यूजीसी ने दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों को शैक्षिक संस्थानों में सम्मानजनक तरीके से शिक्षा ग्रहण करने के लिये जो नये नियम बनाये हैं उससे सवर्ण जाति के छात्रों और अपर वर्ग के समाज में काफी नाराजगी दिखाई दे रही है। सड़क पर आंदालन भी हो रहा है। सबसे खास बात यह है कि इस मुद्दे पर करीब-करीब सभी दलों के नेता पार्टी लाइन से हटकर बयान देने में भी संकोच नहीं कर रहे हैं। वहीं यूजीसी के नये नियमों से पिछड़े और दलितों की बात करने वाली कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को करारा झटका लगा है। संभवता इसी लिये वह इस कानून का विरोध या समर्थन नहीं कर पा रहे हैं, जबकि उन्हें यह पता है कि यूजीसी के नये नियम से सपा के पीडीए को झटका लग सकता है। क्योंकि मोदी सरकार ने यूजीसी के नये नियमों के द्वारा दलित और पिछड़े समाज के छात्रों और वोटरों का मन मोह लिया है। इसी लिये यूजीसी के निये नियमों के विरोध के बाद भी सरकार इस पर बैकफुट पर जाने को तैयार रहीं है। भले ही नये कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट कोई फैसला दे दे तो और बात है।
बहरहाल जो भी हो यूजीसी के नये नियमों असर आने वाले चुनावों में दिखाई दे सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसा लगता है कि जिस तरह से एक समय बीजेपी की कमंडल वाली सियासत के खिलाफ वीपी सिंह मंडल आयोग की सिफारिशे लेकर आये थे,वैसा ही कुछ अबकी से मोदी सरकार ने किया है। यानी बीजेपी इस बार मंडल टू के पक्ष में खड़ी नजर आ रही है। बीजेपी खुलकर कह रही है कि यूजीसी के नए नियम से दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों को शैक्षिक संस्थानों में सम्मान से पढ़ाई करने का हक मिला है, जबकि इससे सवर्ण छात्रों और समाज में भारी नाराजगी फैली हुई है। सड़कों पर आंदोलन हो रहे हैं। खास बात यह है कि इस मुद्दे पर सभी दलों के नेता अपनी पार्टी लाइन से हटकर बयान दे रहे हैं।
बात अखिलेश यादव की कि जाये तो पिछड़े और दलितों की बात करने वाले समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को इन नियमों से करारा झटका लगा है। वे इसका विरोध नहीं कर पा रहे, क्योंकि इन्हें पता है कि इससे समाजवादी पार्टी का पिछड़ा दलित गठबंधन कमजोर पड़ सकता है। भाजपा ने दलित और पिछड़े छात्रों के पक्ष में ये नियम बनाकर उनके वोटरों का दिल जीत लिया है। इसलिए सरकार विरोध के बावजूद पीछे हटने को तैयार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने पर ही कुछ और हो सकता है।खैर, इन नियमों का असर आने वाले चुनावों में साफ दिखेगा। नब्बे के दशक में भाजपा की कमंडल वाली सियासत के खिलाफ वीपी सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की थीं। ठीक वैसा ही कुछ अब मोदी सरकार कर रही है। भाजपा इस बार मंडल के दूसरे दौर के पक्ष में खड़ी दिख रही है।
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