उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के जिम में हिन्दू युवतियों के धर्मातंरण और ब्लैकमेलिंग के चौंकाने वाला मामला सामने आने के बाद हिन्दूवादी संगठन उग्र हो गये हैं, वहीं कई समाज सेवी संगठन कह रहे हैं कि जिम? सैलून जैसी जगह पर मॉ-बाप को अपनी बेटियों को नहीं भेजना चाहिए जिसे दूसरे धर्म के लोग संचालित कर रहे हों। क्योंकि यह धर्मांतरण का बड़ा अड्डा बनते जा रहे हैं। ऐसी जगहों पर दूसरे धर्म के ट्रेनर हिन्दू युवतियों को मीठी बातों में फंसाकर ब्लैकमेल करते हैं और फिर जबरन धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया जाता है। मिर्जापुर के मामले में पीड़ित युवतियों की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार जिम सील कर दिए और चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया,लेकिन यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर सनसनी फैला रही है, बल्कि पूरे देश में हिंदू युवतियों को निशाना बनाकर धर्मांतरण की सिलसिला चल रही षड्यंत्र की पोल खोल रही है। मिर्जापुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है, जिसमें ब्लैकमेल के लिए अंतरंग वीडियो और फोटो का इस्तेमाल उजागर हुआ है।
गौरतलब है कि मिर्जापुर के जिम में धर्मातरण के मामले का खुलासा तब हुआ जब मिर्जापुर की दो युवतियां पुलिस के पास पहुंचीं और उन्होंने जिम ट्रेनरों द्वारा की गई बदसलूकी की पूरी वारदात बयान की। आरोपियों ने जिम में ट्रेनिंग के बहाने युवतियों से दोस्ती गढ़ी, फिर निजी बातचीत के दौरान उनका शारीरिक शोषण किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल शुरू कर दिया। जब पीड़ित डर के मारे चुप रहीं, तो आरोपियों ने धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि वीडियो वायरल करने की धमकी दी जा रही थी, जबकि धर्म बदलने पर सब कुछ ठीक हो जाएगा। पीड़ितों ने बताया कि आरोपी खुद को इस्लामिक संगठनों से जुड़ा बताते थे और धर्मांतरण के बाद शादी का लालच भी देते थे। पुलिस ने मौके पर छापेमारी की तो जिमों से आपत्तिजनक सामग्री, मोबाइल फोन और धर्मांतरण से जुड़े प्रचारक सामग्री बरामद हुई। एसपी मिर्जापुर ने बताया कि आरोपी लंबे समय से इस धंधे में लिप्त थे और कई अन्य युवतियां भी उनका शिकार हो सकती हैं।
यह मिर्जापुर की घटना कोई एकाकी मामला नहीं है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में हिंदू युवतियों को प्रलोभन, ब्लैकमेल या धमकी देकर धर्मांतरण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में कानपुर में एक प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी ने सहकर्मी युवती को ब्लैकमेल कर इस्लाम कबूल करवाया था। वहां भी अंतरंग फोटो का इस्तेमाल किया गया और मामला तब खुला जब पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर शिकायत की। इसी तरह लखनऊ के एक सैलून में हेयरड्रेसर ने ग्राहक युवती को फंसाया और धर्म बदलने का दबाव बनाया। वाराणसी में एक कोचिंग सेंटर से ऐसी ही खबर आई, जहां टीचर ने छात्राओं को निशाना बनाया। मेरठ के एक पार्लर में ब्लैकमेल का शिकार हुई युवती ने खुदकुशी कर ली, जिसके बाद पुलिस ने जांच में धर्मांतरण का एंगल पकड़ा।
ये मामले ज्यादातर निजी संस्थानों, दुकानों, जिम, सैलून या छोटे-मोटे कार्यालयों से जुड़े हैं, जहां युवतियां रोजगार या सेवाओं के लिए जाती हैं। आरोपियों का उकसाने का तरीका एक जैसा होता है- पहले दोस्ती, फिर शोषण, ब्लैकमेल और अंत में धर्मांतरण का दबाव। कई मामलों में विदेशी फंडिंग वाले संगठनों का हाथ भी सामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्लव जिहादश् और धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल में कमी बनी हुई है। एनसीआरबी डेटा के अनुसार, 2024 में उत्तर प्रदेश में 500 से अधिक धर्मांतरण संबंधी शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 60 प्रतिशत से ज्यादा महिलाओं से जुड़ी थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है।
इस सिलसिले को जोड़कर देखें तो एक सुनियोजित साजिश का पता चलता है। जिम जैसे जगहों पर युवा वर्ग ज्यादा आकर्षित होता है, जहां फिटनेस के नाम पर शोषण आसान हो जाता है। मिर्जापुर मामले में आरोपी ट्रेनर खुद को श्फिटनेस गुरुश् बताकर युवतियों का भरोसा जीतते थे। इसी तरह सैलून और पार्लरों में सुंदरता के बहाने नजदीकी बनाई जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ये घटनाएं सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश हैं। भाजपा नेता ने इसे श्लव जिहाद का नया रूपश् बताते हुए सख्त कानून की मांग की, जबकि विपक्ष ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। सामाजिक कार्यकर्ता पूजा शाक्य कहती हैं, ष्युवतियों को सतर्क रहना होगा। जिम या सैलून चुनते समय रिव्यू और बैकग्राउंड चेक जरूरी है।ष्
सरकार ने उत्तर प्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2021 को और सख्त किया है, जिसमें जबरन धर्मांतरण पर 10 साल की सजा का प्रावधान है। मिर्जापुर पुलिस अब अन्य जिलों से भी ऐसी शिकायतें जुटा रही है। एनजीओ श्हिंदू हेल्पलाइनश् ने बताया कि पिछले दो सालों में 2000 से ज्यादा ऐसी कॉल्स आई हैं। फिर भी, पीड़िताएं डर के कारण शिकायत करने से हिचकिचाती हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महिलाओं को साइबर क्राइम पोर्टल पर तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए। सरकार को भी चाहिए कि यह सिलसिला जल्द से जल्द रोका जाये। मिर्जापुर जैसी घटनाएं समाज को झकझोर रही हैं। पुलिस की सतर्कता और सामाजिक जागरूकता से ही इसे रोका जा सकता है। युवतियों को सशक्त बनाना जरूरी है ताकि वे ऐसी साजिशों का मुंहतोड़ जवाब दें। अन्यथा, ये छोटे-छोटे संस्थान धर्मांतरण के अड्डे बनते रहेंगे। (
