बाबा भोलेनाथ की नगरी वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर सौंदर्यीकरण के नाम पर हो रही तोड़फोड़ के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से हंगामा मच गया। जिला प्रशासन और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। जांच में पता चला कि ये वीडियो और तस्वीरें कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई जनरेटेड हैं। एआई से बनी फर्जी फोटो को सोशल मीडिया पर माहौल खराब करने की कोशिश के आरोप में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, कांग्रेस के सांसद पप्पू यादव सहित आठ लोगों पर मुकदमा दर्ज हो चुका है। सभी को पूछताछ के लिए नोटिस भी भेज दिए गए हैं। गौरतलब हो, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद वाराणसी पहुंचकर मामले की पूरी सच्चाई सामने रखी। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधा और कहा कि ये झूठी तस्वीरें शहर की छवि खराब करने की साजिश हैं। चौक थाने की पुलिस ने तकनीकी टीम के साथ गहन छानबीन आरंभ कर दी है। विश्वनाथ धाम के कुंभ महादेव मंदिर का स्थलीय दौरा किया गया। वहां वैयक्तिक स्थान निर्धारण यंत्र से तस्वीरें ली गईं। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि चौक थाने में दर्ज मुकदमों के तहत जांच तेजी से चल रही है। सोशल मीडिया पर प्रसारित मंदिर की तस्वीरें भ्रामक साबित हुईं। ये कुंभ महादेव मंदिर की हैं जो श्रीकाशी विश्वनाथ धाम परिसर में स्थित हैं। इन्हें गलत तरीके से मणिकर्णिका घाट से जोड़ा गया।यह घटना वाराणसी की पवित्रता और धार्मिक महत्व को निशाना बनाने वाली सियासत का नंगा चेहरा उजागर करती है। मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है जहां सदियों से अंतिम संस्कार होते आ रहे हैं। यहां सौंदर्यीकरण कार्य चल रहा है ताकि घाट की सफाई और सुविधा बढ़े। लेकिन विपक्ष ने इसे तोड़फोड़ का रूप देकर अफवाहें फैलाईं। सोशल मीडिया हैंडल्स पर वायरल हुए वीडियो में घाट पर भारी तोड़फोड़ दिखाई गई। लोग भड़क उठे और आक्रोश जताने लगे। प्रशासन ने सफाई दी कि ये सब कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित हैं। वास्तविकता में सौंदर्यीकरण कार्य व्यवस्थित ढंग से हो रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वाराणसी दौरे ने विपक्ष की बोलती बंद कर दी। उन्होंने कहा कि वाराणसी उनकी कर्मभूमि है और यहां की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। विपक्षी नेता संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर घाट पर तोड़फोड़ का आरोप लगाया। पप्पू यादव ने भी इसे सांस्कृतिक विरासत के विनाश का मामला बताया। लेकिन जांच में ये तस्वीरें कुंभ महादेव मंदिर की निकलीं। मंदिर विश्वनाथ धाम परिसर का हिस्सा है जो भगवान शिव को समर्पित है। इसे मणिकर्णिका घाट से जोड़ना जानबूझकर भ्रम फैलाने का प्रयास था। पुलिस ने आठ हैंडल्स की पहचान की जिनमें ये सामग्री पोस्ट हुई। मुकदमे दर्ज होने के बाद नोटिस जारी हो गए।वाराणसी पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय रही। तकनीकी विशेषज्ञों ने वीडियो की पड़ताल की। पाया गया कि ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहारे बनाए गए हैं। असली दृश्यों को तोड़मरोड़कर प्रस्तुत किया गया। वैयक्तिक स्थान निर्धारण यंत्र से मंदिर स्थल की तस्वीरें लेकर तुलना की गई। सब कुछ स्पष्ट हो गया। पुलिस आयुक्त ने कहा कि भ्रामक सामग्री फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह कानून का उल्लंघन है। सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाहें धार्मिक सौहार्द बिगाड़ सकती हैं।
यह प्रकरण उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष के बीच सियासी जंग को नई ऊंचाई दे रहा है। योगी सरकार पर वाराणसी को आधुनिक बनाने का आरोप लगता रहा है। विश्वनाथ धाम कॉरिडोर इसका प्रमुख उदाहरण है। लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। मणिकर्णिका घाट का सौंदर्यीकरण भी इसी कड़ी का हिस्सा है। घाटों को स्वच्छ और सुगम बनाने से पर्यटन बढ़ेगा। लेकिन विपक्ष इसे धरोहर नष्ट करने का मुद्दा बनाता है। संजय सिंह जैसे नेता दिल्ली से तीर चलाते हैं। पप्पू यादव बिहार से वाराणसी के मामलों में टांग अड़ाते हैं। योगी आदित्यनाथ ने इन्हें आड़े हाथों लिया। कहा कि ये लोग सच्चाई से भागते हैं।प्रशासन ने साफ किया कि मणिकर्णिका घाट पर कोई तोड़फोड़ नहीं हो रही। सफाई और मरम्मत कार्य नियमित हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्टेप्स मजबूत किए जा रहे हैं। बिजली और जल निकासी व्यवस्था बेहतर हो रही है। वायरल वीडियो में दिखाए गए दृश्य काल्पनिक हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बने होने से इनकी सत्यता शून्य है। चौक थाने की टीम सभी आरोपी हैंडल्स की जांच कर रही है। सोशल मीडिया कंपनियों से भी सहयोग मांगा गया है। नोटिस मिलने पर लोग पूछताछ के लिए हाजिर होंगे।
यह घटना सोशल मीडिया की शक्ति और दुरुपयोग दोनों को दर्शाती है। एक वीडियो वायरल होते ही हजारों लोग भड़क जाते हैं। धार्मिक स्थलों पर ऐसी अफवाहें खतरनाक साबित हो सकती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले भी ऐसे मामलों में सख्ती दिखाई है। योगी आदित्यनाथ की वाराणसी यात्रा ने संदेश दिया कि झूठ का पुलिंदा लंबा नहीं चलेगा। विपक्ष को सियासत के चक्कर में धार्मिक भावनाओं से खेलना महंगा पड़ेगा। पुलिस की जांच पूरी होने पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।वाराणसी जैसे पवित्र नगरी में शांति बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। सौंदर्यीकरण कार्य जारी रहेंगे। घाटों का नवीनीकरण शहर की गरिमा बढ़ाएगा। विपक्षी नेताओं को नोटिस मिल चुके हैं। संजय सिंह और पप्पू यादव जैसे नाम शामिल हैं। वे सफाई दें कि क्यों भ्रामक सामग्री फैलाई। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को चेतावनी दी कि सच्चाई सामने आ चुकी है। अब बचाव का कोई रास्ता नहीं। तकनीकी जांच से सारा भेद खुल चुका है।
यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। हिंदी पट्टी के राज्यों में सियासी बहस तेज हो गई। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर आरोप है कि वे उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करने के लिए कृत्रिम सामग्री का सहारा ले रहे हैं। योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता को ठेस पहुंचाने की कोशिश नाकाम रही। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष होगी। दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा दी जाएगी। वाराणसी की जनता ने प्रशासन का समर्थन किया। वे जानते हैं कि सौंदर्यीकरण से लाभ ही होगा।
