लोकसभा ने आज कांगे्रस सरकार की चर्चित नेरगा योजना जिसमंे 2009 के लोकसभा चुनाव से पूर्व महात्मा गांधी नाम जोड़कर मनरेगा योजना कर दिया गया था मोदी सरकार ने अब मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत-जी राम जी कर दिया गया है। इस विधेयक में योजना के कई प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं, ताकि इसे अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सके। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चैहान ने सदन में इस विधेयक को पेश किया था और जोरदार बहस के बाद इसे मंजूरी मिल गई। विपक्ष के हंगामे के बावजूद सदन ने यह फैसला लिया, जिसके तुरंत बाद कार्यवाही शुक्रवार 19 दिसंबर तक स्थगित कर दी गई। 19 दिसंबर को ही षीतकालीन सत्र अनिष्चितकाल के लिये स्थगित हो जायेगा।मतदान के दौरान विपक्षी सांसदों ने सदन में कागज के टुकड़े फेंककर अपना विरोध जताया। यह दृश्य लोकसभा की कार्यवाही को और गरमा गया। शिवराज सिंह चैहान ने विधेयक के पक्ष में बोलते हुए कहा कि मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी थी। उनके अनुसार, अब इसमें होने वाले बदलावों से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और ग्रामीणों को सच्चा लाभ मिल सकेगा। उन्होंने योजना की कमियों को उजागर करते हुए बताया कि पहले इसमें पैसे का दुरुपयोग आम था, मजदूरों तक पूर्ण राशि नहीं पहुंच पाती थी।यह विधेयक ग्रामीण विकास को नई दिशा देने का प्रयास है। मनरेगा को विकसित भारत-जी राम जी नाम देने से योजना का स्वरूप बदलेगा। इसमें डिजिटल निगरानी, सीधी लाभ हस्तांतरण और कार्य की गुणवत्ता पर जोर दिया जाएगा। चौहान ने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण योजना का उद्देश्य विफल हो रहा था। अब ठेकेदारों और बिचैलियों की भूमिका कम होगी, जिससे ग्रामीण परिवारों को मजदूरी का पूरा लाभ मिलेगा। विपक्ष ने इसे नाम बदलने का ढोंग बताया, लेकिन सत्ताधारी पक्ष ने इसे सुधार का कदम कहा।
लोकसभा में बहस के दौरान सत्ताधारी सदस्यों ने योजना की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मनरेगा ने करोड़ों ग्रामीणों को रोजगार दिया, लेकिन भ्रष्टाचार ने इसे बदनाम कर दिया। अब नई योजना में आधार कार्ड से जुड़ी सत्यापन प्रक्रिया अनिवार्य होगी। कार्यस्थलों पर सीसीटीवी लगाने और जीपीएस ट्रैकिंग से पारदर्शिता आएगी। चैहान ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई जिलों में फर्जी जॉब कार्ड बनाए जाते थे, जिनसे सरकारी खजाना खाली हो रहा था। इन कमियों को दूर करने के लिए विधेयक जरूरी था। विपक्ष के नेता ने बहस में सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नाम बदलना समस्याओं का हल नहीं है। असली मुद्दा ग्रामीण बेरोजगारी है, जिसे हल करने के बजाय सिर्फ नाम पर ध्यान दिया जा रहा है। सदन में नारेबाजी तेज हो गई, जब सांसदों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। कुछ विपक्षी सदस्यों ने कहा कि यह विधेयक ग्रामीणों को धोखा है, क्योंकि मजदूरी की दरें अभी भी कम हैं। सत्ताधारी पक्ष ने पलटवार किया कि विपक्ष भ्रष्टाचार के खिलाफ कभी बोलता नहीं। मतदान से पहले सदन में तनाव चरम पर था। स्पीकर ने कई बार विपक्ष को शांत करने की कोशिश की, लेकिन हंगामा थमा नहीं। अंततः विधेयक पक्ष में पारित हो गया। चैहान ने पारित होने पर कहा कि यह ग्रामीण भारत के लिए ऐतिहासिक कदम है। योजना अब विकसित भारत का हिस्सा बनेगी, जिसमें कौशल विकास और स्थायी संपत्ति निर्माण पर बल होगा। ग्रामीणों को न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि वे आत्मनिर्भर भी बनेंगे।
