बीजेपी कैसे ममता के बंगाल गौरव के दावे को तोड़ सकती है

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए नया चुनावी नारा जारी किया है। यह नारा भाजपा और केंद्र सरकार पर हमले के जवाब में लाया गया है। टीएमसी का नया नारा है जोतोई कोरो हमला, आबार जीतबे बांग्ला, जिसका अर्थ है जितने भी हमले कर लो, बंगाल फिर जीतेगा। यह नारा पार्टी के सोशल मीडिया पर 27 दिसंबर 2025 को जारी किया गया। इस नारे के साथ नया लोगो भी लॉन्च हुआ, जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की तस्वीरें प्रमुख हैं। पार्टी इसे बंगाल की जनता के स्वाभिमान और केंद्र की नीतियों के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक बता रही है। यह नारा भाजपा के बांग्ला बचते चाई, भाजपा ताई जैसे नारों का सीधा जवाब है। अभिषेक बनर्जी के विचार से प्रेरित यह अभियान भ्रष्टाचार, घुसपैठ और उत्पीड़न के आरोपों पर केंद्रित है।

गौरतलब हो, पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी का बंगाल गौरव का नारा हमेशा से ही एक मजबूत हथियार रहा है। विधानसभा चुनावों के मैदान में उतरते ही वे इसे फिर से बुलंद कर रही हैं। उनका दावा है कि बंगाल की संस्कृति, परंपराओं और आत्मसम्मान की रक्षा सिर्फ उनकी तृणमूल कांग्रेस ही कर सकती है। वे कहती हैं कि बंगाल का गौरव बाहरी ताकतों के हाथों बिकने नहीं पाएगा। लेकिन भारतीय जनता पार्टी इस दावे को कमजोर करने के लिए कई रणनीतियां अपना सकती है। पार्टी को विकास, शासन की कमियों और स्थानीय मुद्दों पर जोर देकर ममता के इस भावनात्मक जाल को तोड़ना होगा। बीजेपी के पास केंद्र की ताकत, संगठनात्मक क्षमता और नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता जैसे हथियार हैं, जिनका सही इस्तेमाल चुनावी परिणाम बदल सकता है।

पहले समझें ममता का बंगाल गौरव से जुड़े नारे कितना प्रभावी रहते हैं। वे इसे बंगाली अस्मिता से जोड़ती हैं। हिंदू-मुस्लिम एकता, दुर्गा पूजा की भव्यता और बंगाल की बौद्धिक विरासत को वे अपनी छवि से जोड़ती हैं। चुनावी सभाओं में वे चंद्रशेखर आजाद या स्वामी विवेकानंद का जिक्र कर बाहरी हस्तक्षेप का भय दिखाती हैं। उनका संदेश साफ है- बंगाल बंगालियों का है, इसे दिल्ली की साजिशों से बचाओ। 2021 के चुनाव में यह नारा काम आया, जब बीजेपी ने सौ से ज्यादा सीटें जीतीं, लेकिन सरकार नहीं बना पाई। अब 2026 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ममता फिर इसी धुन पर नाच रही हैं। बीजेपी को इसकी सीधी टक्कर लेनी होगी। पार्टी को बंगाल के लोगों को यह विश्वास दिलाना है कि गौरव सिर्फ नारों में नहीं, कामों में होता है।

बीजेपी की पहली रणनीति होनी चाहिए विकास के आंकड़ों पर हमला। ममता सरकार पर आरोप लगाएं कि बंगाल गौरव का दावा करते हुए वे राज्य को पिछड़ापन दे रही हैं। केंद्र सरकार ने बंगाल को कितने करोड़ रुपये दिए हैं- राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल लाइनें, आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं। लेकिन ममता ने इन्हें लागू क्यों नहीं किया? कोलकाता में बाढ़, अमिताभ बच्चन सेट पर बनी सड़कें टूटना, ये उदाहरण दें। बंगाल के युवाओं को बेरोजगारी का दर्द हो रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार बंगाल में कुपोषण सबसे ज्यादा है। बीजेपी कहे- असली गौरव तब होता जब बंगाल गुजरात या महाराष्ट्र जैसा बनता। मोदी जी की योजनाओं से लाखों बंगाली लाभान्वित हुए, लेकिन ममता ने श्रेय लेने के लिए नाम बदल दिए। जैसे दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना को स्वनिधि। ऐसे तथ्यों से ममता के दावे को खोखला साबित करें।

