों में लागू होती है, जब संबंधित कानून में इसकी अनुमति हो और तय प्रक्रिया पूरी की जाए.

उदाहरण के लिए, अगर किसी नगर परिषद में जनता ने पांच साल के लिए अध्यक्ष चुना है, लेकिन बाद में उसके कामकाज से असंतुष्ट है, तो राइट टू रिकॉल की प्रक्रिया के जरिए अध्यक्ष को पद से हटाने का प्रस्ताव लाया जा सकता है.

यह सामान्य चुनाव जैसा नहीं होता, जिसमें कई उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं. इसमें मुख्य सवाल यह होता है कि मौजूदा प्रतिनिधि पद पर बना रहे या उसे पद से हटा दिया जाए.

क्या सांसद और विधायक पर भी लागू होता है यह नियम?

राइट टू रिकॉल की व्यवस्था पूरे देश में सभी निर्वाचित पदों पर एक जैसी लागू नहीं है. भारत में यह मुख्य रूप से कुछ राज्यों के स्थानीय निकायों और पंचायतों से जुड़े पदों के लिए अलग-अलग कानूनों के तहत मौजूद है.

नगर परिषद अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष और पंचायतों के कुछ निर्वाचित प्रतिनिधि इसके दायरे में आ सकते हैं. हालांकि, किस पद पर और किन शर्तों के साथ यह व्यवस्था लागू होगी, यह संबंधित राज्य के कानून पर निर्भर करता है.

सांसदों और विधायकों को जनता द्वारा इसी प्रक्रिया से बीच कार्यकाल में हटाने का कोई सामान्य देशव्यापी प्रावधान नहीं है. संविधान में भी सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए राइट टू रिकॉल का कोई स्पष्ट, समान प्रावधान नहीं है.

मध्य प्रदेश में कैसे शुरू होती है राइट टू रिकॉल की प्रक्रिया?

मध्य प्रदेश में नगर परिषद अध्यक्ष को पद से हटाने की प्रक्रिया मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 47 के तहत निर्धारित है. इसके लिए सीधे जनता की मांग से मतदान नहीं कराया जाता, बल्कि पहले निर्वाचित पार्षदों को प्रस्ताव लाना होता है.

इस प्रक्रिया के प्रमुख चरण हैं:

1. कम से कम 75 फीसदी पार्षदों के हस्ताक्षर जरूरी

नगर परिषद के कुल निर्वाचित पार्षदों में से कम से कम तीन-चौथाई पार्षदों को अध्यक्ष को वापस बुलाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने होते हैं. उदाहरण के लिए, अगर किसी परिषद में 20 निर्वाचित पार्षद हैं, तो कम से कम 15 पार्षदों के हस्ताक्षर जरूरी होंगे.

2. प्रस्ताव कलेक्टर को सौंपा जाता है

हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव जिले के कलेक्टर के सामने पेश किया जाता है. कलेक्टर प्रस्ताव और जरूरी हस्ताक्षरों की जांच करते हैं.

3. राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग तक पहुंचता है मामला

प्रस्ताव निर्धारित शर्तों के अनुरूप पाए जाने पर इसे राज्य सरकार के पास भेजा जाता है. इसके बाद राज्य सरकार मामले को राज्य निर्वाचन आयोग के पास भेजती है. आयोग नियमों के अनुसार मतदान की तारीख और अन्य व्यवस्थाएं तय करता है.

4. तीन साल की शर्त और एक कार्यकाल में एक मौका

मध्य प्रदेश के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, अध्यक्ष के पद संभालने के शुरुआती तीन साल के भीतर राइट टू रिकॉल की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती. इसके अलावा एक कार्यकाल में यह प्रक्रिया एक बार ही शुरू की जा सकती है.

राइट टू रिकॉल में कैसे होती है वोटिंग?

इस चुनाव में सामान्य चुनाव की तरह उम्मीदवारों के नाम या राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्नों की लंबी सूची नहीं होती. मतदाताओं के सामने दो विकल्प रखे जाते हैं:

  • भरी हुई कुर्सी: इसका मतलब है कि मतदाता मौजूदा अध्यक्ष को पद पर बनाए रखना चाहते हैं.
  • खाली कुर्सी: इसका मतलब है कि मतदाता मौजूदा अध्यक्ष को पद से हटाना चाहते हैं.

मतदाता इन दोनों में से किसी एक विकल्प के पक्ष में अपना वोट डालते हैं. मतदान संबंधित नगर परिषद या निकाय के मतदाता क्षेत्र में कराया जाता है.

मतगणना के बाद तय होता है कि अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे या उन्हें हटाया जाएगा. यदि उन्हें वापस बुलाने के पक्ष में जरूरी बहुमत मिलता है, तो अध्यक्ष का पद रिक्त हो जाता है. यदि पद पर बनाए रखने के पक्ष में फैसला आता है, तो अध्यक्ष अपने पद पर बने रहते हैं.

निवाड़ी के जेरोन खालसा में क्यों हुआ मतदान?

मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले की जेरोन खालसा नगर परिषद में अध्यक्ष कुसुम पस्तोर के खिलाफ राइट टू रिकॉल का प्रस्ताव लाया गया था. नगर परिषद में कुल 15 वार्ड हैं. इनमें से 12 निर्वाचित पार्षदों ने अध्यक्ष को पद से हटाने की पहल की थी.

