लखनऊ, उत्तर प्रदेश की विधानसभा में विपक्षी दल समाजवादी पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। जिला सोनभद्र की दुद्धी विधान सभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह गौड़ का आज लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 58 वर्ष के थे। उनकी मौत की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। कुछ दिनों पहले ही बीजेपी के एक विधायक की रहस्यमयी मौत ने राज्य की सियासत को हिला दिया था, और अब सपा को यह व्यक्तिगत क्षति सहनी पड़ी है।
विजय सिंह गौड़ प्रमुख समाजवादी नेता थे, जिन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के दिग्गज प्रत्याशी को करारी शिकस्त देकर सदर सीट पर कब्जा जमाया था। वे समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के कट्टर समर्थक रहे और अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाई। लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे गौड़ का इलाज दिल्ली के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। कल रात उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन आज दोपहर करीब 1 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया, ष्विजय सिंह गौड़ हमारे पार्टी के सच्चे सिपाही थे। उनकी कमी हमेशा खलेगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।ष् यूपी विधानसभा अध्यक्ष सत्यदेव पचौरी ने भी विधानसभा सत्र स्थगित कर शोक प्रस्ताव पारित किया। कुशीनगर में सपा कार्यकर्ताओं ने विधायक के पैतृक गांव में श्रद्धांजलि सभा बुलाई है। उनका अंतिम संस्कार कल पडरौना में गंगा तट पर होगा।
यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए दोहरा झटका है। कुछ दिनों पूर्व बीजेपी के बागपत से विधायक पंकज सिंह की अचानक मौत ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया था। उनकी मौत पर सवाल उठे थे, लेकिन अब सपा विधायक का निधन विपक्ष को कमजोर करने का काम कर रहा है। सपा के पास पहले से ही विधानसभा में सीमित संख्या है, और गौड़ जैसे प्रभावशाली नेता की कमी पार्टी की रणनीति को प्रभावित करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुशीनगर जैसे सीमांचल क्षेत्र में सपा का आधार मजबूत करने वाले गौड़ की अनुपस्थिति आगामी लोकसभा चुनावों में चुनौती पैदा कर सकती है।
विजय सिंह गौड़ का राजनीतिक सफर संघर्षपूर्ण रहा। कुशीनगर के एक छोटे से गांव में जन्मे गौड़ ने युवावस्था में ही समाजवादी आंदोलन से जुड़ गए। वे पूर्वांचल के गरीब और पिछड़े वर्गों के मुद्दों को सदन में बुलंद आवाज देते रहे। किसानों की आय दोगुनी करने, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बेरोजगारी के खिलाफ उनकी सक्रियता चर्चित रही। 2022 चुनाव में उन्होंने बीजेपी के खिलाफ जोरदार प्रचार किया और यादव-मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत किया। विधायक रहते हुए उन्होंने कुशीनगर में कई विकास परियोजनाओं को धरातल पर उतारने में योगदान दिया, जिनमें तमकुही राज में नहर परियोजना और पडरौना में अस्पताल उन्नयन शामिल हैं।
सपा कार्यकर्ताओं के बीच गौड़ को श्भाई साहबश् के नाम से जाना जाता था। वे पार्टी के आंतरिक कलह को हमेशा शांत करने वाले मध्यस्थ रहे। उनके निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा प्रमुख अखिलेश यादव के अलावा राम गोपाल यादव, तेज नारायण पांडेय समेत तमाम नेताओं ने शोक संदेश जारी किए। विपक्षी दलों ने भी एकजुट होकर श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा, ष्गौड़ जी एक कुशल प्रशासक और जननेता थे।ष्उधर, कुशीनगर जिला प्रशासन ने शोक के अनुरूप सरकारी भवनों पर क्रेप लगराया है। स्थानीय स्तर पर सपा कार्यालयों पर सन्नाटा पसर गया है। गौड़ के परिवार में पत्नी, दो पुत्र और एक पुत्री हैं। बड़े बेटे ने बताया कि पिता लंबे समय से बीमार थे, लेकिन वे अंतिम समय तक पार्टी कार्यों में सक्रिय रहे।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि गौड़ के निधन से कुशीनगर सीट पर उपचुनाव होगा, जिसमें सपा अपना मजबूत दावा पेश करेगी। लेकिन बीजेपी इसे कमजोरी के रूप में देख रही है। राज्य में बढ़ती विधायकों की असामयिक मौतें स्वास्थ्य सुविधाओं और राजनीतिक दबाव पर सवाल खड़े कर रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि योगी सरकार के कार्यकाल में विपक्षी नेताओं पर दबाव बढ़ा है, हालांकि सत्ताधारी दल इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बता रहा है।विजय सिंह गौड़ का जाना न केवल सपा के लिए क्षति है, बल्कि पूर्वांचल की राजनीति में एक युग का अंत है। उनके संघर्ष और समर्पण की मिसालें पीढ़ियां देंगी। उत्तर प्रदेश की सियासत अब एक नए अध्याय की ओर बढ़ रही है, जहां शोक के बाद रणनीतियां तेज होंगी।
