पटना: बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। मोकामा, बाढ़ और मुंगेर के सियासी समीकरणों के बीच पार्टी के तीन प्रमुख भूमिहार नेता—केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह और विधान पार्षद नीरज कुमार—एक-दूसरे के आमने-सामने नजर आ रहे हैं। पटना स्नातक विधान परिषद चुनाव से शुरू हुआ विवाद अब व्यक्तिगत नाराजगी और सार्वजनिक बयानों तक पहुंच गया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने JDU के अंदरूनी समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कभी एक-दूसरे के राजनीतिक सहयोगी माने जाने वाले नेताओं के बीच अब भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है। सवाल है कि आखिर एक ही पार्टी और एक ही सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले इन तीनों नेताओं के बीच टकराव की वजह क्या है?
अनंत सिंह और नीरज कुमार की पुरानी अदावत फिर आई सामने
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता कोई नई बात नहीं है। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से सियासी खींचतान रही है। पटना स्नातक विधान परिषद सीट के चुनाव ने इस पुराने विवाद को एक बार फिर हवा दे दी।
JDU ने इस चुनाव में नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन मोकामा से विधायक रहे अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज कुमार के पक्ष में खुलकर प्रचार किया।
अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि नीरज कुमार ने उनके चुनावों में पर्दे के पीछे से उनके खिलाफ काम किया और उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। उनका कहना था कि जब पार्टी ने उनके खिलाफ साजिश करने वालों पर कार्रवाई नहीं की, तो वह नीरज कुमार के लिए वोट क्यों मांगें।
दूसरी तरफ नीरज कुमार ने अनंत सिंह के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने पार्टी अनुशासन और संगठन के प्रति जवाबदेही की बात उठाई। इस तरह चुनावी मुकाबला धीरे-धीरे JDU के भीतर ही दो नेताओं की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया।
ललन सिंह को मिली विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी
जब अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद बढ़ने लगा, तो JDU नेतृत्व ने इसे शांत कराने की कोशिश की। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने 2 अक्टूबर को सार्वजनिक रूप से बताया था कि दोनों नेताओं के बीच विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी मुंगेर के सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को दी गई है।
ललन सिंह का मोकामा, बाढ़ और मुंगेर क्षेत्र की राजनीति में खास प्रभाव माना जाता है। अनंत सिंह के साथ उनके पुराने राजनीतिक संबंध भी चर्चा में रहे हैं। ऐसे में पार्टी को उम्मीद थी कि ललन सिंह दोनों नेताओं के बीच तालमेल बनाने में सफल होंगे।
हालांकि, विवाद सुलझाने की कोशिशों के बावजूद दोनों नेताओं के बीच तनाव कम नहीं हुआ। ललन सिंह ने अनंत सिंह के पक्ष में यह भी कहा था कि उनके साथ भी न्याय नहीं हुआ और किसी भी विवाद में प्रतिक्रिया के पीछे कोई वजह होती है। उनके इस रुख को नीरज कुमार ने अपने प्रति समर्थन की कमी के तौर पर देखा।
अनंत सिंह को JDU ने छह साल के लिए निकाला
पटना स्नातक सीट के चुनाव में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करना अनंत सिंह को भारी पड़ा। JDU ने 24 अक्टूबर को उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी ने उन पर अनुशासनहीनता और आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया।
अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी पर भी पार्टी ने कार्रवाई की। इस फैसले ने JDU के अंदर चल रहे विवाद को और गंभीर बना दिया। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की सदस्यता के संबंध में भी कार्रवाई पर विचार करने का अनुरोध किया।
इस घटनाक्रम के बाद अनंत सिंह और ललन सिंह के संबंधों को लेकर भी सवाल उठे। अनंत सिंह ने ललन सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि बिहार में 500 ललन सिंह हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा मिली।
चुनाव जीतने के बाद नीरज कुमार ने ललन सिंह से बनाई दूरी
पटना स्नातक विधान परिषद सीट पर नीरज कुमार की जीत के बाद विवाद का नया अध्याय शुरू हुआ। जीत के बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ललन सिंह से आशीर्वाद लेने या बधाई पाने के लिए मुलाकात करेंगे, तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई सवाल ही नहीं उठता।
नीरज कुमार ने चुनाव के दौरान आई मुश्किलों को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका सवाल था कि आखिर उनका कसूर क्या था, जिसकी वजह से उन्हें चुनाव में इतनी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने उनके साथ राजनीतिक व्यवहार किया है, उनका हिसाब वह ब्याज समेत लौटाएंगे। उनके इस बयान को JDU के भीतर जारी खींचतान के संदर्भ में देखा जा रहा है।
नीरज कुमार ने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और अन्य नेताओं के साथ अपने संबंधों को लेकर सकारात्मक बातें कहीं, लेकिन ललन सिंह को लेकर उनका रुख सख्त बना रहा।
भूमिहार राजनीति और मुंगेर-मोकामा का समीकरण
मोकामा, बाढ़ और मुंगेर का इलाका बिहार की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली सामाजिक और जातीय समीकरणों के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में भूमिहार समाज की राजनीतिक भूमिका भी अहम रही है।
ललन सिंह राष्ट्रीय स्तर पर JDU के वरिष्ठ नेता और मुंगेर के सांसद हैं। अनंत सिंह मोकामा की स्थानीय राजनीति में मजबूत प्रभाव रखने वाले नेता रहे हैं, जबकि नीरज कुमार पार्टी के संगठनात्मक और राजनीतिक प्रवक्ता के रूप में अपनी अलग पहचान रखते हैं।
तीनों नेताओं का प्रभाव क्षेत्र और राजनीतिक आधार कई जगह एक-दूसरे से जुड़ता है। ऐसे में स्थानीय वर्चस्व, संगठन में भूमिका और चुनावी समर्थन को लेकर मतभेद बढ़ना पार्टी के लिए चुनौती बन गया है।
इसके अलावा बिहार की राजनीति में जन सुराज और RJD जैसे दलों की सक्रियता ने भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में JDU के भीतर किसी एक क्षेत्र या सामाजिक आधार पर नेतृत्व की खींचतान पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से अहम हो जाती है।
JDU के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
इस पूरे विवाद में JDU के सामने दोहरी चुनौती है। पहली, पार्टी के भीतर नेताओं के बीच भरोसा और अनुशासन कायम करना। दूसरी, मोकामा-मुंगेर जैसे अहम राजनीतिक क्षेत्र में अपने संगठन और समर्थक आधार को एकजुट रखना।
अनंत सिंह के निष्कासन के बाद नीरज कुमार की नाराजगी खत्म नहीं हुई है। वहीं, ललन सिंह और नीरज कुमार के बीच सार्वजनिक दूरी ने पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को और पेचीदा बना दिया है।
अब देखना होगा कि नीतीश कुमार और संजय झा के नेतृत्व में JDU इस विवाद को किस तरह संभालती है। फिलहाल, पटना स्नातक चुनाव का नतीजा आ चुका है, लेकिन उसके बाद शुरू हुई सियासी लड़ाई थमती नजर नहीं आ रही। बिहार की राजनीति में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस चक्रव्यूह से JDU कैसे बाहर निकलती है।
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