मस्ती फिल्म को मिला ‘ए’ सर्टिफिकेट, इस फैसले ने उस दौर में बॉलीवुड में सेंसरशिप को लेकर नई बहस छेड़ दी थी। निर्देशक इंद्र कुमार की इस कॉमेडी फिल्म में रितेश देशमुख, विवेक ओबेरॉय, आफताब शिवदासानी और अमृता राव सहित कई कलाकारों ने अभिनय किया। फिल्म अपनी कहानी, संवाद, प्रस्तुति और वैवाहिक जीवन पर आधारित शरारती हास्य के कारण पहले से ही चर्चा में थी, मगर सेंसर बोर्ड द्वारा दिए गए ‘ए’ सर्टिफिकेट ने इसे और सुर्खियों में ला दिया।फिल्म की कहानी तीन दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपनी शादीशुदा जिंदगी से परेशान होकर रोमांच और मज़े की तलाश में भटक जाते हैं। इसकी थीम हल्की-फुल्की कॉमेडी पर आधारित है, लेकिन कई जगहों पर दोहरे अर्थ वाले संवाद, बोल्ड सिचुएशन और शरारती नज़रों वाली कहानी को देखते हुए सेंसर बोर्ड ने माना कि इसे पारिवारिक दर्शकों के लिए उपयुक्त नहीं कहा जा सकता। इसीलिए इसे ‘एड्ल्ट’ कैटेगरी में रखा गया। सेंसर बोर्ड का यह निर्णय आने के बाद फिल्म के निर्माताओं ने शुरुआत में हल्का विरोध प्रदर्शन किया था। उनका कहना था कि कहानी के प्रस्तुतीकरण में अश्लीलता नहीं बल्कि सिर्फ हास्य का स्पर्श है, जिसे बिना जरूरत ‘ए’ सर्टिफिकेट देकर सीमित दर्शकों तक कैद कर दिया गया।
निर्देशक इंद्र कुमार ने उस समय एक बयान में कहा था कि कॉमेडी का एक खास अंदाज़ होता है, और मस्ती उसी अंदाज़ को हल्के-फुल्के रूप में पेश करती है। उन्होंने यह भी बताया कि कई सीन्स को फिल्म की मूल अवधारणा बनाए रखते हुए विनम्रता से शूट किया गया था। लेकिन सेंसर बोर्ड ने साफ कहा कि संवादों और कुछ स्थितियों में वयस्क हास्य का इस्तेमाल इतना स्पष्ट है कि इसे सभी आयु वर्ग के लिए जारी नहीं किया जा सकता। फिल्म की रिलीज़ से पहले सेंसर बोर्ड ने इसमें कुछ कट्स भी सुझाए थे। निर्माताओं ने अधिकांश कट्स को मंजूरी दे दी, लेकिन इसके बावजूद बोर्ड अपने फैसले पर कायम रहा और फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया गया। उद्योग के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, फिल्म का हास्य भले ही मनोरंजक था, पर उस समय का माहौल ऐसा था कि थोड़े भी बोल्ड कंटेंट पर सख़्ती दिखाई जाती थी।इस फैसले का फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर मिला-जुला प्रभाव पड़ा। एक ओर, युवाओं में फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ गई और ‘ए’ सर्टिफिकेट ने इसे एक अलग तरह की चर्चा दिलाई। दूसरी ओर, पारिवारिक दर्शकों का एक बड़ा वर्ग इससे दूर रहा। इसके बावजूद, फिल्म ने अपनी कॉमिक टाइमिंग और कलाकारों के प्रदर्शन के कारण मजबूत कमाई की और बाद में इसे एक सफल कॉमेडी माना गया।
फिल्म समीक्षकों ने भी इस विषय पर अपने मत जताए थे। कुछ का कहना था कि मस्ती जैसी फिल्में शरारती हास्य पर आधारित होती हैं और उन्हें उसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। वहीं कुछ अन्य समीक्षक सेंसर बोर्ड के पक्ष में थे, उनका मानना था कि फिल्म में प्रयुक्त भाषा और कई हास्य स्थितियाँ युवा दर्शकों के लिए सही संदेश नहीं देतीं, इसलिए उसका ‘ए’ सर्टिफिकेट उचित था।
समय के साथ ‘मस्ती’ ने न केवल दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई, बल्कि इसके बाद दो और फिल्मों का सीक्वेल भी बना। यही नहीं, भारतीय सिनेमा में वयस्क कॉमेडी की शैली को लोकप्रिय बनाने में भी इस फिल्म का योगदान माना जाता है। हालांकि उसके शुरुआती चरण में मिला ‘ए’ सर्टिफिकेट इसकी राह में कुछ समय के लिए बाधा जरूर बना, लेकिन फिल्म अंततः अपनी मनोरंजन क्षमता के कारण दर्शकों के दिलों में जगह बनाने में सफल रही।मस्ती को मिला यह सर्टिफिकेट उस दौर में सेंसरशिप की नीतियों, फिल्मों में हास्य की सीमाओं और दर्शकों की स्वीकार्यता के बीच संतुलन पर एक व्यापक चर्चा का कारण बना था। आज भी इसे एक ऐसी फिल्म के रूप में याद किया जाता है जिसने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के साथ-साथ कॉमेडी शैली को नया मोड़ भी दिया।