इस विधेयक का असर देशभर के गांवों पर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में मनरेगा सबसे ज्यादा चल रही थी। वहां भ्रष्टाचार की शिकायतें आम थीं। अब नई व्यवस्था से पंचायत स्तर पर निगरानी मजबूत होगी। ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार मिलेंगे, ताकि स्थानीय स्तर पर निर्णय लिए जा सकें। चैहान ने वादा किया कि योजना से सौ दिनों का रोजगार सुनिश्चित होगा, साथ ही महिलाओं और दलितों के लिए आरक्षण बढ़ेगा। विपक्ष ने विधेयक को लोकसभा से राज्यसभा भेजने की मांग की, लेकिन सदन ने इसे सीधे पारित कर दिया। हंगामे के कारण कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित रह गए। विपक्षी सांसदों ने बाहर आकर संवाददाताओं से कहा कि सरकार ग्रामीणों की पीड़ा को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार कम न हुआ, तो आंदोलन तेज होंगे। सत्ताधारी नेताओं ने इसे राजनीतिक ड्रामा बताया।
शिवराज सिंह चैहान की भूमिका सराहनीय रही। वे पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इसलिए ग्रामीण मुद्दों की गहरी समझ रखते हैं। उन्होंने सदन में आंकड़े पेश किए कि मनरेगा में सालाना अरबों रुपये का घोटाला हो रहा था। अब डिजिटल प्लेटफॉर्म से हर लेन-देन ऑनलाइन होगा। मजदूर अपना जॉब कार्ड मोबाइल पर देख सकेंगे। यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।देश के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा जीवनरेखा रही है। महामारी के दौरान इसने लाखों परिवारों को बचाया। लेकिन भ्रष्टाचार ने विश्वास कम कर दिया। नया नाम और प्रावधान इसे पुनर्जीवित करेंगे। चैहान ने कहा कि जी राम जी का नाम योजना को पवित्रता देगा। यह विकास के पथ पर ग्रामीणों को ले जाएगा। विपक्ष भले विरोध करे, लेकिन जनता बदलाव का स्वागत करेगी।
विधेयक पारित होने से सरकार की नीति स्पष्ट हुई। अब ग्रामीण विकास मंत्रालय इसे लागू करने की तैयारी करेगा। राज्यों को दिशानिर्देश जारी होंगे। प्रारंभिक चरण में पायलट प्रोजेक्ट चलेंगे, ताकि कमियां दूर हो सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता से योजना की सफलता बढ़ेगी। चैहान ने अंत में कहा कि यह विधेयक गरीबों का अधिकार मजबूत करेगा।सदन की कार्यवाही स्थगित होने से अन्य विधेयक लटक गए। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र का गला घोंटने का आरोप लगाया। लेकिन सत्ताधारी पक्ष ने इसे आवश्यक सुधार बताया। आने वाले दिनों में राज्यसभा में बहस होगी। वहां भी हंगामा संभव है। फिर भी, विधेयक ग्रामीण भारत को नई उम्मीद देगा। यह घटना भारतीय राजनीति की जीवंतता दर्शाती है। सत्ताधारी और विपक्ष के बीच टकराव आम है, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया चलती रहती है। मनरेगा का नया स्वरूप ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाएगा। भ्रष्टाचार मुक्त योजना से विकास तेज होगा। चैहान की दृढ़ता ने सदन को प्रभावित किया। अब देश देखेगा कि यह विधेयक जमीन पर कितना असरदार साबित होता है।
