दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ बच्चों की सेहत को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं और उनकी सांस लेने की गति बड़ों से अधिक होती है, इसलिए प्रदूषित हवा का असर उन पर ज्यादा पड़ सकता है। लगातार खांसी, घरघराहट, सांस लेने में परेशानी और रात में खांसी के कारण नींद खुलना ऐसे संकेत हैं जिन्हें माता-पिता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
AIIMS दिल्ली के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. काना राम जाट ने बच्चों पर प्रदूषण के असर और सांस संबंधी समस्याओं को लेकर महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। आइए जानते हैं कि किन लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है और प्रदूषण के दिनों में बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए माता-पिता क्या कर सकते हैं।
बच्चों के फेफड़े और सांस की नलियां अभी विकसित हो रही होती हैं। वे बड़ों की तुलना में तेजी से सांस लेते हैं और अपने शरीर के वजन के अनुपात में ज्यादा हवा अंदर लेते हैं। यही वजह है कि हवा में मौजूद छोटे प्रदूषक कण उनके श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
AIIMS दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. काना राम जाट के अनुसार, छोटे बच्चों की सांस की नलियां संकरी होती हैं और उनके फेफड़ों की क्षमता भी सीमित होती है। प्रदूषण बढ़ने पर उन्हें सांस संबंधी लक्षण अधिक गंभीर रूप में महसूस हो सकते हैं।
वायु प्रदूषण से बच्चों में खांसी, घरघराहट, सांस संबंधी संक्रमण और अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं। पहले से एलर्जी या सांस की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को विशेष सावधानी की जरूरत होती है।
माता-पिता को बच्चे की रोजमर्रा की गतिविधियों और व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। ये संकेत प्रदूषण से बढ़ी सांस संबंधी परेशानी या किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।
अगर बच्चा बार-बार खांस रहा है या उसकी खांसी रात में और बढ़ जाती है, तो इसे सामान्य मौसमी परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें। लगातार खांसी होने पर डॉक्टर से जांच कराएं।
बच्चे की सांस से सीटी जैसी आवाज आना या सीने से घरघराहट सुनाई देना सांस की नलियों में परेशानी का संकेत हो सकता है। खासकर अस्थमा या एलर्जी वाले बच्चों में यह लक्षण ध्यान देने योग्य है।
खेलते समय जल्दी सांस फूलना, सामान्य गतिविधियों में भी सांस लेने में दिक्कत होना या सीने में जकड़न महसूस करना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं।
अगर बच्चा खांसी या सांस की परेशानी के कारण रात में बार-बार जागता है, तो उसके लक्षणों पर ध्यान दें। लगातार ऐसा होने पर बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
पहले की तुलना में बच्चा जल्दी थकने लगे, दौड़ने या खेलने से बचने लगे अथवा सामान्य गतिविधियों के दौरान असहज महसूस करे, तो इसे भी गंभीरता से लें।
प्रदूषण और मौसम में बदलाव से कुछ बच्चों में एलर्जी जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं। बार-बार छींक आना, नाक बंद होना और आंखों में खुजली या पानी आना ऐसे संकेत हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए।
छोटे बच्चों में सर्दी-जुकाम, घरघराहट और सांस संबंधी संक्रमण की समस्या हो सकती है। प्रदूषण के दौरान पहले से मौजूद परेशानी बढ़ सकती है। बार-बार संक्रमण या लंबे समय तक लक्षण बने रहने पर डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
कुछ लक्षण ऐसे हैं जिनमें इंतजार नहीं करना चाहिए। AIIMS के बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार, बच्चे में निम्नलिखित संकेत दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें:
विशेष रूप से शिशुओं में सांस लेने में परेशानी को आपात स्थिति मानना चाहिए।
3 नवंबर 2026 को दिल्ली-NCR की हवा की गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है। 2 नवंबर को दिल्ली का AQI 324 तक पहुंचा था, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वायु गुणवत्ता की स्थिति के कारण CAQM ने दिल्ली-NCR में GRAP का दूसरा चरण लागू किया है।
