अपना दल (कमेरावादी) अकेले दम पर पूरे प्रदेश में पंचायत-और 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अब पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। प्रदेश की सभी बड़ी और क्षेत्रीय पार्टियाँ गांव-गांव अपनी जड़ें मजबूत करने में जुटी हैं। इसी बीच अपना दल (कमेरावादी) ने ऐलान किया है कि वह आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में किसी भी गठबंधन के सहारे नहीं बल्कि अकेले दम पर मैदान में उतरेगा। इस घोषणा ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। लखनऊ के दारुलसफा कॉमन हाल में शुक्रवार को आयोजित पार्टी की अहम बैठक में राष्ट्रीय, प्रांतीय पदाधिकारी, मंडल और जिलाध्यक्ष बड़ी संख्या में मौजूद रहे। बैठक में पंचायत से लेकर विधानसभा तक की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने बैठक में कहा कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी जानी चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और जनता से सीधा संपर्क बनाने के निर्देश दिए। कृष्णा पटेल ने कहा कि पंचायत चुनाव हमारी संगठनात्मक परीक्षा है और यह वही आधार बनेगा, जिस पर 2027 की विजय की इमारत खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता अब गांवों में जाएं, जनसंपर्क बढ़ाएं, जनता के मुद्दों को समझें और उनका समाधान खोजने में जुटें। उन्होंने यह भी कहा कि जीत का रास्ता जनता के बीच से होकर ही निकलता है, इसलिए जनता से सीधा संवाद पार्टी की प्राथमिकता होनी चाहिए।

इस बैठक में सिराथू से समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक और पार्टी की नेता डॉ. पल्लवी पटेल ने कहा कि जनता के सवालों पर मजबूत हस्तक्षेप, आंदोलनों और सामाजिक पहलकदमियों के जरिए पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। अब समय है कि इन पहलों को संगठनात्मक रूप से जोड़ा जाए, ताकि आने वाले दिनों में अप्रत्याशित सफलता हासिल की जा सके। उन्होंने कहा कि जनता बदलाव चाहती है, और इस बदलाव की अगुवाई अपना दल (कमेरावादी) करने को तैयार है।बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगामी जिला पंचायत चुनाव में पार्टी अपने अधिकृत प्रत्याशी उतारेगी और पूरे प्रदेश में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी। साथ ही नवंबर के अंतिम सप्ताह से देवीपाटन मंडल से “गांव चलो अभियान” की शुरुआत की जाएगी, जिसका नेतृत्व डॉ. पल्लवी पटेल करेंगी। इस अभियान का उद्देश्य गांव-गांव तक संगठन को सशक्त बनाना और जनता के बीच सीधा जुड़ाव बढ़ाना रहेगा। इस दौरान कार्यकर्ता गांवों में जाकर जनता की समस्याएं सुनेंगे और पार्टी की नीतियों को घर-घर तक पहुंचाएंगे।पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सी.एल. पटेल ने नई प्रदेश कमेटी की घोषणा की और कई मंडल एवं जिलाध्यक्षों के नामों का मनोनयन किया। उन्होंने कहा कि अब संगठन को नई ऊर्जा की जरूरत है। हर जिले में समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें पंचायत चुनाव की तैयारियों का जायजा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव पार्टी के लिए एक अवसर है, जिससे संगठनात्मक ढांचा मजबूत किया जा सके और हर गांव में पार्टी की उपस्थिति दर्ज कराई जा सके।

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव का राजनीतिक महत्व किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं है। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 2021 के पंचायत चुनाव में लगभग 8 लाख पदों पर चुनाव हुआ था। इनमें 3,050 जिला पंचायत सदस्य, 75,852 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 7,32,000 ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य शामिल थे। उस चुनाव में करीब 13 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने नामांकन किया था, जिनमें से 3.19 लाख उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे। वहीं मतदान प्रतिशत लगभग 75 प्रतिशत रहा था  जो प्रदेश की लोकतांत्रिक भागीदारी की मजबूती को दर्शाता है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पंचायत चुनाव सिर्फ स्थानीय निकायों का चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के लिए जमीनी मजबूती का पैमाना बन चुके हैं।राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनाव में जीत हासिल करने वाली पार्टियां आगामी विधानसभा चुनाव में स्वाभाविक रूप से लाभ की स्थिति में रहती हैं। यही वजह है कि अपना दल (कमेरावादी) ने पंचायत चुनाव को संगठनात्मक विस्तार का माध्यम बनाया है। प्रदेश में करीब 75 जिलों और 826 विकास खंडों में फैले संगठनात्मक ढांचे को सक्रिय करने का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी का फोकस विशेष रूप से ओबीसी, दलित और ग्रामीण महिलाओं* पर रहेगा। पार्टी का मानना है कि ये वर्ग सामाजिक न्याय और विकास की नीतियों के प्रति संवेदनशील हैं और इन्हें अपनी ओर आकर्षित कर संगठन को मजबूत किया जा सकता है।

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में जब पल्लवी पटेल ने सिराथू से उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को 7,337 मतों के अंतर से हराया था, तो इस जीत ने प्रदेश की राजनीति में बड़ा संदेश दिया था कि जनता अब वैकल्पिक राजनीति की ओर देख रही है। पार्टी अब उसी आत्मविश्वास को पंचायत स्तर तक पहुंचाना चाहती है। कृष्णा पटेल ने बैठक में कहा कि जनता अब पारदर्शिता, जवाबदेही और सशक्त नेतृत्व चाहती है, और अपना दल (कमेरावादी) इन तीनों पर खरा उतरने की कोशिश कर रहा है।वर्तमान में प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया जारी है। अनुमान है कि पंचायत चुनाव 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में हो सकते हैं। इससे पहले पार्टी ने हर जिले में समीक्षा बैठकों और प्रशिक्षण शिविरों की रूपरेखा तैयार कर ली है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर पंचायत चुनाव में पार्टी अपने दम पर 15 से 20 प्रतिशत सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करती है, तो 2027 विधानसभा चुनाव में उसका प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव सिर्फ सत्ता की सीढ़ी नहीं बल्कि संगठन की गहराई की कसौटी भी हैं। भाजपा, सपा और बसपा जैसे दलों के पास पहले से मजबूत जमीनी नेटवर्क है। ऐसे में अपना दल (कमेरावादी) के सामने चुनौती बड़ी जरूर है, लेकिन मौके भी उतने ही बड़े हैं। पार्टी अगर अपने “गांव चलो अभियान” को सही दिशा में ले जाती है और बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत कर पाती है, तो आने वाले वर्षों में यह प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।कुल मिलाकर, लखनऊ में हुई यह बैठक सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि अपना दल (कमेरावादी) के नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। कृष्णा पटेल के नेतृत्व और पल्लवी पटेल की सक्रियता ने पार्टी में नई ऊर्जा भर दी है। पंचायत चुनावों को संगठन की जड़ें फैलाने का माध्यम बनाकर पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि वह अब किसी गठबंधन की मोहताज नहीं रहना चाहती। पार्टी की राह कठिन जरूर है, पर उसका हौसला बुलंद है  और यही हौसला उसे 2027 के रण में नई ताकत के साथ उतार सकता है।

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