मणिपुर एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राज्य के सबसे संवेदनशील जिलों में से एक चुराचांदपुर का दौरा किया। खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री ने इम्फाल से सड़क मार्ग के जरिए लगभग 65 किलोमीटर लंबी यात्रा की और चुराचांदपुर पहुँचे। यह यात्रा उस समय हुई जब लगातार बारिश से इलाके की स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे रास्ते पर विशेष इंतज़ाम किए थे।
यह मोदी का 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद मणिपुर का पहला बड़ा दौरा है। उस हिंसा में मीतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष ने राज्य को महीनों तक अस्थिर कर दिया था। हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए, सैकड़ों जानें गईं और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा असर पड़ा। चुराचांदपुर, जो कुकी बहुल इलाका है, हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में गिना गया। इसी वजह से प्रधानमंत्री का वहां पहुँचना केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी है।
इम्फाल एयरपोर्ट पर उतरने के बाद प्रधानमंत्री का स्वागत राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और मुख्य सचिव पुनीत गोयल ने किया। इसके बाद उनका काफिला सड़क मार्ग से चुराचांदपुर रवाना हुआ। यात्रा के दौरान सख्त सुरक्षा इंतज़ाम देखे गए। सेना और असम राइफल्स की तैनाती हर संवेदनशील बिंदु पर की गई थी। चुराचांदपुर पहुँचकर प्रधानमंत्री ने हिंसा से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने राहत शिविरों में रह रहे लोगों से संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। महिलाओं, बुज़ुर्गों और युवाओं से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार पुनर्वास और शांति स्थापना के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस दौरे का दूसरा अहम पहलू विकास परियोजनाएँ रहीं। प्रधानमंत्री ने चुराचांदपुर और इम्फाल में करीब 8,500 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इसमें सड़कों का जाल बिछाना, शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना और युवाओं के लिए रोजगार सृजन शामिल है। मोदी ने कहा कि विकास ही स्थायी शांति का रास्ता है और इन योजनाओं से राज्य के पिछड़े इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
राजनीतिक रूप से भी यह दौरा महत्वपूर्ण है। लंबे समय से विपक्ष प्रधानमंत्री पर आरोप लगाता रहा है कि उन्होंने मणिपुर की हिंसा के दौरान चुप्पी साधे रखी। अब जबकि दो साल बाद मोदी सीधे प्रभावित इलाके में पहुँचे हैं, इसे केंद्र सरकार के सक्रिय हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि आलोचक मानते हैं कि केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि ज़मीन पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है। राहत शिविरों में रह रहे हजारों लोग अब भी स्थायी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं।
चुराचांदपुर के लोग इस दौरे से उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि यदि केंद्र सरकार वाकई गंभीर है, तो पुनर्वास, न्याय और विकास की योजनाएँ जल्द ही धरातल पर दिखनी चाहिए। लोगों को यह भरोसा भी चाहिए कि ऐसी हिंसा दोबारा न हो। वहीं विश्लेषकों का मानना है कि मोदी का यह दौरा केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। आने वाले समय में पूर्वोत्तर की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों पर इसका असर साफ दिखाई देगा।प्रधानमंत्री की यह यात्रा यह संदेश भी देती है कि केंद्र सरकार राज्य की चुनौतियों से पीछे नहीं हटेगी। विकास और सुरक्षा, दोनों पर समान रूप से काम होगा। यदि योजनाएँ समय पर पूरी हुईं और पुनर्वास प्रक्रिया तेज़ हुई, तो यह मणिपुर के लिए नई सुबह का संकेत साबित हो सकती है।
