वंदेमातरम के डेढ़ सौ साल होने पर मोदी का लोकसभा में जोरदार भाषण

देश आज वंदेमातरम के 150 वीं वर्षगांठ का उत्सव मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इसी संदर्भ में वंदेमातरम की महत्ता और उसके इतिहास पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने अपने भाषण में यह भी बताया कि जब वंदेमातरम को सौ वर्ष पूरे हुए थे तब देश में आपातकाल लागू किया गया था। इस अवसर पर वंदेमातरम से जुड़ी घटनाओं, उसकी अपार प्रभावशीलता और अंग्रेज शासन के लोकतंत्र विरोधी रवैये को विस्तार से समझना महत्वपूर्ण है।वंदेमातरम के इतिहास की शुरुआत उस समय हुई जब देश की जनता अपनी आज़ादी के लिए जागरूक हो रही थी। यह गीत हमारी मातृभूमि के प्रति अपार सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक बन गया। इसके शब्दों में ही देशवासियों के मन में राष्ट्र प्रेम और स्वाभिमान की भावनाएं जागृत हो जाती थीं। उस समय यह गीत गाना केवल एक सांस्कृतिक कार्य नहीं था, बल्कि यह ब्रिटिश राज के विरुद्ध एक कार्यवाही की तरह माना जाता था।जब वंदेमातरम सबसे पहले सार्वजनिक मंचों पर गाया गया, तब इसने लोगों के मन में जोश भर दिया और उनके अंदर एक स्वतंत्रता की चिंगारी प्रज्वलित कर दी।

इस गीत ने लोगों को स्वतंत्रता संग्राम में सशक्त रूप से जोड़ने का काम किया। तब के शासन को इसका अंदाजा लग चुका था कि यह केवल एक गीत नहीं बल्कि एक राष्ट्र जागरण की नींव है। इसलिए उन्होंने इसे रोकने और दबाने की हर संभव कोशिश की। अंग्रेज सत्ता से जुड़े अधिकारियों को वंदेमातरम से डर था क्योंकि इसके माध्यम से देश की युवाओं में देशभक्ति का ज्वार उठता था। यह गीत उनकी राजनीतिक ताकत पर चोट करता था और जनता को एकजुट करने की क्षमता रखता था। इसलिए जब भी कोई जगह वंदेमातरम गुनगुनाया जाता या उसे सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जाता, तो उसे प्रतिबंधित कर दिया जाता। कई बार इसके कारण देशभक्तों को जेल जाना पड़ता था।

वंदेमातरम के सौ साल पूरे होने के अवसर पर देश में हेरफेर किया गया था। देशवासियों की आवाज़ दबाने के लिए कठोर औपचारिक उपाय किए गए थे, जिससे उनकी आज़ादी की आकांक्षा शांत हो सके। उस समय भी सत्ता को यह स्पष्ट था कि वंदेमातरम इस भारत में लोगों के दिलों को जोड़ने वाला शक्तिशाली सूत्र है। इसलिए इस गीत को दबाने के लिए कड़े कदम उठाए गए। लेकिन इससे देश की जनता की स्वतंत्रता की इच्छा में कोई कमी नहीं आई, बल्कि उनका जोश और भी बढ़ गया।जब प्रधानमंत्री ने लोकसभा में वंदेमातरम की महत्ता पर चर्चा की, तो उन्होंने यह भी याद दिलाया कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि हमारे इतिहास का एक अभिन्न हिस्सा है। यह उन सभी देशभक्तों के संघर्ष का प्रतीक है जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी। वंदेमातरम ने देशवासियों को एकता की भावना से जोड़ने का काम किया और उनकी आवाज़ को प्रेरित किया।

इस गीत के माध्यम से हमारी मातृभूमि की महत्ता, उसकी वीरता और उसकी सुंदरता के गुण गाए गए हैं। यह देश की आत्मा और उसकी पहचान बन चुका है। इसलिए इसे सुनना, गाना और संवेदना से आनंद लेना प्रत्येक भारतीय की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री के विचार से वंदे मातरम का उत्सव मनाना हमारे देश के इतिहास को याद रखना और उसकी अहमियत को समझना है।इस गीत के उद्भव के पीछे कई महान क्रांतिकारी और साहित्यकार थे, जिनके प्रयासों से यह वंदेमातरम के रूप में प्रसिद्ध हुआ। उनके साहित्यिक योगदान ने देशवासियों के मनों में जोश और उत्साह भर दिया। यह गीत उन वीरों के संकल्प की ध्वनि है, जो विदेशी शासन से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं।

इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि अंग्रेजी शासन के दौरान वंदे मातरम के गायन को गंभीर रूप से रोका गया था। उनसे डर यह था कि यह गीत देशवासियों के एकजुट होने का कारण बनेगा तथा स्वतंत्रता की भावना को ताप देगा। इसलिए शासन ने इसे सरकारी स्तर पर प्रतिबंधित कर दिया। अनेक बार देश के महान क्रांतिकारियों को इसके गायन के कारण कारावास या यातनाएं सहनी पड़ीं।नतीजतन, वंदेमातरम आज केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया। इसका इतिहास हमें याद दिलाता है कि कैसे एक गीत पूरे देश को एक सूत्र में पिरो सकता है और विदेशी अधीनता के खिलाफ आवाज़ बुलंद कर सकता है। देश के हर नागरिक के लिए यह गर्व की बात है कि हम इस महान गीत के इतिहास और उसके महत्व को न भूलें।

प्रधानमंत्री ने लोकसभा में अपने वक्तव्य में देशवासियों से आग्रह किया कि वे वंदेमातरम को सम्मान दें और इसके द्वारा व्यक्त कराये गये देशभक्ति के भावों को आत्मसात करें। उन्होंने बताया कि वंदेमातरम आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उस समय थी जब इसे पहली बार गाया गया था। इसकी महत्ता और महत्व हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।इस प्रकार, वंदेमातरम के १५० वर्षों के इतिहास में हमें न केवल एक गीत की कहानी दिखती है, बल्कि हमारी मातृभूमि की स्वतंत्रता की अनंत संघर्ष गाथा भी देखने को मिलती है। अंग्रेज़ी शासन के भय से लेकर आज के स्वतंत्र भारत के गौरव तक, यह गीत हर भारतीय के दिल में स्थान रखता है और हमें राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्यों की याद दिलाता है।

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