नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण Belonging: A Journey of Love में 6 दिसंबर 1992 की अयोध्या घटना से जुड़ा एक निजी अनुभव साझा किया है. उन्होंने बताया कि जब वह टेलीविजन पर अयोध्या में मस्जिद का विध्वंस देख रही थीं, तो उनकी आंखों से आंसू निकल आए थे. सोनिया गांधी के मुताबिक, उस घटना ने उन्हें यह एहसास कराया कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं ने जिस धर्मनिरपेक्ष भारत की कल्पना की थी, उसे बचाए रखने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी.
सोनिया गांधी का यह संस्मरण 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाला है. किताब में उन्होंने अपने निजी जीवन, गांधी परिवार से जुड़ाव, भारतीय राजनीति में अपनी यात्रा और देश के सामाजिक-राजनीतिक बदलावों पर विचार साझा किए हैं. अयोध्या का यह प्रसंग इसलिए अहम है, क्योंकि इसमें वह केवल एक ऐतिहासिक घटना का जिक्र नहीं करतीं, बल्कि उस समय अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया और भारत के भविष्य को लेकर अपनी चिंता भी बताती हैं.
सोनिया गांधी ने किताब में लिखा है कि दिसंबर 1992 में अयोध्या में मस्जिद के विध्वंस की खबर वह टेलीविजन पर देख रही थीं. इस दृश्य को देखकर वह भावुक हो गईं और उनके आंसू निकल आए. उनके मुताबिक, उसी समय उन्हें महसूस हुआ कि भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बनाए रखना आने वाले समय की बड़ी चुनौती होगी.
अयोध्या में उस समय राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर आंदोलन तेज हो चुका था. मस्जिद को लेकर यह दावा किया जाता रहा था कि उसका निर्माण एक प्राचीन हिंदू मंदिर के अवशेषों पर हुआ था. 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों की भीड़ ने विवादित ढांचे को गिरा दिया. इस घटना ने देश की राजनीति और सामाजिक संबंधों पर गहरा असर डाला.
सोनिया गांधी ने इस घटना को अपने संस्मरण में उस दौर के बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलावों के संदर्भ में रखा है.
इस संस्मरण में सोनिया गांधी की एक और टिप्पणी चर्चा में है. उन्होंने स्वीकार किया कि बीजेपी और उसकी हिंदुत्व राजनीति के उभार में कांग्रेस की अपनी नाकामियों का भी योगदान रहा.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस कई मायनों में आत्मसंतुष्ट रही और उसका रवैया ढीला-ढाला था. यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सोनिया गांधी केवल विरोधी दल की राजनीति पर सवाल नहीं उठा रहीं, बल्कि अपनी पार्टी के पुराने राजनीतिक रवैये पर भी आत्ममंथन कर रही हैं.
उनकी इस स्वीकारोक्ति को कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और 1990 के दशक में उत्तर भारत में हुए बदलावों के संदर्भ में समझा जा सकता है. हालांकि, यह सोनिया गांधी का अपना राजनीतिक आकलन है, किसी स्वतंत्र जांच या निष्पक्ष अध्ययन का निष्कर्ष नहीं.
अयोध्या विवाद भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली मुद्दों में से एक रहा है. 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद देशभर में तनाव और हिंसा की घटनाएं हुईं. इस विवाद पर लंबे समय तक कानूनी और राजनीतिक बहस चलती रही.
नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला सुनाया. अदालत ने विवादित भूमि पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया और मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया.
इसके बाद 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समारोह में शामिल हुए. इस तरह 1992 की घटना से शुरू हुई राजनीतिक और कानूनी बहस ने कई दशकों बाद एक नया चरण देखा.
सोनिया गांधी के संस्मरण में 1992 की घटना का जिक्र इसी लंबे ऐतिहासिक बदलाव के बीच उनके निजी अनुभव को सामने लाता है.
सोनिया गांधी ने अपनी किताब में 1975 में लगाए गए आपातकाल पर भी अपनी राय रखी है. उन्होंने आपातकाल लागू करने के फैसले को गलती बताया है. साथ ही लिखा है कि उन्हें लगता है कि उनकी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी बाद में इस फैसले पर ऐसा ही महसूस हुआ होगा.
उन्होंने यह भी लिखा कि अगर संजय गांधी को नियंत्रित रखा गया होता, तो आपातकाल के बाद हुए ज्यादातर नुकसान को रोका जा सकता था.
यह टिप्पणी इसलिए उल्लेखनीय है, क्योंकि सोनिया गांधी ने गांधी परिवार के राजनीतिक इतिहास के एक विवादास्पद अध्याय पर भी अपनी राय दर्ज की है.
Belonging: A Journey of Love सोनिया गांधी का व्यक्तिगत संस्मरण है. इसमें उनके इटली में बचपन से लेकर राजीव गांधी से मुलाकात, गांधी परिवार में आने, निजी त्रासदियों और राजनीति में उनकी भूमिका तक का सफर शामिल है.
किताब में इंदिरा गांधी की 1984 में हत्या और राजीव गांधी की 1991 में हत्या जैसे जीवन बदल देने वाले घटनाक्रमों का भी जिक्र है. सोनिया गांधी ने अपने निजी जीवन और सार्वजनिक भूमिका के बीच के संबंधों को भी इसमें दर्ज किया है.
इस किताब का भारत में प्रकाशन HarperCollins India कर रहा है और इसकी निर्धारित रिलीज तारीख 10 नवंबर 2026 है. किताब के सामने आने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अयोध्या, आपातकाल और कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति से जुड़े इन प्रसंगों पर पूरा विवरण किस रूप में सामने आता है.
सोनिया गांधी का 1992 के अयोध्या प्रसंग को याद करना केवल एक भावनात्मक संस्मरण नहीं है. इसमें तीन अलग-अलग पहलू दिखाई देते हैं.
इन तीनों बातों को अलग-अलग समझना जरूरी है. सोनिया गांधी का भावनात्मक अनुभव उनका निजी संस्मरण है, जबकि कांग्रेस की नाकामी पर उनकी टिप्पणी उनका राजनीतिक आकलन है. दोनों को एक ही तरह के तथ्य के रूप में नहीं देखना चाहिए.
1. सोनिया गांधी ने अयोध्या की 1992 की घटना के बारे में क्या बताया?
सोनिया गांधी ने अपनी किताब में बताया कि जब उन्होंने टेलीविजन पर अयोध्या में मस्जिद का विध्वंस देखा, तो उनकी आंखों से आंसू निकल आए थे.
2. सोनिया गांधी की किताब का नाम क्या है?
उनकी किताब का नाम Belonging: A Journey of Love है.
3. सोनिया गांधी की किताब कब प्रकाशित होगी?
किताब की निर्धारित प्रकाशन तारीख 10 नवंबर 2026 है.
4. सोनिया गांधी ने कांग्रेस के बारे में क्या स्वीकार किया?
उन्होंने कहा कि बीजेपी और उसकी हिंदुत्व राजनीति के उभार में कांग्रेस की अपनी नाकामियों का भी योगदान रहा. उन्होंने अपनी पार्टी को कई मामलों में आत्मसंतुष्ट बताया.
5. सोनिया गांधी ने इमरजेंसी के बारे में क्या कहा?
उन्होंने 1975 में आपातकाल लागू करने के फैसले को गलती बताया और कहा कि इंदिरा गांधी को भी बाद में ऐसा ही महसूस हुआ होगा.
6. अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला कब सुनाया था?
सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला सुनाया था.
7. अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कब हुई थी?
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई थी.
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