अमेरिका ने जनवरी 2026 में 75 देशों के नागरिकों के लिए स्थायी निवास, यानी इमिग्रेंट वीज़ा की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है। यह रोक 21 जनवरी 2026 से लागू होगी और तब तक जारी रहेगी जब तक अमेरिका यह सुनिश्चित नहीं कर लेता कि नए आवेदक सरकारी सहायता या वेलफेयर योजनाओं पर निर्भर नहीं होंगे। इस सूची में पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, ईरान, रूस, नाइजीरिया और अन्य देश शामिल हैं। भारत इस सूची में नहीं है, जिससे भारतीय नागरिक फिलहाल इस फैसले से अछूते हैं।अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन संभावित आवेदकों के लिए जरूरी है जो अमेरिका पहुंचने के बाद आर्थिक रूप से सरकारी योजनाओं पर निर्भर हो सकते हैं और अमेरिकी करदाताओं पर बोझ बढ़ा सकते हैं। प्रशासन ने ‘पब्लिक चार्ज’ नियम के तहत वीज़ा आवेदकों की जांच को और कड़ा कर दिया है। नए नियमों में आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, आर्थिक स्थिति, शिक्षा, कौशल और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान भी परखा जाएगा। साथ ही पिछले किसी सरकारी लाभ लेने का रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा होगा।यह नीति केवल इमिग्रेंट वीज़ा पर लागू होगी, न कि नॉन‑इमिग्रेंट वीज़ा पर। यानी छात्र वीज़ा, पर्यटक वीज़ा और कार्य वीज़ा फिलहाल जारी रहेंगे। हालांकि इमिग्रेंट वीज़ा प्रक्रिया में देरी अन्य श्रेणियों के आवेदकों पर अप्रत्यक्ष असर डाल सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस नीति का उद्देश्य अमेरिकी करदाताओं के धन और सामाजिक सुरक्षा संसाधनों पर संभावित बोझ को रोकना है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और वहां के सैन्य नेतृत्व ने अमेरिका से अच्छे संबंध बनाए रखने और ट्रंप प्रशासन को खुश करने के लिए कई प्रयास किए। प्रधानमंत्री ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया और कई बार उनकी पैरवी की। इसके बावजूद पाकिस्तान को सूची में रखा गया, जिससे यह साफ है कि अमेरिकी इमिग्रेशन नीति राजनीतिक दबाव या रिश्तों से प्रभावित नहीं होती।विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अमेरिका की सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखा गया है। हाल के घटनाक्रमों में, वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड के दो जवानों पर हमला करने वाले आरोपी को उच्च जोखिम वाले व्यक्ति के रूप में देखा गया। इसी कारण से कुछ देशों को “हाई रिस्क” श्रेणी में रखा गया 2024 में अमेरिका ने छह लाख से अधिक इमिग्रेंट वीज़ा जारी किए थे। इनमें बड़ी संख्या अमेरिकी नागरिकों के करीबी रिश्तेदारों की थी। नवंबर 2025 में अमेरिकी दूतावासों को निर्देश दिए गए थे कि यह सुनिश्चित किया जाए कि नए आवेदक सरकारी मदद पर निर्भर न हों। नए नियम इसी प्रक्रिया को और कड़ा कर रहे हैं।
इस रोक का प्रभाव लाखों लोगों के अमेरिकी सपनों पर पड़ेगा। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश प्रवासी अमेरिकी नागरिकों की तुलना में कम सरकारी लाभ लेते हैं। फिर भी प्रशासन ने संभावित आर्थिक बोझ को रोकने के लिए यह कदम उठाया है। आलोचकों का कहना है कि यह नीति पारिवारिक एकता और रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है और वैश्विक स्तर पर अमेरिका की छवि पर भी असर डाल सकती है।रोक की सूची में पाकिस्तान और बांग्लादेश के अलावा अफगानिस्तान, ईरान, नाइजीरिया, रूस सहित अन्य 75 देश शामिल हैं। प्रशासन ने कहा कि इस नीति के दौरान आवेदन जमा किए जा सकते हैं और इंटरव्यू भी लिए जा सकते हैं, लेकिन वीज़ा जारी नहीं होंगे।इस नीति के तहत अमेरिकी प्रशासन अब आवेदकों की विस्तृत पृष्ठभूमि जांच करेगा। इसमें शिक्षा, पेशेवर कौशल, स्वास्थ्य, परिवार की स्थिति और भाषा कौशल के साथ पिछले किसी सरकारी लाभ का रिकॉर्ड शामिल होगा। वीज़ा साक्षात्कार अब अंग्रेजी में लिया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए आवेदक अमेरिकी समाज पर बोझ न बनें और टैक्सदाताओं का पैसा सही तरीके से इस्तेमाल हो।
हालांकि आलोचना भी सामने आई है। कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने कहा है कि यह नीति अत्यधिक कठोर है और इससे पारिवारिक पुनर्मिलन और रोजगार पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा यह उन देशों के युवा और पेशेवरों के लिए अमेरिका में स्थायी रूप से बसने के अवसर सीमित कर सकती है। अमेरिका की यह नीति इमिग्रेशन में एक नया और सख्त रुख दर्शाती है। यह नीति आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को सर्वोपरि रखती है और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से उच्च जोखिम वाले देशों के प्रवासियों पर नियंत्रण करती है। पाकिस्तान की तमाम कोशिशों और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद अमेरिका ने स्पष्ट किया कि इमिग्रेशन नीति केवल सामाजिक और आर्थिक हितों के आधार पर लागू होगी।इस कदम से स्पष्ट हो गया है कि अमेरिकी इमिग्रेशन नीति में राजनीतिक दबाव का कोई प्रभाव नहीं है। यह नीति लाखों लोगों के अमेरिकी सपनों को प्रभावित करेगी और वैश्विक स्तर पर अमेरिका की इमिग्रेशन नीति की दिशा को परिभाषित करेगी। भविष्य में भी यह नीति आर्थिक बोझ और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से इमिग्रेशन नियमों को और कठोर बनाने का संकेत देती है।
