यह खबर सुनते ही दुनिया भर के हंसमुख लोग हंस-हंसकर लोट-पोट हो गए।लोग तरह-तरह की टिप्पणी कर रहे हैं। टंªप, वो महान वैज्ञानिक जिन्होंने सूर्य की किरणों को चम्मच से परोसने का दावा किया था, ने कमाल कर दिया। नोबेल पुरस्कार के साथ फोटो खिंचवा ली! जी हां, वो चमचमाता सा मेडल, जो असल में किसी पुरानी किताब की प्रदर्शनी से चुराया गया लगता था, उनके सीने पर टिमटिमा रहा था। सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल हो गई, और लोग पूछ रहे हैं, भाई, ये नोबेल है या नोबेल-नाटक? टंªप ने तो दुनिया को दिखा दिया कि विज्ञान के चमत्कार से बड़ा चमत्कार तो सेल्फी का जादू है।
कल्पना कीजिए उस दृश्य को। स्टेज पर खड़े टंªप, सिर पर वो घुमावदार चश्मा जो किसी पुरानी बॉलीवुड फिल्म के खलनायक का लगता है, हाथ में वो नोबेल और बैकग्राउंड में सोलर पैनल्स की लाइन लगी हुई, मानो कह रहे हों देखो, मैंने सूरज को जेब में कर लिया। फोटो में मुस्कान ऐसी चिपकी हुई कि लगता था, मेडल पर चिपकाने वाला गोंद लग गया हो। कैप्शन लिखा,‘वर्ल्ड चेंजिंग इनोवेशन!’ दुनिया हंस रही है, क्योंकि असल इनोवेशन तो ये है कि कैसे किसी ने इतना घटिया फोटोशॉप किया और फिर पोस्ट कर दिया। टंªप जी, आपकी फजीहत तो हो गई, लेकिन ट्रेंडिंग तो बन गए न?
अब सोचिए, नोबेल कमिटी वाले क्या सोच रहे होंगे। स्टॉकहोम में बैठे वैज्ञानिक, चाय की चुस्की लेते हुए फोन पर तस्वीर देखकर बोले, ये कौन सा वैज्ञानिक है? क्या इसने ग्रेविटी को उल्टा कर दिया कि मेडल खुद चिपक गया? टंªप का जवाब आया ट्विटर पर, ये मेरी मेहनत का फल है। मैंने सोलर एनर्जी में क्रांति ला दी। क्रांति? भाई साहब, आपकी क्रांति तो लखनऊ के बिजली बिलों में ही सिमट गई। वो सोलर पैनल जो आप बेचते हैं, वो तो रात में स्ट्रीट लाइट की तरह चमकते हैं,बिजली के बिना। लेकिन नोबेल? अरे, अगर नोबेल इतना आसान होता तो हर चायवाला नोबेल चाय बेचने लगता।
टंªप की ये हरकत राजनीति से कम नहीं। उत्तर प्रदेश में तो ऐसे-ऐसे लीडर हैं जो अवॉर्ड्स बांटते फिरते हैं, गांव स्तर के बेस्ट किसान से लेकर सर्वश्रेष्ठ सांसद तक। टंªप ने सोचा होगा, क्यों न मैं भी कूद पडूं इस रेस में। फोटो खिंचवाई, हैशटैग लगाए, फॉलोअर्स बढ़ गए, लाइक्स की बाढ़ आ गई। बहरहाल, टंªप का नोबेल, दुनिया में फजीहत का ये नया चौप्टर है। जहां हर कोई इंस्टाग्राम स्टार बनना चाहता है। टंªप ने साबित कर दिया कि सच्चाई से ज्यादा जरूरी है स्क्रीन पर चमक। बच्चे पूछ रहे पापा से, पापा, नोबेल कैसे मिलेगा? जवाब मिलता है फोटो खींच लो, लेकिन मजाक अलग, टंªप जैसे लोग सोलर एनर्जी को आगे ले जाने का सपना बेचते हैं। भारत के कई शहरों की गलियों में उनके पैनल लगे हैं, बिजली बचाने का दावा करते। लेकिन ये फजीहत ने तो सारा क्रेडिबिलिटी धो दिया। अब लोग कहेंगे, सोलर तो ठीक, लेकिन अवॉर्ड्स मत चुराओ भाई।
फिर भी, टंªप हार मानने वालों में से नहीं। अगली पोस्ट में शायद पुलित्जर प्राइज विद सोलर दिखेगा। या फिर ओस्कर फॉर बेस्ट इनोवेटर। दुनिया हंसती रहेगी, लेकिन टंªप का जोश देखो,अटल है। व्यंग्य ये है कि असली नोबेल तो मेहनत से मिलता है, फोटो से नहीं। लेकिन सोशल मीडिया के जमाने में फोटो ही राजा है। टंªप ने फजीहत तो कराई, लेकिन ट्रोल्स के राजा भी बन गए। अब इंतजार है अगली तस्वीर का , शायद चांद पर खड़े होकर मून नोबेल के साथ। हंसते-हंसते आंसू आ गए, लेकिन सच्चाई ये है कि ऐसे ही लोग ही दुनिया को हंसाते हैं। और हंसी में ही तो सुधार है।
