अयोध्या के पावन धाम से जुड़े राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख योद्धा डॉ रामविलास वेदांती अब हमारे बीच नहीं रहे। सोमवार दोपहर मध्यप्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में उन्होंने अंतिम सांस ली। कई दिनों से उनकी तबीयत गंभीर बनी हुई थी और चिकित्सकों की पूरी कोशिशों के बावजूद वे बच न सके। उनका पार्थिव शरीर अयोध्या लाया जा रहा है, जहां मंगलवार को सरयू नदी में जल समाधि दी जाएगी। इस दुखद घटना पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अनेक नेताओं ने गहन शोक व्यक्त किया है। वेदांती जी का जाना न केवल राम भक्तों के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि हिंदू समाज के उस संघर्ष का भी अंतिम अध्याय लिखता प्रतीत होता है, जिसने देश की धार्मिक चेतना को जागृत किया।
डॉ रामविलास वेदांती का जन्म बिहार के एक साधारण परिवार में हुआ था। वे बचपन से ही भगवान राम के प्रति गहरी आस्था रखते थे। युवावस्था में वे संन्यासी बने और अयोध्या पहुंचे, जहां उनका जीवन राम मंदिर निर्माण के आंदोलन से जुड़ गया। वे राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख सदस्य रहे और लंबे समय तक इस संगठन के अध्यक्ष भी रहे। वेदांती जी ने अपना पूरा जीवन भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। उनका नाम राम मंदिर आंदोलन के हर महत्वपूर्ण मोड़ पर सुनाई देता रहा। वे न केवल आध्यात्मिक नेता थे, बल्कि राजनीतिक पटल पर भी सक्रिय रहे। भाजपा के सांसद के रूप में उन्होंने संसद में राम मंदिर मुद्दे को बार-बार उठाया और देश भर में जागरण अभियान चलाए।
राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत 1980 के दशक में हुई, जब विश्व हिंदू परिषद ने बाबरी मस्जिद के स्थान पर राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। डॉ वेदांती उस समय अयोध्या में सक्रिय हो गए। 1986 में जब विवादित ढांचे के ताले खुले, तो वे सबसे आगे थे। उन्होंने हजारों कारसेवकों को संगठित किया और अयोध्या की ओर बढ़ने वाले जत्थों का नेतृत्व किया। छह दिसंबर 1992 को कारसेवकों द्वारा ढांचा ढहाए जाने के बाद पुलिस हिरासत में रहने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई, जिसमें वेदांती जी की भूमिका सराहनीय रही। वे साक्ष्य एकत्र करने और गवाहों को मजबूत बनाने में जुटे रहे। राम जन्मभूमि न्यास के माध्यम से उन्होंने पूरे देश में धन संग्रह अभियान चलाया, जिससे आंदोलन को नई गति मिली।
वेदांती जी की सबसे बड़ी उपलब्धि थी राम मंदिर आंदोलन को राजनीतिक मंच पर लाना। भाजपा ने 1989 के आम चुनाव में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का वचन पत्र जारी किया। वेदांती जी ने इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाया। वे सभाओं में भाषण देते, भजन गाते और लोगों को एकजुट करते। 1990 में लालकृष्ण आडवाणी द्वारा शुरू की गई रथ यात्रा में उनका पूर्ण सहयोग रहा। अयोध्या पहुंचने वाले कारसेवकों को प्रेरित करने में वे अग्रणी थे। आंदोलन के दौरान कई बार हिंसा हुई, गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन वेदांती जी कभी पीछे नहीं हटे। वे कहते थे कि राम मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि हिंदू समाज की अस्मिता का प्रतीक है। उनकी वाणी में इतनी ओज थी कि श्रोता भाव-विभोर हो जाते।
2000 के दशक में जब आंदोलन थोड़ा शांत हुआ, तो वेदांती जी ने राजनीति में प्रवेश किया। वे भाजपा के टिकट पर केंद्रीय सांसद बने और लोकसभा में राम मंदिर विधेयक लाने की मांग की। संसद के सत्रों में उन्होंने जोरदार बहस की। वे कहते थे कि बाबरी ढांचा स्वयं भू-द्वेषी तत्वों ने गिराया था, लेकिन इसका श्रेय राम भक्तों को दिया जाना चाहिए। उनकी यह बातें विपक्ष को खटकती रहीं। वेदांती जी ने अयोध्या को पर्यटन स्थल बनाने के प्रयास भी किए। वे मंदिर निर्माण के बाद प्रस्तावित राम कथा कुंज और अन्य परियोजनाओं के पक्षधर थे। उनका मानना था कि अयोध्या को वैश्विक राम धाम बनाना चाहिए।
