DNPA क्या है? DNPA में कौन-कौन शामिल हैं? अंबानी-अडानी से लेकर इंडिया टुडे और दैनिक भास्कर तक, जानिए 21 मीडिया समूहों के नाम

नई दिल्ली: डिजिटल प्राइवेसी कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद Digital News Publishers Association (DNPA) चर्चा में है। मुकेश अंबानी के Network18 और गौतम अडानी के NDTV समेत 21 समाचार प्रकाशकों से जुड़े इस मामले ने पत्रकारिता, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और खोजी रिपोर्टिंग के अधिकार पर बहस तेज कर दी है।
26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, DNPA के प्रतिनिधित्व में 21 समाचार प्रकाशकों ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है। प्रकाशकों का कहना है कि इन प्रावधानों से भ्रष्टाचार, कॉरपोरेट अनियमितताओं और अन्य सार्वजनिक हित के मामलों की जांच करने वाली पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है। मामले की सुनवाई 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित थी।
DNPA क्या है?
DNPA का पूरा नाम Digital News Publishers Association है। यह भारत के प्रमुख समाचार प्रकाशकों के डिजिटल कारोबारों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक उद्योग संगठन है।
इसका उद्देश्य डिजिटल न्यूज प्रकाशकों के हितों का प्रतिनिधित्व करना, समाचार उद्योग से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर संबंधित संस्थाओं के साथ संवाद करना और डिजिटल मीडिया के विकास से संबंधित विषयों पर सहयोग को बढ़ावा देना है।
DNPA डिजिटल पत्रकारिता के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी काम करता है। इनमें डिजिटल विज्ञापन से होने वाली कमाई, तकनीकी बदलाव, समाचार सामग्री का इस्तेमाल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सुरक्षा और डिजिटल मीडिया से जुड़े नियम शामिल हैं। संगठन की सार्वजनिक जानकारी के मुताबिक, यह अपने सदस्यों के हितों को सरकार, नियामक संस्थाओं और अन्य उद्योग संगठनों के सामने रखता है।
DNPA में शामिल 21 मीडिया समूह कौन-कौन से हैं?
DNPA के सार्वजनिक अपडेट में 21 प्रमुख समाचार प्रकाशकों के नाम सामने आए हैं। इनमें हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार ब्रांड तथा टेलीविजन और डिजिटल मीडिया समूह शामिल हैं।
| क्रम | मीडिया समूह |
|---|---|
| 1 | ABP Network |
| 2 | Amar Ujala |
| 3 | Business Standard |
| 4 | Dainik Bhaskar |
| 5 | Jagran New Media |
| 6 | Deccan Herald |
| 7 | Eenadu Television |
| 8 | Hindustan Times |
| 9 | India Today Group |
| 10 | India TV |
| 11 | The Indian Express |
| 12 | Lokmat Media |
| 13 | Manorama Online |
| 14 | Mathrubhumi |
| 15 | NDTV |
| 16 | Network18 |
| 17 | The Hindu |
| 18 | Times Internet |
| 19 | The Times of India |
| 20 | Zee News |
| 21 | The New Indian Express |
इन नामों का उल्लेख DNPA के सार्वजनिक प्रोफाइल और उसके 21 समाचार प्रकाशकों से जुड़े हालिया अपडेट में किया गया है। संगठन की सदस्यता और किसी विशेष मुकदमे में याचिकाकर्ताओं की सूची अलग-अलग कानूनी संदर्भ हो सकते हैं; इसलिए दोनों को एक ही सूची मानने से पहले संबंधित याचिका की पुष्टि करना जरूरी है।
प्राइवेसी कानून को चुनौती देने की जरूरत क्यों पड़ी?
