नए साल के पहले दिन ही सोने-चांदी के दामों में आई तेज गिरावट ने बाजारों में हलचल मचा दी है। गुरुवार को देशभर के सर्राफा बाजारों में सोने का भाव 22 कैरेट के लिए 70,500 रुपये प्रति दस ग्राम तक लुढ़क गया, जो कल के 72,200 रुपये के स्तर से करीब 1,700 रुपये नीचे है। चांदी भी कमजोर पड़ी और 82,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जो इससे पहले के 84,500 रुपये से 2,500 रुपये घटी हुई है। यह गिरावट वैश्विक बाजारों की चाल के साथ-साथ घरेलू कारणों से उपजी है, जिससे निवेशकों और जेवर व्यापारियों में चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या यह गिरावट का दौर लंबा खिंचेगा या जल्द सुधार होगा?
सोने-चांदी के दामों में उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं है। पिछले साल नवंबर में सोने का भाव 78,000 रुपये के ऊंचे स्तर पर पहुंचा था, लेकिन दिसंबर तक यह 71,000 रुपये तक गिर गया। चांदी ने भी इसी तरह 90,000 रुपये से 82,000 रुपये की यात्रा तय की। नए साल के पहले ही दिन यह तेज गिरावट दर्ज करना चिंताजनक है। दिल्ली के सर्राफा बाजार में व्यापारियों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं। फेड ने दिसंबर में मात्र 25 आधार अंकों की कटौती की, जबकि बाजार 50 आधार अंकों की अपेक्षा कर रहा था। इससे डॉलर मजबूत हुआ और सोना-चांदी पर दबाव पड़ा। वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में सोने का भाव प्रति औंस 2,630 डॉलर तक खिसक गया, जो एक सप्ताह पहले के 2,700 डॉलर से 70 डॉलर कम है। चांदी 30.50 डॉलर प्रति औंस पर आ टिकी, जो 31.80 डॉलर से घटी।
भारतीय बाजार पर इसका असर सीधा पड़ा। मुंबई के जौहरी बाजार में सोने का भाव 70,200 रुपये प्रति दस ग्राम और चांदी का 81,800 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में भी यही हाल देखने को मिला। पिछले तीन महीनों में सोना औसतन 5 प्रतिशत गिर चुका है, जबकि चांदी में 7 प्रतिशत की कमी आई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों से प्रेरित है। वहां बेरोजगारी दर 4.2 प्रतिशत पर स्थिर रही और खुदरा बिक्री में 0.8 प्रतिशत वृद्धि हुई। इससे निवेशक सुरक्षित निवेश से हटकर शेयर बाजार की ओर मुड़ रहे हैं। भारत में रुपया भी 84.50 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर कमजोर बना हुआ है, जो आयातित सोने-चांदी को महंगा बनाता है, लेकिन गिरावट वैश्विक दबाव से ज्यादा है।
यह गिरावट कब तक चलेगी, इस पर मतभेद हैं। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि यह दौर दो से तीन महीने तक जारी रह सकता है। कारण, वैश्विक केंद्रीय बैंक सोने की खरीदारी धीमी कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल 100 टन से अधिक सोना खरीदा था, लेकिन अब यह गति मंद पड़ी है। चीन और रूस जैसे देश भी खरीदारी सीमित कर रहे हैं। अगर अमेरिकी ब्याज दरें ऊंची रहीं, तो सोने का भाव 68,000 रुपये तक जा सकता है। चांदी पर दबाव ज्यादा रहेगा, क्योंकि इसका उपयोग उद्योगों में अधिक होता है और मंदी के संकेत मिल रहे हैं। वैश्विक चांदी की मांग 2025 में 1.2 अरब औंस रहने का अनुमान है, जो उत्पादन से 200 मिलियन औंस कम है, लेकिन कीमतें दबाव में हैं।
दूसरी ओर, आशावादी कहते हैं कि गिरावट अस्थायी है। भारत में विवाह सीजन फरवरी से शुरू हो रहा है, जब मांग बढ़ेगी। अक्टूबर से जनवरी तक औसतन 400 टन सोने की खपत होती है। त्योहारों के बाद शादियों में जेवर खरीदारी तेज हो जाती है। भौगोलिक तनाव भी सोने को समर्थन देंगे। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और यूक्रेन युद्ध से सुरक्षित निवेश की मांग बनी रहेगी। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, भारत में मानसून सामान्य रहने से चांदी की कृषि उपयोगिता बढ़ेगी। पिछले साल मानसून की कमी से चांदी 15 प्रतिशत चमकी थी। अगर फेडरल रिजर्व फरवरी में फिर ब्याज कटौती करे, तो भाव उछाल मार सकते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोना मार्च तक 74,000 रुपये और चांदी 86,000 रुपये पर पहुंच सकती है।
इस बीच उपभोक्ताओं को फायदा हो रहा है। छोटे जेवर व्यापारी और मध्यम वर्ग खरीदारी कर रहे हैं। लखनऊ के सर्राफा बाजार में एक व्यापारी ने बताया कि पिछले दो दिनों में 20 किलोग्राम सोना बिका, जो सामान्य से दोगुना है। हालांकि, बड़े निवेशक सतर्क हैं। वे गिरावट के तला छूने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार की नीतियां भी असर डालेंगी। आयात शुल्क 6 प्रतिशत पर स्थिर है, लेकिन कोई छूट मिली तो राहत होगी। वैश्विक सोने के भंडार 35,700 टन हैं, जिसमें भारत का हिस्सा 800 टन से अधिक है।
कुल मिलाकर, यह गिरावट का दौर छोटा ही रहेगा। ऐतिहासिक रूप से नए साल में सोने में औसतन 2 प्रतिशत गिरावट के बाद 8 प्रतिशत उछाल आता है। 2024 में भी जनवरी में 3 प्रतिशत कमी के बाद साल 12 प्रतिशत चढ़ा। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि 68,000 रुपये के आसपास सोना और 78,000 रुपये पर चांदी खरीदें। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह सुनहरा अवसर है। बाजार की चाल पर नजर रखें, क्योंकि उतार-चढ़ाव जीवन का हिस्सा है।