राम मंदिर आंदोलन में वेदांती जी की भूमिका केवल संगठन तक सीमित नहीं रही। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों का गहन अध्ययन किया और पुरातात्विक साक्ष्यों को जनता के सामने रखा। वे तर्क देते कि राम जन्मभूमि का स्थान प्राचीन काल से मंदिर ही रहा है। 2019 में जब सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर निर्माण का फैसला सुनाया, तो वेदांती जी ने इसे भगवान राम की कृपा बताया। भूमि पूजन के समय वे अयोध्या में उपस्थित थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास के बाद उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे सुखद क्षण है। मंदिर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और 2024 में इसका उद्घाटन हो चुका है। वेदांती जी इस विजय के साक्षी बने।
स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी वेदांती जी अयोध्या से दूर न रहे। वे रीवा में इलाज करा रहे थे, लेकिन उनका मन हमेशा राम मंदिर पर लगा रहता। अस्पताल में भजन गाते और राम कथा सुनाते रहते। उनके शिष्य बताते हैं कि अंतिम दिनों में वे बार-बार अयोध्या जाने की बात करते। उनका निधन समाचार मिलते ही अयोध्या में शोक की लहर दौड़ गई। राम जन्मभूमि परिसर में भक्तों ने प्रार्थना सभाएं कीं। भाजपा कार्यालयों पर श्रद्धांजलि सभा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वेदांती जी राम आंदोलन के प्रतीक थे। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने ट्वीट कर शोक संदेश दिया। अनेक संतों ने भी उन्हें सच्चा राम भक्त बताया।
वेदांती जी का जीवन संघर्षों से भरा रहा। जेल यात्राएं, मुकदमे, आलोचनाएं- सब कुछ सहा, लेकिन लक्ष्य पर डटे रहे। वे सादा जीवन जपंजम थे। अयोध्या में उनका आश्रम भक्तों का केंद्र था। वहां वे रोज राम कथा सुनाते। युवाओं को राम भक्ति का संदेश देते। उनका निधन राम मंदिर के निर्माण के ठीक एक वर्ष बाद हुआ है, जो संयोग मात्र नहीं लगता। भक्त मानते हैं कि वे भगवान राम के चरणों में जा बैठे हैं। उनका पार्थिव शरीर अयोध्या पहुंचने पर लाखों लोग दर्शन करेंगे। सरयू तट पर जल समाधि के समय भव्य आयोजन होगा। संत समाज और भाजपा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित होंगे।
डॉ रामविलास वेदांती का योगदान राम मंदिर आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक ले गया। उन्होंने साबित किया कि दृढ़ संकल्प से असंभव कार्य सिद्ध हो जाता है। अयोध्या आज भव्य राम मंदिर के कारण विश्व पटल पर चमक रही है। यह वेदांती जी जैसे योद्धाओं का परिणाम है। उनका जाना हिंदू समाज के लिए शोक का विषय है, लेकिन उनकी विरासत अमर रहेगी। आने वाली पीढ़ियां उन्हें याद रखेंगी। राम भक्ति का यह दीपक कभी न बुझे।
राम मंदिर आंदोलन के संदर्भ में वेदांती जी की भूमिका को विस्तार से समझने के लिए उनके कुछ प्रमुख कार्यों पर नजर डालें। सबसे पहले, 1989 में वे धन संग्रह अभियान के प्रमुख थे। देश भर में श्राम शिला पूजनश् कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रत्येक शिला पर राम मंदिर का चित्र उकेरा गया। वेदांती जी ने उत्तर प्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों का दौरा किया। लाखों शिलाएं अयोध्या पहुंचीं। दूसरा, 1990 की रथ यात्रा में उन्होंने अयोध्या में स्वागत समिति का नेतृत्व किया। कारसेवकों को भोजन, आवास और सुरक्षा प्रदान की। तीसरा, कानूनी लड़ाई में वे सुप्रीम कोर्ट तक गए। पुरातत्व सर्वेक्षण के साक्ष्यों को मजबूत किया। चौथा, राजनीतिक मोर्चे पर भाजपा को मजबूत किया। सांसद रहते हुए संसद में 50 से अधिक बार राम मंदिर पर चर्चा कराई। पांचवां, मंदिर निर्माण के बाद भी वे अयोध्या विकास के पक्षधर रहे। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राम चरित मानस पाठ आयोजन शुरू किए। छठा, वे विपक्षी दलों पर प्रहार करते रहे। कहते थे कि राम विरोधी ताकतें कभी सफल न होंगी। इन सभी कार्यों से आंदोलन मजबूत हुआ।
वेदांती जी के निधन पर पूरे देश से संदेश आ रहे हैं। संत समाज ने उन्हें महापुरुष कहा। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शोक प्रकट किया। अयोध्या के महंतों ने एकमत होकर कहा कि वेदांती जी राम मंदिर के निर्माण पुरुष थे। उनका जीवन प्रेरणा स्रोत बनेगा। भविष्य में अयोध्या आने वाले श्रद्धालु उनके आश्रम में जाकर प्रणाम करेंगे। राम मंदिर परिसर में उनकी स्मृति में कोई स्मारक बने, ऐसी मांग उठ रही है। यह स्वाभाविक है, क्योंकि उन्होंने अपना सब कुछ राम के लिए न्यौछावर कर दिया।