इस विवाद का केंद्र Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023 और इससे संबंधित नियम हैं। कानून का उद्देश्य डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करना और उसके इस्तेमाल के लिए जिम्मेदारियां तय करना है।
मीडिया प्रकाशकों ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि पत्रकारिता के लिए अलग और स्पष्ट सुरक्षा उपायों का अभाव खोजी रिपोर्टिंग को प्रभावित कर सकता है। उनकी प्रमुख चिंताएं तीन विषयों से जुड़ी हैं।
1. जांच के दौरान सहमति की शर्त
प्रकाशकों को आशंका है कि किसी व्यक्ति की निजी जानकारी पर आधारित जांच में पहले उसकी सहमति लेने की जरूरत पड़ने से जांच का विषय पहले ही सतर्क हो सकता है। इससे सबूत नष्ट करने या गवाहों को प्रभावित करने का जोखिम पैदा हो सकता है।
2. प्रकाशित खबरों से डेटा हटाने की मांग
कानून के तहत व्यक्तिगत डेटा से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर मीडिया समूहों ने चिंता जताई है। उनका तर्क है कि सार्वजनिक हित में प्रकाशित तथ्यात्मक खबरों को हटाने या उनमें बदलाव करने की मांग सामने आ सकती है।
3. पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा
मीडिया समूहों का कहना है कि संगठनों से जानकारी मांगने से संबंधित कुछ शक्तियों के इस्तेमाल से पत्रकारों के गोपनीय स्रोतों की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे भ्रष्टाचार या कॉरपोरेट अनियमितताओं के बारे में जानकारी देने वाले लोगों पर असर पड़ने की आशंका है।
सरकार के कानून का उद्देश्य क्या है?
डिजिटल प्राइवेसी कानून का उद्देश्य नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी के इस्तेमाल और सुरक्षा के लिए नियम बनाना है। डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अन्य संस्थाओं द्वारा बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत डेटा संभाले जाने के कारण ऐसे नियमों को महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसलिए इस विवाद को केवल मीडिया बनाम सरकार के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। एक तरफ लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ पत्रकारिता को सार्वजनिक हित के मामलों की स्वतंत्र जांच करने में सक्षम बनाए रखने की चिंता है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने अहम प्रश्न यह होगा कि इन दोनों हितों के बीच कानून के दायरे में किस तरह संतुलन बनाया जाए। मीडिया समूहों की दलीलें अभी उनकी कानूनी मांगें हैं; उन्हें अदालत के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
DNPA और DIGIPUB में क्या अंतर है?
डिजिटल न्यूज उद्योग में DNPA के अलावा DIGIPUB News India Foundation भी सक्रिय है, लेकिन दोनों संगठन एक जैसे नहीं हैं।
DNPA प्रमुख पारंपरिक मीडिया समूहों के डिजिटल न्यूज कारोबारों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके सदस्यों में बड़े अखबार समूहों, टेलीविजन नेटवर्क और उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े प्रकाशक शामिल हैं।
इसके विपरीत, DIGIPUB की सदस्यता में डिजिटल-फर्स्ट न्यूज संस्थान, स्वतंत्र डिजिटल प्रकाशक और कुछ स्वतंत्र पत्रकारिता संगठनों को जगह मिलती है। इसके सार्वजनिक सदस्य पेज पर The Wire, Newslaundry, The Quint, Scroll और Alt News जैसे नाम शामिल हैं।
आगे क्या होगा?
DPDP कानून को लेकर यह कानूनी चुनौती डिजिटल मीडिया उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। यदि अदालत विवादित प्रावधानों की व्याख्या या उनके लागू होने के तरीके पर निर्देश देती है, तो उसका असर व्यक्तिगत डेटा संभालने वाले संस्थानों और पत्रकारिता की प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।
फिलहाल मामले में अदालत के अंतिम फैसले को लेकर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आगे की स्थिति सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, सरकार के जवाब और अदालत के आदेशों पर निर्भर करेगी।
निष्कर्ष: DNPA भारत के प्रमुख समाचार प्रकाशकों का एक उद्योग संगठन है। इसके सार्वजनिक अपडेट में 21 मीडिया समूहों के नाम सामने आए हैं। डिजिटल प्राइवेसी कानून को लेकर चल रहा विवाद यह सवाल उठाता है कि नागरिकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए खोजी पत्रकारिता और सार्वजनिक हित में रिपोर्टिंग के लिए पर्याप्त कानूनी सुरक्षा कैसे दी जाए।
