महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की हवाई दुर्घटना में अचानक मौत ने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हादसे को साजिश का नाम देते हुए कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अजित पवार और उनके चाचा शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का विलय होने वाला था। इसी बीच यह विमान हादसा हो गया। ममता ने जांच करने वाली एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले की पूरी तहकीकात सर्वोच्च न्यायालय से करानी चाहिए। उनकी यह बात केवल उनकी अपनी नहीं है। कई अन्य नेता भी अजित पवार की मौत पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
अजित पवार की मौत ने महाराष्ट्र में सन्नाटा छा गया है। वे लंबे समय से राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरे थे। किसान नेता के रूप में उनकी पहचान थी। वे बारिश के पानी के प्रबंधन और सिंचाई योजनाओं के लिए मशहूर रहे। उपमुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। लेकिन उनकी मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया। विमान हादसे की खबर आते ही मुंबई और पुणे में सियासी गतिविधियां तेज हो गईं। शरद पवार ने गहरी शोक संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि यह परिवार और पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। अजित पवार की पत्नी और करीबी सहयोगी सदमे में हैं। राज्यपाल ने शोक प्रकट किया और तीन दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महज हादसा था या इसके पीछे कोई गहरी चाल?
ममता बनर्जी ने कोलकाता में एक संवाददाता सम्मेलन बुलाकर इस मुद्दे पर खुलकर बोला। उन्होंने कहा कि अजित पवार शरद पवार के साथ फिर से एकजुट हो रहे थे। विलय की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। इसी समय विमान दुर्घटना हो गई। ममता ने पूछा कि क्या यह संयोग है? उन्होंने केंद्र की जांच एजेंसियों पर भरोसा न करने की बात कही। उनका कहना था कि ये एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम करती हैं। इसलिए सर्वाेच्च न्यायालय ही निष्पक्ष जांच कर सकता है। ममता की यह टिप्पणी विपक्षी दलों में समर्थन पा रही है। तृणमूल कांग्रेस के कई नेता उनके सुर में सुर मिला रहे हैं। पश्चिम बंगाल में यह मुद्दा गरमाया हुआ है। ममता ने महाराष्ट्र के नेताओं से भी इस पर एकजुट होने की अपील की।
ममता अकेली नहीं हैं। समाजवादी पार्टी के नेता ने भी अजित पवार की मौत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समय पर समय यह संदेहास्पद लग रहा है। विलय की खबरें सुर्खियां बटोर रही थीं। अचानक हादसा होना गोलमाल की बू देता है। दिल्ली के एक वरिष्ठ नेता ने टिप्पणी की कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं। जांच होनी चाहिए। ताकतवर लोग हादसों के जरिए दुश्मनों को रास्ते से हटाते रहे हैं। महाराष्ट्र के कुछ विधायकों ने भी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि विमान की तकनीकी खराबी का दावा जल्दबाजी में किया गया। ब्लैक बॉक्स की जांच जरूरी है। विपक्षी दल महाराष्ट्र विधानसभा में विशेष सत्र की मांग कर रहे हैं। वे इस मुद्दे को संसद तक ले जाना चाहते हैं।
यह विवाद महाराष्ट्र की सियासत को प्रभावित कर रहा है। अजित पवार की अनुपस्थिति में उनकी पार्टी के विधायक क्या करेंगे? शरद पवार अब अकेले पड़ सकते हैं। विलय की चर्चा अब ठंडी पड़ गई है। सत्ताधारी गठबंधन में दरारें उभर सकती हैं। मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया लेकिन जांच पर कुछ नहीं कहा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। हवाई अड्डे पर दुर्घटना स्थल की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। गवाहों के बयान अलग-अलग आ रहे हैं। कोई कहता है मौसम साफ था। कोई बोलता है विमान अचानक नीचे गिरा। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में इंजन फेलियर का जिक्र है। लेकिन पायलट की ट्रेनिंग और रखरखाव पर सवाल हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना राष्ट्रीय स्तर पर असर डालेगी। ममता बनर्जी का बयान विपक्ष को एकजुट करने का संकेत देता है। वे केंद्र सरकार पर हमला बोल रही हैं। अजित पवार की मौत से किसान मुद्दे प्रभावित होंगे। सिंचाई योजनाओं पर असर पड़ेगा। परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी है। हजारों समर्थक पुणे पहुंच रहे हैं। शरद पवार अंतिम यात्रा में शामिल होंगे। लेकिन सवाल बाकी हैं। क्या साजिश थी? जांच क्या कहेगी? ममता की मांग पर क्या अमल होगा? यह सब आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल राजनीति में संशय का माहौल है।
अजित पवार का राजनीतिक सफर लंबा रहा। वे युवावस्था से ही सक्रिय थे। विधायक बने। मंत्री पद संभाला। उपमुख्यमंत्री तक पहुंचे। विवादों से घिरे रहे लेकिन लोकप्रिय भी थे। भ्रष्टाचार के आरोप लगे लेकिन वे बचे रहे। अब उनकी मौत ने नया मोड़ ला दिया। ममता बनर्जी ने उन्हें सच्चा नेता कहा। उनका बयान भावुक था। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आएगी। कई नेता उनके अंतिम दर्शन के लिए जा रहे हैं। यह घटना विपक्ष को मजबूत कर सकती है। सत्तारूढ़ दल पर दबाव बढ़ेगा। सर्वाेच्च न्यायालय की दखल की मांग तेज हो रही है। जनता भी सतर्क है। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है। लोग साजिश के थ्योरी पर विश्वास कर रहे हैं।
महाराष्ट्र पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। केंद्र ने विशेष टीम भेजी है। लेकिन निष्पक्षता पर सवाल हैं। विपक्षी नेता धरना देने की योजना बना रहे हैं। ममता बनर्जी ने बंगाल में रैली का ऐलान किया। वे इस मुद्दे को उठाएंगी। अजित पवार की मौत ने साबित कर दिया कि राजनीति में खतरा हमेशा बना रहता है। विलय की चर्चा अब इतिहास बन गई। शरद पवार अकेले लड़ेंगे। उनकी पार्टी का भविष्य अनिश्चित है। यह हादसा राज्य की राजनीति को सालों तक प्रभावित रखेगा। सवाल उठते रहेंगे। सच्चाई का इंतजार है।