ऐसे समय में बच्चों को प्रदूषण के संपर्क से बचाने के लिए माता-पिता कुछ सावधानियां अपना सकते हैं।
बच्चों को पार्क, सड़क या खुले मैदान में खेलने भेजने से पहले अपने इलाके का AQI चेक करें। हवा की गुणवत्ता खराब या बहुत खराब होने पर लंबे समय तक बाहर खेलने और तेज दौड़ने से बचाएं।
जब प्रदूषण का स्तर अधिक हो, तो बच्चों की आउटडोर गतिविधियां कम करें। स्कूल के बाद खेलकूद या व्यायाम को घर के अंदर शिफ्ट किया जा सकता है।
प्रदूषण अधिक होने के दौरान खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें। हवा की गुणवत्ता बेहतर होने पर कमरे में उचित वेंटिलेशन करें। जरूरत और बजट के अनुसार HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
घर में सिगरेट, अगरबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल और अन्य धुआं पैदा करने वाली चीजों का इस्तेमाल कम करें। रसोई में भी धुएं और प्रदूषण को जमा न होने दें।
बड़े बच्चों के लिए अच्छी फिटिंग वाला उपयुक्त पार्टिकुलेट फिल्टर मास्क अतिरिक्त सुरक्षा दे सकता है। मास्क बच्चे के चेहरे पर सही तरीके से फिट होना चाहिए। छोटे बच्चों, खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए मास्क इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
अगर बच्चे को अस्थमा या एलर्जी है, तो डॉक्टर की बताई दवाएं और एक्शन प्लान जारी रखें। इनहेलर, नेबुलाइजर या एंटीबायोटिक अपने आप शुरू या बंद न करें। हर बच्चे की जरूरत अलग हो सकती है।
बच्चे का नियमित टीकाकरण पूरा रखें और संतुलित भोजन दें। फल, सब्जियां और पौष्टिक आहार बच्चे की सामान्य सेहत के लिए जरूरी हैं। छह महीने तक शिशु को केवल मां का दूध देने की सलाह दी जाती है, यदि कोई चिकित्सकीय बाधा न हो।
AIIMS के बाल रोग विशेषज्ञ ने बच्चों में सांस संबंधी बीमारियों के इलाज को लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत बताई है।
अगर बच्चे को बार-बार खांसी, घरघराहट या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं।
दिल्ली-NCR में बढ़ता वायु प्रदूषण बच्चों के लिए गंभीर स्वास्थ्य चिंता बन सकता है। उनके विकसित होते फेफड़े और संवेदनशील सांस की नलियां प्रदूषित हवा से प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चे की खांसी, घरघराहट, सांस लेने में परेशानी और व्यवहार में बदलाव पर नजर रखनी चाहिए। AQI देखकर बाहर की गतिविधियां तय करना, घर के अंदर धुएं से बचना और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेना सबसे जरूरी कदम हैं।
प्रदूषण से बच्चों में खांसी, घरघराहट, सांस लेने में परेशानी, एलर्जी और अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं। कुछ बच्चों में सांस संबंधी संक्रमण भी गंभीर हो सकते हैं।
लगातार खांसी, रात में खांसी, छींक, नाक बंद होना, आंखों में जलन, घरघराहट और खेलते समय जल्दी थकना शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
CPCB के AQI पैमाने पर 201 से ऊपर की हवा ‘खराब’ श्रेणी में आती है। 301 से 400 ‘बहुत खराब’ श्रेणी है। ऐसे समय में बच्चों की बाहर की गतिविधियां कम करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार सावधानी बरतना बेहतर है।
HEPA फिल्टर वाला सही क्षमता का एयर प्यूरीफायर कमरे के अंदर प्रदूषक कणों को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, यह बाहर के प्रदूषण से पूरी सुरक्षा नहीं देता और सही फिल्टर की सफाई व रखरखाव जरूरी है।
अगर बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने का अंदर धंसना, नीले होंठ या असामान्य सुस्ती जैसे लक्षण हों तो तुरंत अस्पताल जाएं। घरेलू उपचार के भरोसे इंतजार न करें।
मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह डॉक्टर की जांच, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। बच्चे में सांस संबंधी लक्षण दिखने पर बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। गंभीर लक्षणों में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।
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