भारत ने जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया है। इसका जीडीपी अब लगभग 4.19 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि अमेरिका, चीन और जर्मनी अभी भी आगे हैं। भारत की अर्थव्यवस्था ने 2015 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर अब 4 ट्रिलियन डॉलर को पार कर लिया है। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा कि आईएमएफ डेटा के अनुसार यह उपलब्धि हासिल हुई है। यह तेजी इंफ्रास्ट्रक्चर, मेक इन इंडिया, जीएसटी और कोविड के दौरान राजकोषीय अनुशासन से संभव हुई।वर्तमान में भारत से आगे जो तीन देश हैं। उसमें अमेरिका की जीडीपी 30.50 ट्रिलियन डॉलर है। वहीं चीन की जीडीपी 19.23 ट्रिलियन डॉलर और जर्मनी की जीडीपी 4.74 ट्रिलियन डॉलर है।जापान का जीडीपी भारत के बराबर 4.19 ट्रिलियन डॉलर थी, लेकिन भारत ने इसे पार कर लिया।
आईएमएफ के अनुसार भारत 2027-28 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरा स्थान हासिल कर लेगा। नीति आयोग का अनुमान 2.5-3 वर्षों में यानी 2028 तक है, जब जीडीपी 5.5-7.3 ट्रिलियन डॉलर पहुंचेगी। मोर्गन स्टैनली ने 2028 का लक्ष्य रखा है। जर्मनी की ग्रोथ 2025 में जीरो रहने से भारत को फायदा होगा। गौतलब हो,भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। घरेलू मांग, निवेश, कम बेरोजगारी, शहरीकरण और मध्यम वर्ग का विस्तार मुख्य कारण हैं। आरबीआई ने 2025-26 के लिए 7.3 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान लगाया है। हालांकि प्रति व्यक्ति आय अभी कम (2934 डॉलर) है। बहरहाल, भारत की चुनौतियां भी कम नहीं है। देश की निम्न प्रति व्यक्ति आय, ग्रामीण संकट और वैश्विक व्यापार युद्ध चुनौतियां हैं। सुधारों से 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर संभव है। इसी सोच तहत भारत वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को नया आकार दे रहा है।
