नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026: संसद के बजट सत्र के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियों पर रोशनी डाली। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार ने देश के हर व्यक्ति तक पहुंचने का हर संभव प्रयास किया है। चाहे कोई भी योजना हो, उसे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाया गया है। पीएम मोदी ने यह भी दावा किया कि यह तथ्य उनके सबसे बड़े आलोचक भी स्वीकार करने को मजबूर हैं। इस संबोधन से न केवल बजट सत्र की बहस को नई दिशा मिली, बल्कि विपक्ष के आरोपों पर भी सीधा प्रहार हुआ।
सरकार की पहुंच का दावा, आंकड़ों से समर्थन
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार ने देश के हर व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश की है। कोई भी स्कीम हो, उसे समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाया गया है।” यह बयान पिछले दस वर्षों की नीतियों का सार लगता है। उदाहरण के तौर पर, प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत 50 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए, जिनमें ग्रामीण और गरीब वर्ग की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। इसी तरह, आयुष्मान भारत योजना ने 25 करोड़ से ज्यादा लोगों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया, जो विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में क्रांतिकारी साबित हुआ।लखनऊ से जुड़े स्रोतों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में इन योजनाओं का असर दिखा है। यहां वृद्धजनों के लिए पेंशन योजनाएं और कोच्लियर इम्प्लांट जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंची हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा, “यह बात तो हमें नापसंद करने वाले भी मानते हैं कि इस सरकार ने आखिरी व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाने पर बल दिया है।” विपक्षी दलों के नेताओं ने भले ही आलोचना की हो, लेकिन आंकड़े कुछ और ही बयान करते हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कवरेज 2014 के 39% से बढ़कर 2023 तक 70% हो गया। उज्ज्वला योजना ने 10 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए, जिससे महिलाओं का जीवन आसान हुआ।
लोकतंत्र और जनसांख्यिकी: वैश्विक उम्मीद की किरण
पीएम मोदी ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और युवा जनसांख्यिकी को दुनिया के लिए बड़ी उम्मीद बताया। उन्होंने कहा, “भारत की डेमोक्रेसी और डेमोग्राफी दुनिया के लिए एक बड़ी उम्मीद है।” भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां 140 करोड़ की आबादी में 65% युवा हैं। यह डेमोग्राफी डिविडेंड न केवल आर्थिक विकास का इंजन है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत को मजबूत बनाता है। जी-20 समिट और क्वाड जैसे मंचों पर भारत की भूमिका इसका प्रमाण है।प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लक्ष्य पर अडिग रहेगी। “हम इसी परंपरा पर आगे बढ़ने वाले हैं। हम लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ते रहने वाले हैं।” यह बयान बजट सत्र के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 का बजट पेश किया। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और डिजिटल इंडिया पर जोर दिया गया, जो पीएम के दावों से मेल खाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संदेश विपक्ष के ‘अमीर-गरीब’ विभाजन वाले नैरेटिव को तोड़ने का प्रयास है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक संदर्भ
संसद भवन के बाहर विपक्षी नेताओं ने पीएम के दावों पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि योजनाओं के लाभ केवल कागजों तक सीमित हैं, जमीन पर अमल नहीं हो रहा। वहीं, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी और किसान समस्याओं का जिक्र किया। लेकिन पीएम मोदी का संबोधन ऐसे समय आया जब बजट सत्र में विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में था। उनका यह बयान एक तरह से जनता को सीधा संदेश था कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ पर कायम है।उत्तर प्रदेश के संदर्भ में यह खासतौर पर प्रासंगिक है। लखनऊ में सोलर पैनल इंस्टॉलेशन और गोल्ड ज्वेलरी पर जीएसटी जैसे मुद्दों पर जनता चर्चा कर रही है। राज्य सरकार की योजनाएं, जैसे मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, केंद्र की नीतियों से जुड़ी हैं। पीएम का अंतिम व्यक्ति फोकस बुजुर्गों के लिए कोच्लियर इम्प्लांट और सीनियर सिटीजन बेनिफिट्स को मजबूत करता है।
पीएम मोदी की यह टिप्पणी भविष्य की राजनीतिक रणनीति का संकेत भी देती है। 2027 के लोकसभा चुनावों से पहले विकास का नैरेटिव मजबूत करना जरूरी है। हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं महंगाई, बेरोजगारी और जलवायु परिवर्तन। लेकिन सरकार का दावा है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) जैसे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने अंतिम व्यक्ति को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में शीर्ष पर है।इस संबोधन से साफ है कि पीएम मोदी अपनी सरकार की छवि को ‘समावेशी विकास’ के रूप में मजबूत करना चाहते हैं। दुनिया भर में जहां लोकतंत्र कमजोर पड़ रहे हैं, वहां भारत का मॉडल प्रेरणा स्रोत बनेगा। अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की पहुंच न केवल आंकड़ों में, बल्कि जन-जन के जीवन में दिख रही है।
