नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की वर्तमान में नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री की दौड़ में सबसे अग्रणी नाम हैं। उनका भारत से गहरा संबंध है, विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में, और वह अपने छात्र जीवन के दौरान कई वर्ष भारत में रह चुकी हैं. सुशीला कार्की’’ नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रही हैं। उन्होंने जुलाई 2016 से जून 2017 तक सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला.अपनी निष्पक्षता, निडरता और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के लिए मशहूर हैं.संसद द्वारा उन पर 2017 में महाभियोग भी चलाया गया, जिसे सार्वजनिक दबाव के बाद वापस ले लिया गया. नेपाल में चल रहे जेन जी आंदोलन के दबाव के बाद उनका नाम अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर ज्यादा आगे है.छात्रों और युवाओं का मानना है कि उनके पास राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है, जिससे वे निष्पक्ष नेतृत्व कर सकती हैं.
सुशीला कार्की के भारत से संबंध की बात की जाये तो वह 1975 में भारत के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी में पढ़ी हैं. उन्होंने बीसचयू से राजनीतिक शास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की. उन्हीं दिनों कार्की ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ नृत्य भी सीखा। उस समय वे भारतीय राजनेताओं और सांस्कृतिक परिवेश से प्रेरित रहीं.बीएचयू में रहकर उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन को सीधे तौर पर अनुभव किया, और एक शिक्षक बनने का प्रस्ताव भी मिला था, लेकिन उन्होंने आगे की पढ़ाई छोड़ दी.यहां के हॉस्टल में गंगा किनारे रहने की उनकी यादें आज भी उनके दिल में ताज़ा हैं.भारत के नेताओं के प्रति उन्होंने हमेशा सकारात्मक राय व्यक्त की है और भारत-नेपाल के संबंधों को भाई-बहन जैसा बताया. सुशीला कार्की वर्ष 1973-1975 के दौरान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में मास्टर करने के दौरान भारत में रही. इसके अतिरिक्त, वह बीएचयू के कार्यक्रमों और नेपाल-भारत सांस्कृतिक मेलों में भी वे आती रही हैं। पढ़ाई के बाद उन्होंने नेपाल लौटकर वहीं से कानून की शिक्षा ली और करियर शुरू किया.
