केरल में 26 सेकंड के एक वीडियो ने न सिर्फ एक आदमी की जान ले ली, बल्कि महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे को भी सोशल मीडिया की सनसनीखेज भीड़ में कुचल दिया। यह मामला 16 जनवरी 2026 का है, जब कोझिकोड से पय्यानूर जा रही एक भीड़भाड़ वाली बस में सफर कर रही 35 वर्षीय शिमजिथा मुस्तफा ने अपने मोबाइल कैमरे से एक वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि बस में खड़े एक व्यक्ति ने उन्हें अनुचित तरीके से छुआ। यही वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर तूफान बन गया वीडियो सामने आने के बाद शिमजिथा ने खुद अपील की कि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग देखें, ताकि “समाज में शर्मिंदगी के जरिए बदलाव आए।” देखते ही देखते यह वीडियो इंस्टाग्राम और फेसबुक पर वायरल हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक 48 घंटे के भीतर वीडियो को करीब 20 लाख से ज्यादा बार देखा गया। बिना किसी पुलिस शिकायत, बिना किसी जांच के, एक व्यक्ति को सोशल मीडिया ने दोषी मान लिया।
जिस व्यक्ति पर आरोप लगाया गया, वह थे 41 वर्षीय दीपक यू, एक टेक्सटाइल कंपनी में सेल्स मैनेजर। दीपक को शायद अंदाजा भी नहीं था कि बस का यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। गोविंदपुरम के रहने वाले दीपक अपने बुजुर्ग माता-पिता का एकमात्र सहारा थे। परिवार और सहकर्मियों के अनुसार दीपक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। वे शराब या सिगरेट नहीं पीते थे और काम के बाद सीधे घर लौटते थे वीडियो वायरल होने के बाद दीपक के खिलाफ सोशल मीडिया पर गालियों, आरोपों और तानों की बाढ़ आ गई। उन्हें खुलेआम “छेड़छाड़ करने वाला” कहा जाने लगा। परिवार का कहना है कि दीपक दो दिन तक गहरे सदमे में रहे, खाना-पीना छोड़ दिया और बार-बार कहते थे कि अब जीने का कोई मतलब नहीं बचा। 18 जनवरी 2026 को दीपक ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
मौत के बाद मामला और गंभीर हो गया। पुलिस ने बस के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और यात्रियों के बयान दर्ज किए। जांच में सामने आया कि बस में उस वक्त भारी भीड़ थी, यात्री एक-दूसरे से सटे हुए खड़े थे और किसी तरह की जानबूझकर की गई हरकत के ठोस सबूत नहीं मिले। बस ड्राइवर, कंडक्टर और अन्य यात्रियों ने भी किसी तरह की छेड़छाड़ की पुष्टि नहीं की।पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि शिमजिथा ने बस के अंदर कम से कम सात वीडियो रिकॉर्ड किए थे, लेकिन सोशल मीडिया पर सिर्फ वही क्लिप डाली गई, जिससे आरोप मजबूत दिखे। यह भी जांच का विषय बना कि वीडियो को किस एंगल से रिकॉर्ड किया गया और क्या किसी तरह की एडिटिंग की गई।दीपक की मौत के बाद उनके परिवार ने शिमजिथा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया। आरोप है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह में वीडियो बनाया गया, बिना कानूनी रास्ता अपनाए एक व्यक्ति की सार्वजनिक छवि को नष्ट किया गया और उसी मानसिक दबाव ने दीपक को आत्महत्या के लिए मजबूर किया।
पुलिस ने शिमजिथा मुस्तफा को वडकारा से गिरफ्तार किया और अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उनका मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट जांच के दायरे में हैं। पुलिस यह भी देख रही है कि वीडियो में कोई तकनीकी छेड़छाड़ हुई या नहीं।इस घटना के बाद केरल में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। जगह-जगह प्रदर्शन हुए। सोशल मीडिया पर #JusticeForDeepak ट्रेंड करने लगा। कुछ विरोध अनोखे तरीके से भी सामने आए। एक वीडियो में एक व्यक्ति बस में क्रिकेट पैड्स जैसे आर्म गार्ड पहनकर चढ़ता दिखा, ताकि किसी भी तरह के झूठे आरोप से बचा जा सके। कहीं-कहीं लोग यह कहते भी सुने गए कि अब बस में खड़ा होना भी खतरे से खाली नहीं।
इस पूरे मामले ने बहस की दिशा ही बदल दी। महिला सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे से चर्चा हटकर झूठे आरोप, डिजिटल ट्रायल और सोशल मीडिया की अदालत पर आ गई। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं उन महिलाओं के साथ भी अन्याय हैं, जो सच में उत्पीड़न का शिकार होती हैं और जिनकी आवाज़ अक्सर दब जाती है।आंकड़े बताते हैं कि भारत में आत्महत्या के मामलों में पुरुषों की संख्या महिलाओं से करीब दोगुनी है। कई मामलों में सामाजिक अपमान, झूठे आरोप और सार्वजनिक बदनामी बड़ी वजह बनती जा रही है। सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड का वीडियो, बिना जांच के फैलाया गया आरोप और हजारों अनजान लोगों की टिप्पणियां ये सब मिलकर किसी भी इंसान को तोड़ सकते हैं।
केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है और पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शिमजिथा को वाकई गलत व्यवहार का संदेह था, तो उन्हें तुरंत पुलिस या कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए था। सोशल मीडिया न्याय का विकल्प नहीं हो सकता।यह घटना एक कड़वा सच सामने लाती है। सोशल मीडिया एक ताकतवर हथियार है, लेकिन यह दो धार वाली तलवार भी है। एक बार कोई वीडियो वायरल हो गया, तो सच-झूठ की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है। दीपक की मौत वापस नहीं लाई जा सकती, लेकिन यह सवाल जरूर छोड़े जाती है कि क्या हम एक सभ्य समाज में बिना सुने, बिना जांचे किसी को सजा देने के आदी होते जा रहे हैं।केरल की इस त्रासदी ने एक परिवार उजाड़ दिया और समाज के सामने आईना रख दिया। सवाल अब सिर्फ दीपक को न्याय का नहीं है, सवाल उस सोच का है, जहां वायरल होना इंसानियत से बड़ा हो गया है।
