कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी फिर से संसद में एक विवादित घटना का केंद्र बन गई हैं। हाल ही में उन्होंने अपने साथ एक कुत्ता संसद में लेकर आने का कदम उठाया, जो देश के उच्चतम विधायी संस्थान की गरिमा के विरुद्ध माना जा रहा है। यह घटना न केवल अपरंपरागत थी, बल्कि इससे संसद परिसर में चल रहे सदस्यों और राजनीतिक दलों के बीच भारी आक्रोश भी देखने को मिला। इस मामले पर व्यापक चर्चा होने लगी और अब विपक्षी दल विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं।रेणुका चौधरी का यह कदम इसलिए भी विवादित रहा क्योंकि उन्होंने संसद में उपस्थित बीजेपी नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इससे पहले भी वे कई बार अपने बयानों और व्यवहार की वजह से चर्चा में रही हैं, लेकिन यह मामला उनके विरोधियों के लिए एक नया सबूत बन गया है कि वह संसद की गरिमा का सम्मान नहीं करतीं। सांसद के तौर पर ऐसे व्यवहार को किसी भी पार्टी या संसद के सदस्य सहन नहीं कर सकते।
आज जब एक पत्रकार ने से इस पूरे मामले पर उनसे सवाल किया, तो उनका जवाब और भी अधिक असामान्य था। वे पत्रकार के सवाल का जवाब में भौं-भौं की आवाज़ निकालकर चली गईं, जैसी आवाज़ कुत्ते करते हैं, जो न केवल अभद्रता की हद थी बल्कि एक तरह से इस पूरे मामले को मजाक में उड़ाने की तरह लगा। सांसद का यह व्यवहार लोकतांत्रिक संस्थान की मर्यादा के लिए एक बड़ा अनादर था। इससे संसद का माहौल खराब हुआ और कई सांसदों ने कड़ी निंदा की। दरअसल, राजनीति में विवाद कोई नई बात नहीं है, परंतु जब कोई सांसद इस तरह के अनुचित व्यवहार का प्रदर्शन करता है, तो यह पूरी संसद की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़ा करता है। रेणुका चौधरी पहले भी कई बार विवादों में आ चुकी हैं। उनकी अगुवाई में आए बयानों ने कई बार राजनीतिक हलकों में गुस्सा भड़काया है। उनके विरोधी उन्हें समय-समय पर ऐसे ही बातों के लिए आड़े हाथ लेते रहे हैं, लेकिन यह मामला उनके राजनीतिक कैरियर के लिए भारी पड़ सकता है।
विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव इसीलिए जरूरी हो सकता है क्योंकि संसद की गरिमा और सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है। संसद में चलने वाली बहसों, विचार-विमर्श और चर्चा में अनुशासन बनाये रखना आवश्यक होता है। जब कोई सदस्य ऐसी हरकत करता है जिससे संसद की मर्यादा क्षतिग्रस्त होती है, तो संसद के सदस्यों को उचित कार्रवाई करनी होती है। यह न केवल संसद की गरिमा बचाने के लिए आवश्यक है, बल्कि भविष्य में ऐसे व्यवहार को रोकने के लिए भी जरूरी है।इसके अलावा, यह घटना यह भी दर्शाती है कि राजनीतिक लड़ाई अब कितनी कड़वी और विवादित हो गई है। यहाँ तक कि गाली गलौच की भाषा और असभ्य हरकतें भी सामान्य होती जा रही हैं। संसद जैसी जगह जो लोकतंत्र का मंदिर है, वहाँ इस तरह के व्यवहार की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सांसदों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और सम्मान का परिचय देना चाहिए।
रेणुका चौधरी की पार्टी ने फिलहाल इस मामले पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे एक बड़ी गलती करार दिया है। उन्होंने कहा है कि संसद सदस्यों को अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक मतभेदों को पक्षपात करने की बजाय लोकतंत्र के उच्च आदर्शों का पालन करना चाहिए। संसद में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए भविष्य में कड़े नियम बनाए जाने की भी बात कही जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम से यह भी पता चलता है कि राजनीतिक दबाव और तनाव बढ़ते जा रहे हैं। संसद की कार्यवाही का उद्देश्य देश के विकास और जनहित की बात करना होना चाहिए, लेकिन जब बात बहस से ज्यादा विवाद और अपशब्दों में बदल जाती है, तो वह लोकतंत्र के लिए हानिकारक साबित होती है। सांसदों को अपनी हूबहू भूमिका निभानी चाहिए और अपने कृत्यों से समाज में सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
आगे चलकर यदि संसद में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव आ जाता है और उस पर कड़ी कार्रवाई होती है, तो यह न केवल रेणुका चौधरी के लिए बल्कि सभी सांसदों के लिए एक सीख होगी कि बाहर से मिली कोई छूट संसद में अनुशासन टूर्ने के लिए नहीं होती। संसद का सम्मान सर्वाेपरि है और उसे बनाए रखना हर सदस्य की जिम्मेदारी है। इस विवाद की गूंज जल्द ही देशभर में सुनाई देगी, जिससे राजनीतिक मंचों पर भी इसकी व्यापक चर्चा होगी। जनता भी इन घटनाओं को गंभीरता से देख रही है क्योंकि वे लोकतंत्र के प्रति सांसदों के रवैये से प्रभावित होती है। लोकप्रतिनिधि जब अनुचित और अनुशासित व्यवहार करते हैं, तो इससे जनता का भी सिस्टम पर से विश्वास कमजोर होता है।
कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि संसद में अपना कुत्ता लेकर जाना और भौं-भौं की आवाज़ निकालना जैसे कृत्य न केवल नियमों के खिलाफ हैं, बल्कि वे लोकतांत्रिक मर्यादा और सामंजस्य को भी कमजोर करते हैं। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेकर सही दिशा में कदम उठाना जरूरी है ताकि संसद की गरिमा बनी रहे और देश की जनता को गर्व महसूस हो कि उनके प्रतिनिधि सम्मान के साथ अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
