2 फरवरी 2026 को बजट सत्र के दौरान लोकसभा में अचानक ऐसा राजनीतिक तूफान उठ गया, जिसने पूरे संसद का ध्यान पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब ’फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ की ओर मोड़ दिया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद में इस किताब का हवाला देते हुए 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव और गलवान घाटी में हुई घटनाओं पर सरकार के आधिकारिक बयानों को चुनौती दी। यह किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन इसके कथित अंशों में ऐसी संवेदनशील जानकारी शामिल है, जो सेना के संचालन, रणनीति और सरकार और सेना के बीच निर्णय प्रक्रिया पर प्रकाश डालती है।जनरल नरवणे की किताब उनकी सैन्य सेवा और जीवन के अनुभवों का विस्तृत विवरण देती है। इसमें 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच टकराव, गलवान और डोकलाम जैसी घटनाओं के समय उठाए गए रणनीतिक और राजनीतिक कदम शामिल हैं। दिसंबर 2023 में इस किताब के कुछ अंश मीडिया में प्रकाशित हुए थे। इन अंशों में संकेत मिला कि वास्तविक स्थिति उतनी नियंत्रण में नहीं थी, जितना सरकार ने आधिकारिक रूप से बताया। किताब में यह उल्लेख है कि चार चीनी टैंक भारतीय इलाके में प्रवेश कर चुके थे और स्थिति बेहद संवेदनशील थी। यही कारण है कि यह किताब अत्यंत विवादास्पद और संवेदनशील मानी जाती है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों की किताबों के प्रकाशन पर भारतीय सेना और सरकार की नियमावली स्पष्ट दिशा-निर्देश देती है। सेना नियम, 1954 की धारा 21 के अनुसार, सेना से जुड़ी कोई भी सामग्री, जिसमें रणनीति, संचालन या निर्णय प्रक्रिया शामिल हो, उसे प्रकाशित करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है। केंद्रीय सेवा नियमावली के तहत भी यह स्पष्ट है कि पूर्व अधिकारी यदि सुरक्षा या खुफिया संबंधी जानकारी प्रकाशित करना चाहते हैं, तो उन्हें अनुमोदन लेना अनिवार्य है। इसी कारण से ’फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ अब तक प्रकाशित नहीं हो पाई है। पेंगुइन बुक्स इंडिया ने इस किताब को अप्रैल 2024 में प्रकाशित करने की योजना बनाई थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय की समीक्षा प्रक्रिया लंबी चल रही है और अभी तक अनुमति नहीं मिली।लोकसभा में हंगामा तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस करते हुए किताब के हवाले से चीन-भारत सीमा विवाद और सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किताब में लिखी बातें आधिकारिक बयान से मेल नहीं खाती हैं और इससे पता चलता है कि गलवान घाटी में वास्तविक परिस्थितियां सरकार के कथनों के अनुरूप नहीं थीं। जैसे ही उन्होंने किताब के कथित अंश पढ़ने शुरू किए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने विरोध जताया। उनका तर्क था कि अप्रकाशित स्रोत को संसद में उद्धृत नहीं किया जा सकता।
What’s Written In Gen. Naravane’s Memoir That Scares The Life Out Of Modi Govt ❓❓ pic.twitter.com/afImest3iF
— Congress (@INCIndia) February 2, 2026
लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी पुस्तक, समाचार पत्र या साहित्य तब तक संसदीय बहस का हिस्सा नहीं बन सकता जब तक वह सार्वजनिक और सत्यापित स्रोत न हो। इसके बाद राहुल गांधी को आगे उद्धरण देने से रोका गया। इस कार्रवाई से सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।विपक्ष का आरोप था कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर संवेदनशील तथ्यों को दबा रही है। कांग्रेस का कहना था कि अगर किताब में कोई खतरनाक या गलत जानकारी है तो सरकार इसे सार्वजनिक करके बहस के लिए सामने लाए, लेकिन वर्षों तक इसे समीक्षा में रोके रखना संदेह पैदा करता है। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार समीक्षा प्रक्रिया का उपयोग संसद में असहज सवालों को टालने के लिए कर रही है।बीजेपी ने इसका जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर नरवणे के पुराने वीडियो साझा किए, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि भारत ने चीन के सामने अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं खोया और भारतीय सेना ने स्थिति दृढ़ता से संभाली। इसके माध्यम से सत्ता पक्ष ने दावा किया कि विपक्ष आधे-अधूरे तथ्यों के हवाले से बहस को भड़काने की कोशिश कर रहा है।
दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “…मैंने पहले ही रूल बुक पढ़ ली है। संसद में अखबार की कटिंग, किताबों कोई ऑथेंटिक विषय पर चर्चा की परंपरा नहीं रही है। नियम भी कहता है और यही परंपराएं भी यही है।”
(सोर्स: संसद टीवी) pic.twitter.com/ItLAjaXns4
— IANS Hindi (@IANSKhabar) February 2, 2026
सरकारी दृष्टिकोण से ’फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ पर कोई प्रतिबंध नहीं है। यह तकनीकी रूप से बैन नहीं है। नारवणे ने स्वयं कहा है कि उन्होंने किताब लिख दी है और प्रकाशक को अनुमति लेने की प्रक्रिया में काम करना है। उन्होंने इसे “पुरानी शराब की तरह परिपक्व होने” की प्रक्रिया बताया, लेकिन अब तक यह किताब बाजार में नहीं आई, इसलिए इसे अप्रकाशित कहा जा रहा है।लोकसभा में इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल किताब या भाषण का मुद्दा नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच संतुलन भी चुनौती में है। राहुल गांधी ने गलवान घाटी में उठाए गए कदमों और चीन के सामने सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री की “56 इंच की छाती” वाली टिप्पणी का हवाला देते हुए पूछा कि उस समय निर्णायक कदम क्यों नहीं उठाए गए।पूर्व सेना प्रमुखों की किताबें पहले भी प्रकाशित हो चुकी हैं, जैसे जनरल वी.पी. मलिक और जनरल वी.के. सिंह की किताबें। लेकिन उनमें रणनीतिक विवरण सीमित थे। नरवणे की किताब में हाल की संवेदनशील घटनाओं का सीधे विवरण है, जिससे यह और विवादास्पद बन गई है।
“China was at the receiving end,” said the then Army Chief, Gen. M. M. Naravane.
Yet Rahul Gandhi refuses to trust the words of a former Army Chief. Time and again, he has chosen to undermine India’s official position and rely on foreign agencies to shape his political… pic.twitter.com/Zl3EadLEHr
— Amit Malviya (@amitmalviya) February 2, 2026
’फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ में कुल पृष्ठ संख्या 448 है। किताब अप्रकाशित होने के कारण लगभग दो साल से प्रकाशन लंबित है। संसद में राहुल गांधी के हवाले से बहस के दौरान हंगामा करीब 64 मिनट तक चला। किताब का प्रस्तावित प्रकाशन समय अप्रैल 2024 था।इस विवाद ने यह दिखा दिया कि भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा, संसदीय प्रक्रिया और राजनीतिक बहस के बीच संतुलन कितना नाजुक है। यह सवाल उठता है कि क्या सैनिक अनुभव, रणनीति और निर्णय प्रक्रिया की जानकारी जनता तक सही तरीके से पहुँच सकती है या इसे हमेशा सरकारी समीक्षा और अनुमोदन के जाल में फंसा रहना होगा। संसद में हुई यह बहस यह भी स्पष्ट कर देती है कि आज की राजनीति में केवल तथ्यों का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रस्तुतिकरण, समय और संदर्भ भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
