संविदा कर्मियों के भरोसे खस्ताहाल स्कूलों का निरीक्षण



घाटोल. महीनों से मानदेय का इंतजार कर रहे संविदा कर्मियों पर अब खस्ता हालत स्कूलों के निरीक्षण का जिम्मा डाल दिया गया है। विभाग की ओर से यह आदेश अचानक जारी करने से कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के अनुसार, संविदा कर्मियों को पिछले छह माह से वेतन नहीं मिला है। इसके बावजूद उन्हें स्कूल निरीक्षण करने का दायित्व सौंपा गया। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का सवाल है कि क्या संविदा कर्मियों की रिपोर्ट और विभागीय अभियंताओं की रिपोर्ट को समान रूप से मान्य माना जाएगा ? लोगों का कहना है कि यदि भविष्य में किसी स्कूल भवन में हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ? आरोप है कि सरकार केवल औपचारिकता निभाने के लिए ऐसे आदेश निकाल रही है।

एक ओर विभागीय अभियंताओं को निरीक्षण के लिए सरकारी वाहन व सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहीं दूसरी ओर संविदा कर्मियों को बरसात और कठिन परिस्थितियों में अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। दोनों की रिपोर्ट को समान मान लेना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग निरीक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए और संविदा कर्मियों का शोषण बंद करे। साथ ही जिन अभियंताओं की लापरवाही से स्कूल भवन अधूरे या जर्जर हुए, उनकी जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।



सरकार को भेजा ज्ञापन

बांसवाड़ा. राजस्थान शिक्षक संघ ने बांसवाड़ा जिले में 1806 राजकीय प्राथमिक विद्यालय के 3789 कमरों की स्थिति चिन्ताजनक होने का दावा कर जर्जर खंडहर खस्ताहाल भवनों की मरम्मत की जगह नए कक्षा कक्ष व परिसर बनवाने की मांग उठाई है।संघ के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र चौधरी ने इसे लेकर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, शिक्षा मंत्री सहित शिक्षा अधिकारियों को भेजे ज्ञापन में बताया कि पीएमश्री खांदू कॉलोनी और संदलाई का आंगनवाड़ी केंद्र गिरने पर अब प्रशासन और विभाग ने सक्रियता दिखाकर विभिन्न उपखण्डों में आदेश जारी कर दो दिन में शिक्षा केंद्रों की वास्तविक धरातलीय रिपोर्ट मांगी है। इसे लेकर रविवार को तकनीकी अधिकारियों की टीमें स्कूलों में गई तो कई जगह पीओ उपलब ही नहीं हुए।जैसे-तैसे स्कूल खुलवाकर निरीक्षण कराए गए। ज्ञापन में बताया कि टीएसपी एरिया बांसवाड़ा जिले में ही 396 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में 1994 कक्षा कक्ष, सुविधालय, किचन शेड, चारदीवारी गम्भीर रूप से जर्जर है। इसके अलावा बांसवाड़ा जिले में 1806 राजकीय प्राथमिक विद्यालय के 3789 कमरों की स्थिति चिंताजनक है।



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