भारत निर्वाचन आयोग ने देश के सबसे व्यापक चुनावी सुधार अभियान को एक नए चरण में प्रवेश दिला दिया है। बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया आरंभ होने के बाद अब तमिलनाडु में मतदाता सूची के अद्यतन कार्य की शुरुआत एक सप्ताह के भीतर की जाएगी। आयोग का यह कदम 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदान प्रणाली को और अधिक सटीक, पारदर्शी और समावेशी बनाने की दिशा में उठाया जा रहा है। यह राष्ट्रीय स्तर पर वह व्यापक अभियान है जिसके तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने, त्रुटियों को सुधारने और पुराने या अपात्र नामों को हटाने का अभ्यास पूरे देश में चरणबद्ध ढंग से किया जाएगा।
निर्वाचन आयोग का मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता का आधार एक सही और अद्यतन मतदाता सूची है। आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु में यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान जिला स्तर से लेकर बूथ स्तर तक चलेगा, जिसमें स्थानीय प्रशासनिक तंत्र और मतदान कर्मियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। इस अभियान का उद्देश्य उन सभी नागरिकों को शामिल करना है जो 1 जनवरी 2026 को या उससे पहले अठारह वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे। साथ ही, जिन मतदाताओं की जानकारी गलत पाई गई है या स्थान परिवर्तन के कारण वे किसी अन्य क्षेत्र में बस गए हैं, उनका रिकॉर्ड भी तुरंत अपडेट किया जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए चार मुख्य चरण तय किए गए हैं। पहले चरण में बूथ स्तर पर मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशन होगा। दूसरे में नागरिकों को अपने विवरण की जांच कर आपत्ति दर्ज कराने अथवा नाम जुड़वाने का अवसर दिया जाएगा। तीसरे चरण में सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा, और अंत में संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। आयोग का प्रयास है कि यह पूरी प्रक्रिया दिसंबर 2025 के अंत तक पूरी हो जाए ताकि जनवरी 2026 से पहले नई मतदाता सूची लागू की जा सके।
तमिलनाडु के बाद पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा, पंजाब और ओडिशा सहित लगभग सभी राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण की तैयारियां चल रही हैं। निर्वाचन आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि, दोहराव या मृत्युपरांत नामों की उपस्थिति को दूर किया जाए। आयोग का यह भी कहना है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से वंचित नहीं रहना चाहिए। विशेष जोर उन युवाओं, महिलाओं, प्रवासी मजदूरों और शहरी झुग्गी बस्तियों के निवासियों पर दिया जा रहा है जो परंपरागत रूप से चुनावी सूची में शामिल होने से अक्सर छूट जाते हैं। तमिलनाडु में इस कार्य के लिए एक विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया गया है। प्रत्येक मतदान केंद्र पर बीएलओ यानी बूथ स्तर अधिकारी नागरिकों के घर-घर जाकर जानकारी सत्यापित करेंगे। स्थानीय निकायों, पंचायतों, शहरी निकायों और विद्यालयों की मदद से युवा मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा। आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सूचना प्रौद्योगिकी माध्यमों का अधिकतम उपयोग हो और ऑनलाइन आवेदन प्रणाली को हर नागरिक के लिए सुलभ बनाया जाए। सूत्रों के अनुसार, आयोग ने इस बार पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तकनीकी निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया है। सभी सूचियों का डिजिटली रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है ताकि मानव त्रुटि की संभावना कम हो सके। प्रत्येक आवेदन और आपत्ति की ऑनलाइन ट्रैकिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त, नागरिकों को एसएमएस और ईमेल के माध्यम से उनके आवेदन की स्थिति की जानकारी मिलेगी। इस पहल से न केवल मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ेगी बल्कि प्रक्रिया में जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
पिछले कुछ वर्षों में निर्वाचन आयोग ने लगातार यह महसूस किया है कि कई बार राज्यों में स्थानांतरण, प्रवासन और मृत्युपरांत रिकॉर्ड अपडेट न होने से मतदाता सूचियों में बड़ी गड़बड़ियां पाई जाती हैं। इन कमियों को दूर करने के लिए अब यह राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया जा रहा है जिसमें तमिलनाडु जैसे राज्य अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। आयोग का अनुमान है कि इन सुधारों से आने वाले चुनावों में लगभग तीन से चार करोड़ नए मतदाता जुड़ सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पहल का सबसे बड़ा लाभ उन राज्यों को मिलेगा जहां आने वाले महीनों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। खासकर 2026 में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने अपेक्षित हैं, इसलिए मतदाता सूची को सुधारना एक बड़ी प्राथमिकता के रूप में देखा जा रहा है। आयोग चाहता है कि जब मतदान की प्रक्रिया शुरू हो, तब तक प्रत्येक राज्य में सूची पूरी तरह अद्यतन हो जाए, जिससे किसी भी नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।
चुनावी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आयोग का यह भी प्रयास है कि नागरिकों में मतपंजीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और मीडिया की सहायता से व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। युवाओं को प्रेरित किया जाएगा कि वे मतदाता बनें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं। आयोग ने स्पष्ट कहा है कि यह केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतंत्र को गहराई तक मजबूत करने का राष्ट्रीय अभियान है। जनवरी 2026 को संदर्भ तिथि मानते हुए पूरे देश में मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक समान ढांचे में किया जा रहा है ताकि किसी राज्य में असमानता न रहे। इस बार पहली बार आयोग ने यह व्यवस्था भी की है कि दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर से ही आवेदन और सत्यापन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। ग्रामीण इलाकों में ग्राम सचिवालयों के माध्यम से यह प्रक्रिया सरल बनाई जाएगी जिससे ग्रामीण महिलाओं और श्रमिकों को दिक्कत न हो। इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी विधानसभा चुनावों और आगे होने वाले लोकसभा चुनावों में हर भारतवासी को निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित वोटिंग का अवसर मिले। तमिलनाडु में यह प्रक्रिया एक आदर्श मॉडल के रूप में देखी जा रही है, जिसे बाद में अन्य राज्यों में लागू किया जाएगा। निर्वाचन आयोग को उम्मीद है कि जनता के सहयोग और प्रशासनिक तत्परता से यह अभियान देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और सुदृढ़ करेगा।
