उत्तर प्रदेश की राजनीति में सैफई परिवार का नाम दशकों से ताकत, एकजुटता और संगठन का प्रतीक रहा है, लेकिन इस बार चर्चा सत्ता या चुनाव की नहीं, बल्कि एक निजी रिश्ते के सार्वजनिक हो जाने की है. समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव और उनकी पत्नी, भाजपा नेता व उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के रिश्ते में आई दरार ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है. एक इंस्टाग्राम पोस्ट ने उस प्रेम कहानी को सवालों के घेरे में ला दिया, जिसकी शुरुआत कभी ईमेल से हुई थी और जिसका जश्न सैफई की भव्य शादी में पूरे देश ने देखा था.सोमवार सुबह प्रतीक यादव के वेरिफाइड इंस्टाग्राम अकाउंट से किया गया एक पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गया. पोस्ट में प्रतीक ने अपर्णा यादव को ‘स्वार्थी’ और ‘फैमिली डेस्ट्रॉयर’ बताते हुए जल्द तलाक लेने की बात कही. उन्होंने यह भी लिखा कि उनकी मानसिक स्थिति इस समय ठीक नहीं है और उनकी पत्नी को इसकी कोई परवाह नहीं है. पोस्ट की भाषा बेहद व्यक्तिगत और भावनात्मक थी, जिसने लोगों को चौंका दिया. कुछ ही समय में यह मामला यूपी की सियासत का बड़ा विषय बन गया. हालांकि, इसके बाद अपर्णा यादव के भाई की ओर से सफाई आई कि प्रतीक का इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हुआ है और यह पोस्ट उन्होंने खुद नहीं लिखी. लेकिन तब तक मामला सार्वजनिक बहस का रूप ले चुका था.
प्रतीक और अपर्णा की कहानी अचानक शुरू नहीं हुई थी. यह रिश्ता स्कूल के दिनों में शुरू हुआ था. साल 2001 में एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में दोनों की मुलाकात हुई. उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था, बातचीत ईमेल के जरिए होती थी. प्रतीक ने अपर्णा को लगातार ईमेल लिखे और धीरे-धीरे दोनों करीब आते गए. अपर्णा को शुरुआत में यह भी नहीं पता था कि प्रतीक यादव सैफई परिवार से जुड़े हैं. करीब दस साल तक चला यह रिश्ता 2011 में सगाई और फिर शादी तक पहुंचा. दिसंबर 2011 में सैफई में हुई इस शादी को उस समय शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया. अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और देश की कई नामी हस्तियां इस समारोह में शामिल हुई थीं. लखनऊ से सैफई तक जश्न का माहौल था.शादी के बाद अपर्णा यादव सिर्फ सैफई परिवार की बहू नहीं रहीं. उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की. 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उन्हें लखनऊ कैंट सीट से उम्मीदवार बनाया, हालांकि उन्हें भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी के हाथों हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं. 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले अपर्णा यादव ने समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया. उस समय मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक रूप से उन्हें आशीर्वाद दिया था, लेकिन सैफई परिवार के भीतर मतभेद की बातें भी सामने आती रहीं.
आज अपर्णा यादव भाजपा की सक्रिय नेता हैं और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष के पद पर हैं. वहीं प्रतीक यादव राजनीति से दूरी बनाए रखते हुए रियल एस्टेट और फिटनेस के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं. दोनों की दो बेटियां हैं और लंबे समय तक यह परिवार सार्वजनिक रूप से एकजुट नजर आता रहा. ऐसे में इंस्टाग्राम पोस्ट ने हर किसी को हैरान कर दिया. सवाल यह उठने लगे कि क्या यह सिर्फ पति-पत्नी का निजी विवाद है या इसके पीछे राजनीतिक और पारिवारिक तनाव भी है.प्रतीक यादव की पोस्ट के बाद अपर्णा यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं उठा. उनकी ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. समाजवादी पार्टी ने इस पूरे मामले पर बेहद सतर्क रुख अपनाया है. पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि यह निजी मामला है और सोशल मीडिया पर आने वाली हर बात की सच्चाई जांचना जरूरी है. पार्टी ने साफ किया कि यह कोई नीतिगत या राजनीतिक मुद्दा नहीं है.
इस विवाद ने सैफई परिवार की उस छवि को भी झटका दिया है, जिसे लंबे समय तक एकजुट और अनुशासित माना जाता रहा. अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष हैं, अपर्णा यादव भाजपा में हैं और अब प्रतीक यादव का निजी जीवन चर्चा के केंद्र में है. राजनीति और परिवार के रिश्ते यहां एक-दूसरे से टकराते नजर आ रहे हैं. यही वजह है कि यह मामला सिर्फ एक तलाक की खबर नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है.चुनाव आयोग में दिए गए हलफनामों के मुताबिक, अपर्णा यादव और प्रतीक यादव के पास करीब 23 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है. अपर्णा यादव के पास करीब दो करोड़ रुपये के आभूषण बताए गए हैं, जबकि प्रतीक यादव के पास पांच करोड़ से ज्यादा कीमत की लेम्बोर्गिनी कार है. इन आंकड़ों का जिक्र भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग निजी विवाद को संपत्ति और राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इंस्टाग्राम पोस्ट की सच्चाई क्या है. क्या यह वास्तव में प्रतीक यादव की भावनाओं की अभिव्यक्ति थी या अकाउंट हैक होने का दावा सही है. जब तक दोनों पक्षों की ओर से साफ बयान नहीं आता, तब तक अटकलें चलती रहेंगी. लेकिन इतना तय है कि इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों का निजी जीवन भी कब राजनीति का मुद्दा बन जाए, कहा नहीं जा सकता.ईमेल से शुरू हुई प्रेम कहानी अगर सच में सोशल मीडिया पोस्ट पर खत्म होती है, तो यह सिर्फ एक रिश्ते का अंत नहीं होगा. यह सैफई परिवार और यूपी की राजनीति के लिए भी एक संवेदनशील मोड़ होगा. फिलहाल, सबकी निगाहें अपर्णा यादव की प्रतिक्रिया और इस पूरे मामले की सच्चाई पर टिकी हैं.
