एआई से बनी न्यूड फोटो ने छात्रा की ली जान

बेहद शर्मनाक तरीके से पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में एक दसवीं कक्षा की छात्रा की एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनी नग्न फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई। इससे छात्रा की मानसिक हालत बहुत खराब हो गई, और बदनामी के डर से उसने अपने कमरे की छत से लटककर आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार, स्थानीय एक विवाहित व्यक्ति ने उसकी तस्वीरें इकट्ठा करके एआई टूल्स की मदद से अपमानजनक फोटो बनाकर ऑनलाइन साझा की थीं, जिससे छात्रा को लगातार उत्पीड़न झेलना पड़ा था। परिवार ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह घटना साइबर अपराध की गंभीरता को दर्शाती है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है.
छात्रा जब अपने मामा के घर रह रही थी तब उसके साथ यह घटना हुई। आरोपी ने उसकी तस्वीरों का दुरुपयोग करते हुए उन्हें एडिट कर अश्लील फोटो बनाईं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। इसके बाद छात्रा को स्थानीय लोग और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जिसके कारण मानसिक तनाव और सामाजिक बदनामी की भावना ने उसे आत्महत्या पर मजबूर कर दिया। परिवार के सदस्यों ने बताया कि लड़की को लंबे समय से मानसिक कष्ट हो रहा था और इस उत्पीड़न से वह त्रस्त थी। इस तरह की घटनाओं से समाज में डर का माहौल है कि न जाने कब उनकी फोटो को छेड़़छाड़ करके वायरल कर दिया जाये।
ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय की बात की जाये तो यह कहा जा सकता है कि साइबर अपराधों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी ऐसी सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए तुरंत फ़ोटो/वीडियो हटाने की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके अलावा युवाओं और परिवारों को साइबर सुरक्षा और डिजिटल संस्कार के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए कि वे अपनी और दूसरों की सुरक्षा कैसे करें। पीड़ितों के लिए परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे दबाव में घिरे बिना मदद ले सकें। बदनामी और लज्जा के डर के कारण लोगों का छुप जाना एक बड़ी समस्या है। समाज को मानसिकता बदलनी होगी कि पीड़ित की मदद की जाएा और दोषी के खिलाफ कार्रवाई हो.

एआई और डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग के साथ, ऐसे साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं। एआई जैसी तकनीक से फर्जी और अपमानजनक फोटो बनाना एक नया खतरा बन गया है। इस पर प्रभावी रोक तभी लग सकती है जब कानूनी, तकनीकी, और सामाजिक स्तर पर समन्वित प्रयास किए जाएं। सोशल मीडिया पर निगरानी और तेज़ त्वरित कार्रवाई व्यापक रूप से आवश्यक हो गई है।इस घटना से सीख लेकर हमें बच्चों और युवाओं की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए सख्त नियमों और जागरूकता अभियानों की जरूरत स्पष्ट होती है, ताकि कोई अपने जीवन पर ऐसा बड़ा आघात न झेलना पड़े.

 

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