सूर्य से निकलने वाली तेज विकिरण की वजह से दुनिया भर में हजारों विमान आज जमीन पर खड़े हैं। एयरबस के ए 320 परिवार के विमानों में उड़ान नियंत्रण का डेटा खराब होने का खतरा पैदा हो गया है, जिसके कारण भारत समेत अमेरिका, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में हवाई सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। बता दें सूर्य का 11 वर्षीय चक्र अपने चरम पर पहुंच चुका है, जहां से शक्तिशाली सूर्य ज्वाला निकल रही हैं। नवंबर 2025 में एक्स 5.1 स्तर की सबसे तेज ज्वाला दर्ज की गई, जो रेडियो संचार को ठप कर सकती है। ऊंचाई पर उड़ते विमानों के कंप्यूटर चिप में बिट फ्लिप हो जाता है, जिससे गलत संकेत मिलते हैं और विमान अनियंत्रित हो सकता है। यह समस्या एलिवेटर ऐलेरॉन कंप्यूटर से जुड़ी है, जो उड़ान नियंत्रण का मुख्य हिस्सा है। एक हालिया घटना में मैक्सिको से अमेरिका जा रहे विमान ने अचानक ऊंचाई खो दी और इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। एयरबस ने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में लिफ्ट अनियंत्रित होकर विमान की संरचना तोड़ सकती है।
भारत में हवाई सेवाओं पर पाबंदी
भारत में इंडिगो, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के करीब दो सौ से ढाई सौ विमान प्रभावित हैं। कुल 560 ए 320 विमानों में से आधे से ज्यादा को सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर बदलना पड़ रहा है। इंडिगो ने कहा कि वह एयरबस के साथ मिलकर निरीक्षण कर रही है, जिससे उड़ानें देरी से चलेंगी। एयर इंडिया ने यात्रियों से माफी मांगी, क्योंकि टर्न अराउंड समय बढ़ जाएगा। एयर इंडिया एक्सप्रेस के 31 विमान भी ग्राउंड हो रहे हैं। यूरोपीय संघ की विमानन सुरक्षा एजेंसी ने साफ आदेश दिया कि दोषपूर्ण कंप्यूटर बदलने तक कोई उड़ान नहीं। मुंबई, दिल्ली और अन्य हवाई अड्डों पर यात्री परेशान हैं, देरी और रद्दीकरण बढ़ गए हैं। छोटे हवाई अड्डों पर वैकल्पिक विमान कम हैं, इसलिए प्रभाव ज्यादा है।
विश्व स्तर पर फैला संकट
एयरबस ने करीब 6000 विमानों को ग्राउंड करने का आदेश दिया, जो वैश्विक बेड़े का आधा है। अमेरिका की अमेरिकन एयरलाइंस के 480 में से 340 विमान ठप हैं, प्रत्येक को दो घंटे का समय लगेगा। लुफ्थांसा, एवियानका और दक्षिण अमेरिकी कंपनियां भी चपेट में हैं,जिसके चलते यूरोप में धन्यवाद दिवस के यात्रा पीक पर लाखों यात्री फंस गए। कैनकून से न्यूयॉर्क की उड़ान में 15 लोग घायल हुए। सौर तूफान से जीपीएस और संचार बाधित हो रहे हैं। एशिया, अफ्रीका और यूरोप में रेडियो ब्लैकआउट हो चुके हैं। नवंबर में कई ज्वालाओं ने पृथ्वी को निशाना बनाया।
समस्या की जड़ और समाधान
ए 320 विमानों का पुराना सॉफ्टवेयर सौर कणों से डेटा करप्शन का शिकार हो रहा है। ऑटोपायलट चालू रहने पर भी विमान नीचे झुक जाता है। एयरबस ने आपात अलर्ट जारी किया, जिसमें एलएसी को सुरक्षित मॉडल से बदलना जरूरी है।समाधान में सॉफ्टवेयर अपडेट या हार्डवेयर बदलाव शामिल है। छोटी फेरी उड़ानें बिना यात्रियों के मरम्मत स्थल तक अनुमत हैं। एयरलाइनों को दो-तीन दिन लग सकते हैं।
भविष्य में सावधानियां
सूर्य चक्र 2025-26 में और तेज होगा, इसलिए नए विमानों में विकिरण प्रतिरोधी चिपें लगानी होंगी। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां मानक सख्त कर रही हैं। यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन चुनना पड़ सकता है। यह घटना विमानन उद्योग को चेतावनी देती है कि अंतरिक्ष मौसम का ध्यान रखना जरूरी है। सुरक्षा पहले, इसलिए ग्राउंडिंग सही कदम है।
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