ईरान में बवाल और आंतरिक अस्थिरता के बीच अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार तनावपूर्ण स्थिति से जूझ रही है। इसी बीच अमेरिका ने तेहरान की चारों ओर से घेराबंदी तेज कर दी है, और कूटनीतिक बातचीत विफल रहने पर संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसका हमलावर दल मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंच चुका है, जबकि 12 एफ-15 फाइटर जेट जॉर्डन में तैनात हैं। इसके अलावा अमेरिकी-17 परिवहन विमान डिएगो ग्रेसिया में तैनात किए गए हैं, जिससे फारस की खाड़ी के जरिए ईरान को घेराबंदी करना संभव हो सके। पूर्व अमेरिकी राजदूत डैन शापिरो और डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी हुई है, विशेषकर सुप्रीम लीडर खामेनेई के खिलाफ। निर्वासित पूर्व राजकुमार राजा पहेलवी ने एक मसौदा पेश किया है, जिसमें खामेनेई के जाने पर ईरान में पूर्ण लोकतंत्र लागू करने और धर्म और राज्य को अलग करने का प्रस्ताव है।
ईरान के भीतर सरकार कील-कांटे दुरुस्त करने और आम नागरिकों से संपर्क बढ़ाने में जुटी है। सर्वोच्च परिषद के प्रमुख अली लारीजानी ने इराक के विदेश मंत्री से मुलाकात की और बवाल को अमेरिका और इजराइल से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, बवाल के दौरान 20 हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि आर्थिक पहलुओं पर भी काम चल रहा है ताकि जनता को राहत मिल सके। आने वाले दिनों में अगर कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए, तो अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। इस बीच पूरी दुनिया की निगाहें ईरान में हो रही गतिविधियों और अमेरिका की रणनीति पर टिकी हुई हैं।