दूसरी रणनीति हिंदू अस्मिता को मजबूती से उठाना। ममता का बंगाल गौरव हिंदू-मुस्लिम गठजोड़ पर टिका है। वे रमजान को सरकारी छुट्टी देती हैं, लेकिन दुर्गा पूजा पर पाबंदियां लगाती हैं। बीजेपी को राम नवमी जुलूस पर हुए हमलों, हिंदू मंदिरों पर अतिक्रमण के उदाहरण दें। संथाल परगना में बाहरी घुसपैठ का मुद्दा उठाएं। बंगाल के हिंदू मतदाता, जो 70 प्रतिशत हैं, डरते हैं कि ममता की नीतियां बंगाल को कश्मीर बना देंगी। अमित शाह ने कहा था- बंगाल बचाओ अभियान। इसे दोहराएं। मोदी जी की छवि हिंदू हितैषी की है। चुनाव में सीधा संदेश दें- बंगाल का गौरव हिंदू गौरव से जुड़ा है, इसे ममता के वोट बैंक की भेंट न चढ़ने दें। इससे ममता का गौरव का दावा कमजोर पड़ जाएगा।

संगठनात्मक स्तर पर बीजेपी को स्थानीय नेताओं को आगे लाना होगा। ममता का फायदा यह है कि तृणमूल के ज्यादातर नेता बंगाली हैं। बीजेपी में सुफी या दिलीप घोष जैसे चेहरे हैं, लेकिन और चाहिए। जयप्रकाश मजूमदार या अन्य स्थानीय चेहरों को प्रमोट करें। ग्राम स्तर पर बूथ मजबूत करें। 2021 में बीजेपी ने १३८ विधानसभा सीटें लड़ीं, अब सभी पर लड़ें। युवा मोर्चा और महिला मोर्चा सक्रिय करें। बंगाल की महिलाओं को लक्ष्य बनाएं- ममता लैंगिक हिंसा रोकने में नाकाम रही हैं। संदीप सिंह मामले या अन्य हत्याओं का जिक्र करें। बीजेपी कहे- हमारी सरकार बेटियों की रक्षा करेगी। इससे बंगाल गौरव का नारा घर-घर तक टूटेगा।

चुनावी अभियान में मोदी जी का अधिकतम इस्तेमाल करें। उनकी सभाओं में लाखों आते हैं। वे बंगाली में बोलें, रवींद्रनाथ टैगोर या नेताजी सुभाष का जिक्र करें। कहें- बंगाल का गौरव भारत का गौरव है, इसे केंद्र से लड़ने की जरूरत नहीं। केंद्र ने बंगाल को वंदे भारत ट्रेन दी, लेकिन ममता ने क्यों रोकी? ऐसे सवाल पूछें। अमित शाह और जेपी नड्डा को मैदान में उतारें। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बनाएं- ममता के झूठे दावे उजागर करें। जैसे बंगाल में कोई दंगा नहीं होता, जबकि मुरशिदाबाद दंगे हुए। हैशटैग चलााएं- असली बंगाल गौरव।

आर्थिक मुद्दों पर भी हमला बोलें। बंगाल उद्योगों का केंद्र था, अब पलायन हो रहा है। टीएमसी की भ्रष्टाचार की कहानियां सुनाएं- स्कूल सेवा आयोग घोटाला, मंत्रियों के काले कारनामे। बीजेपी कहे- हम पारदर्शी शासन लाएंगे। केंद्र की योजनाएं पूरी ताकत से पहुंचाएंगे। मत्स्य पालन, चाय बागान मजदूरों के मुद्दे उठाएं। आदिवासी वोट बंगाल के 10 प्रतिशत हैं, इन्हें भाजपा की ओर खींचें। असली गौरव तब जब हर बंगाली समृद्ध हो।ममता की कमजोरी उनके परिवारवाद में है। अभिषेक बनर्जी को उत्तराधिकारी बनाने का प्रयास। बीजेपी इसे उजागर करे- बंगाल गौरव परिवार गौरव बन गया। लोकतंत्र में वंशवाद नहीं चलता। तृणमूल के बागी नेताओं को अपनाएं। जैसे कललंद बनर्जी या अन्य। विपक्षी एकता टूट चुकी है, इसका फायदा लें। वामपंथी और कांग्रेस कमजोर हैं।

लब्बोलुआब यह है कि ममता बनर्जी के बंगाल गौरव के नारे के खिलाफ बीजेपी को धैर्य रखना होगा। यह सच है कि 2024 लोकसभा में बंगाल में बीजेपी को झटका लगा, लेकिन विधानसभा अलग है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उतरें- दुर्गा पूजा में स्टॉल लगाएं, गौरव का अपना संस्करण पेश करें। बंगाल के गौरव को राष्ट्रीय एकता से जोड़ें। मोदी जी कहते हैं- सबका साथ सबका विकास। इससे ममता का अलगाववादी नारा हार जाएगा। अगर बीजेपी इन रणनीतियों पर चली तो बंगाल गौरव का तमगा उनके पास आ सकता है। चुनावी जंग लंबी है, लेकिन जीत संभव है। बंगाल के लोग बदलाव चाहते हैं, बस उन्हें सही दिशा दिखानी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *