तीन हार के बाद कितना बचा है टीम इंडिया का वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियन फाइनल का रास्ता

साइकिल राउंड के आठ मैचों में से तीन टेस्ट हारने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के सामने वर्ल्ड टेस्ट चौम्पियनशिप (डब्ल्यूटीसी) 2025-27 साइकिल में फाइनल की राह अब और मुश्किल हो चुकी है। एक वक्त तक यह लग रहा था कि टीम इंडिया अपने घरेलू और विदेशी दौरों के संतुलन से आसानी से शीर्ष दो में जगह बना लेगी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमों के लगातार प्रदर्शन ने समीकरण का पूरा गणित उलझा दिया है। अब सवाल वही बड़ा हैकृक्या रोहित शर्मा की टीम के पास अब भी फाइनल का टिकट बचा है, या यह सफर यहीं ठहरने वाला है?

डब्ल्यूटीसी अंक तालिका का तंत्र ऐसा है कि जीत, हार और ड्रॉ के साथ-साथ प्वाइंट प्रतिशत (पीसीटी) सबसे अहम भूमिका निभाता है। भारत के इस वक्त आठ में से पाँच जीत और तीन हार हैं, यानी टीम का पीसीटी 62.5 फीसदी के आसपास आकर ठहर गया है। पिछली साइकिल की तरह 2023 में भी यही प्रतिशत भारत को फाइनल तक ले गया था, लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है क्योंकि इस साइकिल में ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड जैसी टीमें अपने शुरुआती मुकाबले जीतकर पहले ही बढ़त बना चुकी हैं। भारत का नेट पॉइंट प्रतिशत गिरने का मतलब है कि आने वाले हर टेस्ट में जीत अब लगभग लाज़मी हो गई है।अब देखते हैं कि भारत किस तरह फाइनल तक पहुंच सकता है। सबसे पहले, भारत के पास इस साइकिल में अभी 10 टेस्ट मैच बचे हैं, जिनमें से छह घरेलू मैदान पर और चार विदेशी धरती पर खेले जाएंगे। घरेलू सीरीज में बांग्लादेश, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड जैसे विरोधी हैं, जबकि विदेश में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी मुश्किल चट्टानें इंतजार कर रही हैं। डब्ल्यूटीसी प्रणाली के हिसाब से हर सीरीज का अधिकतम अंक समान है, इसलिए यह संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होगा कि टीम कमजोर विपक्ष के खिलाफ कोई मैच हाथ से न जाने दे।

अगर भारत यहां से अपने बचे हुए 10 टेस्ट में से आठ जीत लेता है और दो ड्रॉ रहता है, तो उसका प्रतिशत करीब 70-72 फीसदी तक जा सकता है, जो फाइनल के लिए लगभग तय रास्ता है। लेकिन अगर भारत फिर दो और हार झेल लेता है, तो यह प्रतिशत 58 के नीचे चला जाएगा, जो निर्णायक साबित हो सकता है। ऐसा होने पर भारत को दूसरों के परिणाम पर निर्भर रहना होगा,खास तौर पर इस बात पर कि ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका किन टीमों के खिलाफ कितना जीत प्रतिशत बनाए रखते हैं।

समीकरण के लिहाज से देखें तो भारत के लिए कुछ प्रतिस्पर्धी टीमें हैं जिनसे उसे न केवल जीत बल्कि क्लीन स्वीप की दरकार होगी। बांग्लादेश और न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू मैच इस फार्मूले की धुरी हैं। इन दोनों सीरीज से 24 अंक का पूरा सेट हासिल करना टीम इंडिया के लिए अनिवार्य होगा। उसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर बड़े अंतर से जीतना जरूरी होगा ताकि पॉइंट प्रतिशत ऊंचा बना रहे। विदेशी दौरों पर दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से भले ही एक या दो मैच हारने की गुंजाइश हो, लेकिन कम से कम एक-एक टेस्ट जीतना बहुत जरूरी होगा ताकि नेट प्रतिशत संतुलित रहे और टीम दूसरे स्थान पर मजबूती से टिक सके।

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