जिन्ना के दबाव में नेहरू ने वंदे मातरम और देश के टुकड़े किये थे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में वंदेमातरम के बहाने कांग्रेस पर ऐसा जोरदार प्रहार किया कि पूरा विपक्ष स्तब्ध रह गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना के दबाव में इस राष्ट्रगीत के महत्वपूर्ण भागों को काट दिया था, जिससे देश के बंटवारे की नींव पड़ गई। यह हमला इतना तीखा था कि कांग्रेस के नेता चुप्पी साधे बैठे रहे, और सदन में राष्ट्रभक्ति का माहौल बन गया। मोदी ने अपने भाषण में सबसे पहले वंदेमातरम की महिमा बयान की, जो बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखी थी और स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा बनी। उन्होंने बताया कि यह गीत 150 वर्ष पुराना हो चुका है, फिर भी कुछ लोग इसे तोड़ने की साजिश रचते रहे। विशेष रूप से 1937 में कांग्रेस की एक समिति ने नेहरू की अगुवाई में गीत के उन छंदों को हटा दिया, जिनमें मातृभूमि को देवी के रूप में पूजा गया था। मुस्लिम लीग ने इसका विरोध किया था, और जिन्ना ने लाहौर के एक समाचार पत्र में लेख लिखकर इसे पूरी तरह खारिज करने की मांग की। नेहरू ने लीग की भावनाओं का ख्याल रखते हुए गीत को छोटा कर दिया, जिसे मोदी ने देश विभाजन का प्रारंभिक कारण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के इस पवित्र मंत्र के साथ ऐसा अन्याय क्यों हुआ, और आज भी वही बांटने वाली मानसिकता देश को कमजोर कर रही है।

इस हमले से पहले भी वंदेमातरम का विरोध कई बार हुआ। 1905 में बंगाल विभाजन के समय मुस्लिम लीग के कुछ नेताओं ने इसे हिंदू भावना वाला बताकर ठुकराया। 1937 का सबसे बड़ा विवाद कांग्रेस के फैजपुर अधिवेशन में भड़का, जहां नेहरू की अध्यक्षता वाली समिति ने केवल पहले दो छंदों को स्वीकार किया। जिन्ना ने 1 मार्च 1938 को फिर मुहिम चलाई और 17 मार्च को नेहरू को पत्र लिखकर पूरा गीत त्यागने की मांग की। स्वतंत्रता के बाद भी 1950 के दशक में कुछ मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध जारी रखा। मध्य प्रदेश विधानसभा में 2023 में कांग्रेस सदस्यों ने गीत गाने के दौरान हंगामा किया, जिसे राष्ट्रगीत का अपमान कहा गया। हाल ही में कश्मीर में स्कूलों में गायन पर मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा ने आपत्ति जताई, क्योंकि मातृभूमि को नमन करना उनकी मान्यताओं के विरुद्ध था। महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के अबू आजमी ने स्कूलों में गायन के आदेश का विरोध किया। राज्यसभा में हाल के बुलेटिन ने जय हिंद और वंदेमातरम जैसे नारों पर रोक सुझाई, जिससे विवाद और भड़का। मोदी का यह प्रहार केवल इतिहास पर नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीति पर भी था। उन्होंने कांग्रेस को याद दिलाया कि जिन्ना के कहने पर नेहरू ने गीत तोड़ा, तो देश कैसे एक रहता। विपक्ष ने पलटवार की कोशिश की, लेकिन मोदी ने साफ कहा कि तुष्टिकरण की यह सोच ही बंटवारे का कारण बनी। भाजपा नेता अमित मालवीय ने भी सोशल मीडिया पर कांग्रेस को 1935 से ही गीत को सांप्रदायिक हितों के लिए छोटा करने का दोषी ठहराया। ममता बनर्जी जैसे नेताओं पर भी निशाना साधा गया, जो पहले इन नारों से दूर रहती थीं। इस बहस ने राष्ट्रगीत की पवित्रता को फिर से जीवंत कर दिया। युवा पीढ़ी को ऐसे इतिहास से सीखना चाहिए कि एकता के मंत्र को तोड़ना देश को कमजोर करता है।

वंदेमातरम का सफर स्वतंत्रता आंदोलन से शुरू होकर आजादी के बाद भी विवादों में रहा। बंकिम जी के इस गीत ने लाखों को जागृत किया, लेकिन कुछ ने इसे धार्मिक रंग देकर कमजोर करने की चेष्टा की। नेहरू युग में लीग के दबाव से छंटनी हुई, जिसे मोदी ने लोकसभा में उजागर कर विपक्ष को घेरा। आज जब राष्ट्र 150 वर्ष का उत्सव मना रहा, तो यह याद दिलाना जरूरी था कि राष्ट्रभक्ति में कोई समझौता नहीं। कांग्रेस का इतिहास तुष्टिकरण से भरा है, जो मोदी ने बेनकाब किया। इस हमले ने सदन को एकजुट कर दिया और देशभक्ति की लहर पैदा की। आगे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तेज होगा।कांग्रेस ने कई बार वंदेमातरम को कमजोर किया। 1937 के फैसले ने गीत की आत्मा ही निकाल दी। जिन्ना ने इसे त्यागने की मांग की, और नेहरू ने मान लिया। बाद में विधानसभाओं और स्कूलों में विरोध होता रहा। 

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