संजय सक्सेना,लखनऊ
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसने देश के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे अपने पत्र में धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों को इस्तीफे की वजह बताया। उन्होंने लिखा, श्स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67(क) के तहत तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं।श् इस घोषणा ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ही सियासी माहौल को गर्मा दिया। धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था, लेकिन महज तीन साल बाद ही उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। वैसे यह साफ है कि राज्यसभा में एनडीए का बहुमत होने के कारण अगला उप राष्ट्रपति भी बीजेपी की पसंद का ही बनना तय है।
जगदीप धनखड़ ने 6 अगस्त 2022 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराकर यह पद हासिल किया था। बतौर राज्यसभा सभापति, उन्होंने संसद की कार्यवाही में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में संविधान, लोकतंत्र और भारतीय संस्कृति जैसे मुद्दों पर उनकी बेबाक राय चर्चा में रही। उन्होंने फर्जी खबरों के खिलाफ सख्ती और श्वोकल फॉर लोकलश् जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। लेकिन उनके अचानक इस्तीफे ने विपक्ष को सवाल उठाने का मौका दे दिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे श्अप्रत्याशितश् करार देते हुए कहा, श्शाम 5 बजे तक मैं उनके साथ था, और 7: 30 बजे फोन पर बात हुई थी। यह इस्तीफा सिर्फ स्वास्थ्य कारणों तक सीमित नहीं लगता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से धनखड़ को फैसला बदलने के लिए मनाने की अपील की।
विपक्षी नेताओं ने धनखड़ के इस्तीफे को लेकर कई कयास लगाए। कुछ का मानना है कि यह फैसला संसद में हाल के विवादों, खासकर जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव से जुड़ा हो सकता है, जिसे धनखड़ ने स्वीकार किया था। बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तो इसे श्ऑपरेशन सिंदूरश् और चुनाव आयोग की कथित गतिविधियों से जोड़कर एनडीए पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि धनखड़ का इस्तीफा सियासी दबाव का नतीजा हो सकता है। हालांकि, सत्तारूढ़ दल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह स्वास्थ्य से जुड़ा मामला बताया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया है, और इसे आगे की कार्यवाही के लिए गृह मंत्रालय को भेज दिया गया है। अब सवाल उठता है कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा? संविधान के मुताबिक, उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों द्वारा सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम से होता है। तब तक राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह कार्यवाहक सभापति की जिम्मेदारी संभालेंगे। एनडीए की राज्यसभा में बहुमत को देखते हुए अगले उपराष्ट्रपति के चयन में उसकी भूमिका अहम होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धनखड़ के इस्तीफे पर शुभकामनाएं देते हुए कहा, श्जगदीप धनखड़ जी ने देश की सेवा में कई भूमिकाएं निभाईं। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।श् सियासी हलकों में अब इस बात की चर्चा तेज है कि क्या यह इस्तीफा सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित है, या इसके पीछे कोई और सियासी कहानी है? फिलहाल, यह सवाल सबके जेहन में है।
खैर, 2024 में, एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने 9 राज्यों की 12 रिक्त सीटों पर उपचुनाव में 11 सीटें जीतकर राज्यसभा में बहुमत हासिल कर लिया। बीजेपी के पास अब 96 सांसद हैं, और एनडीए की कुल संख्या 112 है। छह मनोनीत सदस्यों और एक निर्दलीय के समर्थन से एनडीए का आंकड़ा 119 तक पहुंच गया, जो वर्तमान प्रभावी बहुमत के लिए पर्याप्त है। इसी के चलते अगला वाइस प्रेसीडेंट भी बीजेपी की पसंद का होना तय है।
