नीतीश चुने गये विधायक दल के नेता,कल लेगें सीएम पद की शपथ

जनता दल युनाइटेड यानी जदयू विधायक दल की बैठक में आज नीतीश कुमार को  सर्वसम्मति से नेता चुना गया है। इस फैसले के साथ ही यह लगभग तय हो गया है कि बिहार का आगामी शासन फिर से नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चलेगा। जल्द ही एनडीए की संयुक्त बैठक में भी नीतीश को भाजपा और अन्य सहयोगी दलों की ओर से गठबंधन का नेता चुना जाएगा। इसके बाद गुरुवार 20 नवंबर 2025 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।  

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का यह कदम न केवल सत्ता की निरंतरता का प्रतीक माना जा रहा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वे अभी भी राज्य की राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। राजनीति के माहिर खिलाड़ी कहे जाने वाले नीतीश ने हमेशा परिस्थितियों के अनुसार अपने फैसलों से सबको चौंकाया है। कुछ महीने पहले तक राज्य में राजनीतिक समीकरण जिस तरह बदलते दिखे थे, अब फिर से भाजपा और जदयू के गठबंधन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन नीतीश के पक्ष में है। जदयू विधायकों की बैठक में नीतीश कुमार को नेता चुने जाने के बाद पार्टी के अंदर जश्न का माहौल देखने को मिला। विधायक दल के सदस्यों ने उन्हें बधाई दी और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में बिहार विकास की दिशा में और मजबूत कदम उठाएगा। बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि भाजपा और जदयू के बीच अब पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर एक साथ आगे बढ़ने की तैयारी हो चुकी है। बताया जा रहा है कि दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच हाल के दिनों में कई दौर की सकारात्मक बातचीत हुई है, जिसका परिणाम यह है कि अब नीतीश को गठबंधन का साझा नेता बनाने पर सभी सहमत हैं।  

गांधी मैदान में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। समारोह में प्रधानमंत्री के आने की संभावना है, हालांकि आधिकारिक कार्यक्रम की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके अलावा कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता, एनडीए घटक दलों के नेता और राज्य के आला अधिकारी मौजूद रहेंगे। सुरक्षा की दृष्टि से राजधानी पटना में विशेष व्यवस्था की जा रही है। गांधी मैदान और आस-पास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह शपथ ग्रहण सिर्फ सत्ता की औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत माना जा सकता है। नीतीश कुमार का भाजपा के साथ दोबारा खड़ा होना यह संदेश देता है कि 2025 के आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। भाजपा भी इस गठबंधन को स्थिर और प्रभावी साबित करने की कोशिश करेगी ताकि विपक्षी खेमे में भ्रम और असंतुलन बढ़ाया जा सके।  

राजनीति में नीतीश कुमार का यह सफर बेहद दिलचस्प रहा है। उन्होंने कई बार गठबंधन बदले, लेकिन हर बार नए समीकरणों के साथ सत्ता में बने रहे। उनके नेतृत्व में बिहार ने सामाजिक न्याय और विकास की राजनीति का एक संतुलन देखा है। हालांकि, इस बार की चुनौती पहले से कहीं अधिक बड़ी मानी जा रही हैकृक्योंकि जनता अब विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर परिणाम चाहती है, न कि केवल राजनीतिक गठबंधनों पर भरोसा।  सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार की नई सरकार में भाजपा को कई अहम मंत्रालय मिलने की संभावना है। सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर दोनों दलों में आपसी सहमति बन चुकी है। जदयू का ध्यान इस बार सुशासन के साथ-साथ ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर केंद्रित करने का होगा, ताकि जनता को भरोसे का संदेश दिया जा सके।  

बिहार की जनता के लिए अब नजरें गांधी मैदान की ओर टिकी हैं, जहां एक बार फिर वही दृश्य दोहराया जाएगा जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। मंच से एक बार फिर वे विकास, पारदर्शिता और स्थिरता का वादा करेंगे। उनके साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची का भी सबको इंतजार है। यह देखना दिलचस्प होगा कि नई कैबिनेट में किन पुराने चेहरों को जगह मिलती है और किन नए चेहरों को मौका मिलता है।  बिहार की राजनीति में यह पल ऐतिहासिक इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह साबित करता है कि नीतीश कुमार अब भी बिहार की राजनीति के अपरिहार्य चेहरे हैं। चाहे गठबंधन दाएं हो या बाएं, सत्ता की कुंजी हर बार उनकी ही हाथों में सिमट जाती है। आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति का दिशा-निर्देशन फिर से उनके हाथों में रहेगा, और एक बार फिर से बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जाएगा।  

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