MiG-21 रिटायर, तेजस नहीं तैयार: एयरफोर्स चीफ की चिंता, HAL की देरी भारत के लिए खतरा?

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की इस साल फरवरी में बेंगलुरु के ‘एरो इंडिया शो’ के दौरान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के शीर्ष अधिकारियों से हुई बातचीत वायरल हो गई थी. एयर चीफ मार्शल सिंह ने वायुसेना को तय वादे के मुताबिक 83 तेजस Mk 1A लड़ाकू विमान अब तक न सौंपने पर एचएएल की आलोचना की. उन्होंने पूछा कि एचएएल इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता क्यों नहीं दे रहा है और इसके ‘चलता है’ रवैये की आलोचना करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा पर चिंता जताई. वायुसेना को अभी तक एक भी तेजस Mk 1A विमान नहीं मिला है. वहीं पिछले हफ्ते चंडीगढ़ में आयोजित एक समारोह में वायुसेना ने अपने 36 मिग-21 लड़ाकू विमानों को सेवा से विदा कर दिया. इस मौके पर खुद वायुसेना प्रमुख ने मिग-21 उड़ाकर आखिरी सलामी दी.ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या एचएएल अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए समय पर विमान दे पाएगा, क्योंकि यह भारत की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है.

MiG-21 की विदाई के बाद बढ़ी चिंता

पिछले हफ्ते वायुसेना ने अपने मिग-21 स्क्वॉड्रन को रिटायर कर दिया. 1960 के दशक से वायुसेना की रीढ़ माने जाने वाले मिग-21 अब पुराने हो चुके थे और हादसों के कारण भी बदनाम थे. भारत ने 1963 में शामिल हुए मिग-21 के 874 विमानों तक इस्तेमाल किया, जिनमें से 60% से ज्यादा एचएएल ने बनाए थे.1971 की जंग से लेकर करगिल युद्ध, बालाकोट एयरस्ट्राइक और हाल के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक… मिग-21 भारत का भरोसेमंद हथियार रहा, लेकिन अब वे इतिहास बन चुके हैं.

वायुसेना के पास अभी कितने फाइटर जेट?

वायुसेना की तय शक्ति 42 लड़ाकू स्क्वॉड्रन की है, लेकिन फिलहाल वह सिर्फ 29 स्क्वॉड्रन के साथ काम कर रही है. इनमें हर स्क्वॉड्रन में 16-18 विमान हैं. मिग-21 की चरणबद्ध विदाई से यह कमी और बढ़ गई है, जबकि नए विमानों की समय पर सप्लाई नहीं हो रही. एचएएल के पास वर्ष 2021 से ही 47,000 करोड़ रुपये का 83 तेजस Mk 1A का ऑर्डर है, लेकिन अब तक कोई डिलीवरी नहीं हुई. यह डिलीवरी 2024 में शुरू होकर 2028 तक पूरी होनी थी. वायुसेना इन्हें जल्द चाहती है, लेकिन इन 83 विमानों में से सिर्फ पहले दो इस साल आने की उम्मीद है.एचएएल के सामने सबसे बड़ी दिक्कत इन विमानों के लिए अमेरिका की GE एयरोस्पेस से इंजन मंगाने की है. इन्हीं इंजनों पर तय होगा कि डिलीवरी कितनी जल्दी होगी. अब तक सिर्फ तीन इंजन एचएएल को मिले हैं, जिनमें पहला मार्च में आया. एचएएल का कहना है कि ढांचा तैयार होगा, लेकिन इंजन आने के बाद ही विमान सौंपे जा सकेंगे.

लेकिन सरकार कितना इंतजार कर सकती है?

