रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने धर्म पूछकर निर्दाेष लोगों की हत्या की, लेकिन भारत ने उनके कर्मों के आधार पर करारा जवाब दिया। राजनाथ सिंह ने भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ देश की कार्रवाई दृढ़ और प्रभावी रही है।उन्होंने कहा, “पहलगाम में आतंकवादियों ने कायरतापूर्ण तरीके से निर्दाेष लोगों को निशाना बनाया। उन्होंने धर्म पूछकर हमला किया, लेकिन हमने उनके कर्मों को देखकर जवाब दिया। ऑपरेशन सिंदूर इसका स्पष्ट उदाहरण है, जिसने आतंकवाद के आकाओं को उनकी औकात दिखा दी।” रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकता है और देश की सेना को पूरी छूट दी गई है कि वह आतंकियों और उनके समर्थकों को सबक सिखाए।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि उनके मार्गदर्शन में भारत ने न केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि वैश्विक मंच पर भी आतंकवाद के खिलाफ मजबूत रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली और दृढ़ संकल्प से पूरा विश्व परिचित है। हम शांति के लिए हाथ बढ़ाते हैं, लेकिन अशांति फैलाने वालों को उसी भाषा में जवाब देना भी जानते हैं।”पहलगाम हमले में 26 निर्दाेष लोगों की जान गई थी, जिसकी जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली थी। इस हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, जिससे पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ भारत के संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह भारत को अस्थिर करने का सपना छोड़ दे, क्योंकि भारत अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और सक्षम है।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत की सेना और सुरक्षा बल पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी खतरे का सामना करने में सक्षम हैं। उन्होंने लखनऊ के कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को आश्वस्त किया कि सरकार हर जरूरी कदम उठाएगी ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। राजनाथ सिंह ने शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।इसके साथ ही, उन्होंने स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा की और लखनऊ के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, और इसे भारत की कठोर नीति का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।