कुसुम पस्तोर वर्ष 2022 में नगर परिषद अध्यक्ष चुनी गई थीं. उनके खिलाफ पार्षदों की नाराजगी और कामकाज को लेकर सवाल उठाए गए. वहीं, कुसुम पस्तोर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ पार्षदों से गुमराह करके हस्ताक्षर कराए गए.

इस मामले में 4 नवंबर 2026 को मतदान कराया गया. नगर परिषद क्षेत्र में कुल 7,799 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें 4,031 पुरुष और 3,768 महिलाएं शामिल थीं. मतदान में कुल 4,798 लोगों ने हिस्सा लिया. इस तरह मतदान प्रतिशत 61.52 रहा.

मतदान के बाद 6 नवंबर को मतगणना निर्धारित की गई, जिससे यह तय होना था कि कुसुम पस्तोर अध्यक्ष पद पर बनी रहेंगी या उन्हें हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

क्या राइट टू रिकॉल से नेताओं की जवाबदेही बढ़ती है?

राइट टू रिकॉल को स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने का एक तरीका माना जाता है. इसके जरिए मतदाताओं को केवल चुनाव के दिन ही नहीं, बल्कि कार्यकाल के बीच में भी अपनी राय रखने का अवसर मिलता है.

हालांकि, इस व्यवस्था के दुरुपयोग की आशंका भी हो सकती है. राजनीतिक विरोध, स्थानीय गुटबाजी या व्यक्तिगत मतभेदों के कारण भी किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ प्रस्ताव लाया जा सकता है. इसलिए कानून में प्रस्ताव लाने के लिए जरूरी समर्थन, समय-सीमा और मतदान जैसी शर्तें रखी जाती हैं.

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी प्रतिनिधि को हटाने का फैसला केवल राजनीतिक दबाव से नहीं, बल्कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और मतदाताओं के मतदान के आधार पर हो.

FAQs

1. Right to Recall का मतलब क्या है?

राइट टू रिकॉल का मतलब है कि मतदाता तय कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने चुने हुए प्रतिनिधि को कार्यकाल पूरा होने से पहले पद से हटाने के लिए वोट कर सकते हैं.

2. मध्य प्रदेश में नगर परिषद अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव कौन ला सकता है?

मध्य प्रदेश में संबंधित नगर परिषद के कम से कम 75 फीसदी निर्वाचित पार्षद अध्यक्ष को वापस बुलाने का प्रस्ताव ला सकते हैं.

3. क्या राइट टू रिकॉल में दोबारा उम्मीदवार चुना जाता है?

नहीं. इस प्रक्रिया में सामान्य चुनाव की तरह नए उम्मीदवार का चयन नहीं होता. मतदाता यह तय करते हैं कि मौजूदा अध्यक्ष पद पर बने रहें या उन्हें हटाया जाए.

4. राइट टू रिकॉल की वोटिंग में कौन से चुनाव चिह्न होते हैं?

मध्य प्रदेश की इस प्रक्रिया में भरी हुई कुर्सी और खाली कुर्सी दो विकल्प होते हैं. भरी कुर्सी अध्यक्ष को बनाए रखने और खाली कुर्सी अध्यक्ष को हटाने का संकेत देती है.

5. क्या भारत में सांसद और विधायक को राइट टू रिकॉल से हटाया जा सकता है?

सांसदों और विधायकों को जनता द्वारा राइट टू रिकॉल के जरिए बीच कार्यकाल में हटाने का कोई सामान्य देशव्यापी प्रावधान नहीं है. यह व्यवस्था मुख्य रूप से कुछ राज्यों में स्थानीय निकायों और पंचायतों के लिए लागू है.

Recent Posts

  • धर्म

Diwali 2026: दिवाली की रात दिख जाए उल्लू तो क्या होता है? मां लक्ष्मी के वाहन से जुड़ी है ये मान्यता

दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी की पूजा और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है. इस…

8 hours ago
  • धर्म

Dhanteras 2026: धनतेरस पर राशि के अनुसार करें खरीदारी, मेष से मीन तक जानें क्या खरीदना रहेगा शुभ

धनतेरस के साथ ही पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली के त्योहार की शुरुआत हो…

10 hours ago
  • राजनीति

CJP नेताओं से क्राइम ब्रांच की पूछताछ, विदेशी फंडिंग के आरोपों पर आशुतोष रांका ने जितेंद्र सिंह को घेरा

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिक्य शिंदे…

1 day ago
  • मनोरंजन

Ramayana Movie Review: यश का रावण छा गया, रणबीर कपूर के राम ने जीता दिल? जानें फिल्म की खूबियां और कमियां

भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल 'रामायण' आखिरकार 5 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों…

1 day ago
  • न्यूज़
  • राजनीति

वोटर लिस्ट पर बड़ा अपडेट! 6 राज्यों में SSR का ऐलान, 21 जनवरी 2027 को आएगी फाइनल सूची

चुनाव आयोग ने छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष सारांश…

1 day ago
  • न्यूज़
  • मनोरंजन

रामायण देखकर भावुक हुए बादशाह, जटायु के सीन ने रुलाया! अल्लू अर्जुन और ऋषभ शेट्टी ने भी की तारीफ

रणबीर कपूर की मचअवेटेड फिल्म 'रामायण' रिलीज से पहले ही लगातार सुर्खियों में बनी हुई…

2 days ago