बिहार और तमिलनाडु के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की तैयारियां शुरू कर दी हैं। यह प्रक्रिया आने वाले सप्ताहों में पूरे राज्य में एक साथ चलायी जाएगी, ताकि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची पूरी तरह अद्यतन हो सके। आयोग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे और मतदाता सूची से अपात्र या दोहराए गए नामों को हटा दिया जाए। राज्य निर्वाचन विभाग के अनुसार, इस बार पुनरीक्षण कार्य को डिजिटल प्रणाली से जोड़ते हुए पारदर्शिता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई है। सभी जिलाधिकारियों और उप जिला निर्वाचन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बूथ स्तर अधिकारियों के माध्यम से घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी सत्यापित की जाए। जो लोग पहली बार 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, उन्हें मतदाता सूची में शामिल करना प्राथमिक लक्ष्य होगा।
आयोग ने 1 जनवरी 2026 को संदर्भ तिथि के रूप में तय किया है। इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले प्रत्येक युवक-युवती का नाम सूची में दर्ज किया जाएगा। साथ ही, शादी, निवास परिवर्तन, मृत्यु या किसी अन्य कारण से हुए नामों के बदलावों को भी सूची में दुरुस्त किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को दिसंबर 2025 के अंत तक पूरा करने की योजना है ताकि नई सूची जनवरी में प्रकाशित की जा सके। राज्य के सभी जिलों में मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन नवंबर के पहले सप्ताह में किया जाएगा। इसके बाद नागरिकों को अपने विवरण की जांच करने, आपत्ति दर्ज कराने तथा नया नाम जुड़वाने के लिए एक निर्धारित अवधि दी जाएगी। अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय विद्यालयों, कॉलेजों और पंचायतों की मदद से विशेष जनजागरण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। युवाओं को ऑनलाइन आवेदन प्रणाली के उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि पंजीकरण प्रक्रिया आसान हो सके।
आयोग के अनुसार, इस बार विशेष ध्यान उन क्षेत्रों पर दिया जाएगा जहां पहले मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा है या जहाँ मतदाता सूची में बार-बार संशोधन की आवश्यकता पड़ी थी। ग्रामीण इलाकों में ग्राम पंचायत सचिवालयों को आवेदन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं शहरी क्षेत्रों में नगर निगमों तथा नगर पालिकाओं के कार्यालयों को सहायता केंद्र बनाया गया है। निर्वाचन आयोग के अधिकारी बताते हैं कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण यहां मतदाता सूची का अद्यतन कार्य सबसे व्यापक और चुनौतीपूर्ण है। राज्य में करीब पंद्रह करोड़ से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं और हर वर्ष बड़ी संख्या में नये युवा जुड़ने लगते हैं। इस बार आयोग ने सभी बीएलओ को टैबलेट आधारित सत्यापन प्रणाली उपलब्ध कराने का निर्णय किया है जिससे सूची अद्यतन में मानवीय त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
इसके अतिरिक्त, आयोग ने राजनीतिक दलों से भी अपील की है कि वे अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से मतदाता सूची सत्यापन में सहयोग दें। चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए सभी दलों को इस अभियान का सहभागी बनाया गया है। आयोग का मानना है कि सभी पक्षों की संयुक्त भागीदारी से चुनावी व्यवस्था मजबूत होगी और नागरिकों के बीच लोकतंत्र पर विश्वास और गहराई से स्थापित होगा। राज्य के नागरिकों के लिए निरीक्षण और संशोधन की जानकारी स्थानीय स्तर पर सूचना पट्टों, पंचायत घोषणाओं, रेडियो संदेशों और समाचार पत्रों के माध्यम से दी जाएगी। इसके साथ ही आयोग ने यह निर्देश भी दिया है कि दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिकों को घर से ही आवेदन और सत्यापन की सुविधा दी जाए। प्रत्येक जिले में विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएंगे, जिन पर नागरिक अपने मतदाता पंजीकरण से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश की भूमिका निर्णायक होने वाली है, इसलिए मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता पर आयोग का इतना ध्यान केंद्रित होना स्वाभाविक है। पिछले चुनावों में देखी गई त्रुटियों और शिकायतों से सीख लेते हुए आयोग ने इस बार तकनीकी निगरानी और मानव सत्यापन दोनों पर समान बल दिया है। निर्वाचन आयोग को उम्मीद है कि जनसहयोग से उत्तर प्रदेश में चलाया जाने वाला यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान देश के सभी राज्यों के लिए एक आदर्श उदाहरण बनेगा। मतदाता सूची में किसी भी त्रुटि का निवारण केवल तकनीकी कार्य नहीं बल्कि लोकतंत्र को अधिक सशक्त और सहभागी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
