उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा नेता और समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव ने खुलेआम ऐलान कर दिया है कि वे जल्द ही अपर्णा से तलाक लेंगे। प्रतीक ने कहा, ष्अपर्णा ने हमारे परिवार के रिश्ते खराब कर दिए हैं। उन्होंने राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चक्कर में परिवार को तार-तार कर दिया। अब और बर्दाश्त नहीं होता।ष् यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे यादव परिवार की आंतरिक कलह फिर से सुर्खियों में आ गई है।अपर्णा यादव, जो मूल रूप से समाजवादी पार्टी की पूर्व विधायक रह चुकी हैं, ने 2022 में भाजपा का दामन थाम लिया था। यह फैसला उनके ससुराल वालों के लिए आश्चर्यजनक था, क्योंकि यादव परिवार लंबे समय से सपा का गढ़ रहा है। प्रतीक यादव, अपर्णा के पति, मूल रूप से लंदन में रहते हैं और व्यापार से जुड़े हैं। शादी के 20 साल बाद भी उनका वैवाहिक जीवन अब टूटने की कगार पर पहुंच गया लगता है। प्रतीक ने आरोप लगाया कि अपर्णा की राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने परिवार को बर्बाद कर दिया।
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रिश्तों में खटास की शुरुआत अपर्णा के राजनीति में उतरने से मानी जा रही है। 2017 में अपर्णा ने लखनऊ के कैंट विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्यों, खासकर अपने देवर अखिलेश यादव और ससुर मुलायम सिंह से मतभेद उभरे। सपा के अंदरूनी कलह के बीच अपर्णा ने खुद को श्मुलायम की बेटीश् बताकर अलग पहचान बनाने की कोशिश की। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनका भाजपा में शामिल होना परिवार के लिए सदमा था।प्रतीक के मुताबिक, अपर्णा ने राजनीति चुनकर परिवार की परंपराओं को तोड़ा। ष्वह लंदन छोड़कर लखनऊ आ गईं और सपा छोड़कर भाजपा में चली गईं। इससे न सिर्फ यादव परिवार बंटा, बल्कि हमारे निजी रिश्ते भी प्रभावित हुए,ष् प्रतीक ने कहा। अपर्णा की बेटी राधिका, जो लंदन में पढ़ाई कर रही हैं, भी इस कलह से दुखी बताई जा रही हैं। प्रतीक का दावा है कि अपर्णा ने परिवार की एकजुटता को दांव पर लगा दिया।
यादव परिवार में अपर्णा का भाजपा जॉइन करना सबसे बड़ा विवाद बना। मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद अखिलेश यादव ने सपा की कमान संभाली, लेकिन अपर्णा को परिवार से अलग-थलग कर दिया गया। सपा समर्थक उन्हें श्गद्दारश् कहते हैं, जबकि भाजपा उन्हें श्मुलायम की सच्ची वारिसश् बताती है। प्रतीक ने खुलासा किया कि अपर्णा के इस कदम से उनके ससुराल के रिश्ते ठंडे पड़ गए। मैंने उन्हें राजनीति से दूर रहने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने नहीं मानी। अब परिवार के लोग उनसे बात तक नहीं करते, उन्होंने कहा।इसके अलावा, वैवाहिक जीवन में भी अनबन की खबरें आती रहीं। प्रतीक लंदन में रहते हैं, जबकि अपर्णा लखनऊ में सक्रिय हैं। दूरी ने रिश्ते कमजोर किए। प्रतीक का आरोप है कि अपर्णा ने परिवार की संपत्ति और राजनीतिक विरासत पर कब्जे की कोशिश की, जो असफल रही। भाजपा ने अपर्णा को विधान परिषद सदस्य बनाया, लेकिन सपा ने उन्हें पूरी तरह बहिष्कृत कर दिया। यह सियासी दुश्मनी घर तक पहुंच गई।
प्रतीक का तलाक का बयान अपर्णा के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, ष्परिवार के हित में यह फैसला लेना पड़ रहा है। अपर्णा ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।ष् अपर्णा ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यादव वोट बैंक को प्रभावित करेगा। भाजपा अपर्णा को पर्दे के पीछे इस्तेमाल कर रही है, लेकिन यह पारिवारिक कलह उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। सपा नेता ने इसे भाजपा की साजिश बताया, जबकि भाजपा ने चुप्पी साध ली। अपर्णा का राजनीतिक सफर अब अनिश्चित हो गया है। क्या यह तलाक सिर्फ पारिवारिक है या राजनीतिक रणनीति का हिस्सा? समय बताएगा। फिलहाल, यादव परिवार की यह आंतरिक जंग उत्तर प्रदेश की सियासत को नई दिशा दे रही है।
