उस शख्स को इतना महत्व क्यों दिया जाए, चीफ जस्टिस की ओर जूता उछालने वाले पर बोला SC

भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की ओर जूता उछालने की कोशिश करने वाले शख्स के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सोमवार को इस संबंध में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि आखिर राकेश किशोर को इतना महत्व देने की जरूरत ही क्या है। राकेश किशोर ने ही चीफ जस्टिस की ओर जूता उछालने की कोशिश की थी, जिसे रोक लिया गया था। बेंच ने कहा कि राकेश किशोर को अवमानना का नोटिस भेजने का अर्थ होगा कि हम उसे महत्व दे रहे हैं और ऐसा करने की तो जरूरत ही नहीं है।

अदालत ने कहा कि यह समझने की जरूरत है कि उस शख्स को इतना महत्व क्यों देना है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे लोगों की सिस्टम में कोई जगह नहीं है। उसके खिलाफ अवमानना का केस करने का मतलब होगा कि उसे बेवजह तवज्जो देना, जिसके वह लायक ही नहीं है। हम इस मामले में उसके प्रति वही रवैया रखेंगे, जैसा चीफ जस्टिस ने रखा है। दरअसल इस मामले को लेकर जस्टिस गवई ने कहा था कि मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। यही नहीं उन्होंने जूता उछालने की कोशिश के आरोपी के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई या केस चलाए जाने से भी इनकार किया था।

अब अदालत ने उनके ही रुख को नजीर बनाते हुए कोई अवमानना की कार्रवाई न करने का फैसला लिया है। जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि हम आरोपी वकील के खिलाफ केस चलाए जाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नोटिस दिए जाने से फिर उस शख्स को तवज्जो मिलेगी, जबकि इस मामले को भुलाने की जरूरत है। बेंच ने कहा कि कोर्ट में नारे लगाना या फिर जूता उछालना सीधे तौर पर अवमानना की कार्रवाई के तहत आता है। लेकिन यह संबंधित जज के ऊपर है कि मामला चले या नहीं, जिसकी अदालत में ऐसा हुआ हो या जिसे टारगेट किया गया हो। अदालत ने कहा कि यह मामला है, जिसे समय के साथ भूल जाना चाहिए।

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