पिछले हफ्ते सरकार ने एचएएल के साथ एक और बड़ा करार किया. इसके तहत 97 हल्के लड़ाकू विमान (LCA) Mk1A खरीदे जाने हैं, जिसकी कीमत 66,500 करोड़ रुपये है. अब एचएएल को वायुसेना के लिए 180 लड़ाकू विमान (पुराने 83 तेजस समेत) समय पर देने होंगे और उत्पादन क्षमता भी बढ़ानी होगी.यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि भारत पाकिस्तान से पीछे नहीं रह सकता. पाकिस्तान के पास 25 स्क्वॉड्रन हैं, जबकि भारत के पास 29. पाकिस्तान ने चीन से 35-40 जे-35 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान लेने का करार किया है.‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में देखें तो, इसमें लड़ाकू विमानों ने बड़ी भूमिका निभाई. भारत जानता है कि पाकिस्तान के खिलाफ हवाई प्रभुत्व बनाए रखना जरूरी है. पाकिस्तान और चीन दोनों की चुनौतियों के बीच भारत अपनी वायु शक्ति में कोई कमी नहीं छोड़ सकता.इसीलिए सरकार ने एचएएल से 97 LCA Mk1A के लिए करार किया, जिनकी डिलीवरी 2027-28 में शुरू होगी और छह साल में पूरी होगी. इन विमानों में 64% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री होगी और इनमें पहले के Mk1A कॉन्ट्रैक्ट की तुलना में 67 नई चीजें जोड़ी जाएंगी.इनमें उत्तम AESA रडार, स्वयं रक्षा कवच (Swayam Raksha Kavach) और कंट्रोल सरफेस एक्ट्यूएटर्स जैसे उन्नत स्वदेशी सिस्टम लगाए जाएंगे, जो आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेंगे.

लेकिन बड़ा सवाल वही है  क्या विमान समय पर आएंगे?

मिग-21 के रिटायर होने के बाद अब फोकस वायुसेना की रीढ़ सु-30MKI पर है, जिनकी संख्या लगभग 270 है. भारत के पास फ्रांस के राफाल के दो स्क्वॉड्रन भी हैं (कुल 36 विमान), जो क्षेत्र में भारत को बढ़त देते हैं.‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान देखा गया कि राफाल बिना सीमा पार किए लंबी दूरी की सटीक हमले कर सकते हैं. मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर भी वायुसेना के बेड़े में शामिल हैं. विदेश से खरीद में वक्त लगता है. भारत ने हाल ही में 26 राफाल-एम विमानों की खरीद को मंजूरी दी है, जो नौसैनिक विमान वाहक पोत के लिए हैं, लेकिन ये 2029 से पहले नहीं आएंगे.

भारत बना अपना 5th Gen फाइटर जेट

इसके बाद आता है AMCA… पांचवीं पीढ़ी का मल्टी-रोल, दो इंजन वाला स्टील्थ फाइटर जेट, जिसे DRDO के तहत एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) बना रही है. इसे एचएएल की जगह निजी उद्योग के साथ मिलकर विकसित करने की योजना है.रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अगस्त में घोषणा की थी कि भारत AMCA के लिए फ्रांस की सैफ्रान कंपनी के साथ उन्नत जेट इंजन संयुक्त रूप से बनाएगा. लेकिन इसका आना भी समय लेगा और AMCA के सेवा में शामिल होने में एक दशक लग सकता है.यह सब एचएएल के समय पर डिलीवरी करने की जरूरत पर जोर देता है. अभी तीन इंजन आ चुके हैं और GE से उम्मीद है कि मार्च 2026 तक 12 और इंजन आएंगे तथा 2028 तक कुल 99 इंजन पहुंच जाएंगे.

ऑपेरशन सिंदूर की सीख

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध में वायु शक्ति और तकनीक कितनी अहम है. वायुसेना ने पहलगाम आतंकी हमले के कुछ घंटों के भीतर ही पाकिस्तान के अंदर गहरे तक हमला कर दिखाया कि वायु शक्ति तेज और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है. रडार साइट्स, हैंगर और एयरबेस पर सटीक हमलों ने दिखाया कि कैसे संतुलित वायु शक्ति बिना संघर्ष बढ़ाए दुश्मन को कड़ा जवाब दे सकती है.ऐसे शत्रुतापूर्ण माहौल में भारत को अपनी वायु शक्ति सर्वोच्च बनाए रखनी होगी. आगे का रास्ता है आत्मनिर्भरता चाहे वह लड़ाकू विमान हों या जेट इंजन. भारत पाकिस्तान या चीन के सामने कोई भी बढ़त खो नहीं सकता.

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