लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने साल 2007 की तर्ज पर साल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए फिर से सोशल इंजिनियरिंग का नया खाका खींच लिया है। इसमें पिछड़े और अति पिछड़ा तबके के साथ ही ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज को बसपा से जोड़ने पर पार्टी काम करेगी। बसपा के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर कांशीराम स्मारक स्थल पर आयोजित रैली में बसपा सुप्रीमो मायावती ने खुद इस रणनीति का खुलासा किया।इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को ब्राहाण, विधायक उमाशंकर सिंह को क्षत्रिय और प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को अति पिछड़ा और पिछड़ा समाज को जोड़ने का जिम्मा सौंपा। मुस्लिम समाज को लेकर उन्होंने पत्ते तो नहीं खोले लेकिन मंच पर पूर्व सांसद मुनकाद अली, पूर्व एमएलसी नौशाद अली और 4 मंडलों के प्रभारी शम्सुद्दीन राईन को जगह देकर मुस्लिम समाज को साथ आने व सम्मान देने का संदेश दिया गया।
मायावती ने किया गरीब सवर्णों का जिक्र
यूपी के विधानसभा चुनाव को देखते हुए बसपा ने इस साल फरवरी से ही सोशल इंजिनियरिंग पर काम शुरू कर दिया था। इसके तहत मार्च में हर जिले में ‘अनुसूचित जाति और पिछड़ा भाईचारा कमिटी’ का गठन कर दिया था। बसपा से पिछड़ा और अति पिछड़ों को जोड़ने के लिए इन कमिटियों की हर दो महीने में बैठकें भी होती रहीं। इस बीच अब ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज को साथ लाने के लिए पार्टी मिशन मोड पर काम करेगी। मायावती ने भाषण में भी गरीब सवर्णों का कई बार जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी, सपा और कांग्रेस की सरकारों में इस तबके की हालत लगातार खराब हुई और बसपा की सरकार बनने के बाद सर्व समाज को रोजीरोटी और रोजगार का संकट नहीं होने दिया जाएगा।
मुस्लिमों पर साधी चुप्पी
बसपा सूत्रों की मानें तो मुस्लिम समाज के बीच अभी बसपा को लेकर उहापोह की स्थिति है, लेकिन उसे जोड़ने के लिए अलग से योजना पर काम चल रहा है, जिसका खुलासा बाद में किया जाएगा। हालांकि जिला से लेकर मंडल और प्रदेश स्तर पर संगठन में मुस्लिम पदाधिकारी बनाकर बसपा ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि मुस्लिम समाज के लिए लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं।
साजिश कर हराने का आरोप, ईवीएम पर बोला हमला
मायावती ने 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद हुए चुनावों में साजिश के तहत उन्हें हराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बसपा की लोकप्रिय होती कार्यशैली और बढ़ते प्रभाव को देखकर उसे केंद्र में जाने से रोकने के लिए सपा, भाजपा और कांग्रेस समेत विरोधी दल एकजुट हो गए। बची खुची कसर ईवीएम में धांधली के जरिए पूरी कर दी गई। बसपा सुप्रीमो ने बिना किसी दल का नाम लिए दलित समाज के नाम पर बने संगठन और राजनीतिक दलों से दूर रहने की सलाह दी।यूपी में ‘आई लव….’ जैसी घटनाओं से बचने की सलाह देते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा ‘एक दूसरे के देवी, देवता, खुदा व धर्म को लेकर आए दिन बवाल और हिंसा करना ठीक नहीं है। सबको संविधान के मुताबिक रहना चाहिए।
आकाश आनंद के लिए भी मांगा साथ
बसपा में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की भूमिका ज्यादा बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। मायावती ने कहा, जिस तरह पार्टी ने बसपा संस्थापक कांशीराम के जीवनकाल और उनके देहांत के बाद भी मेरा साथ दिया, तो मैं चाहूंगी कि उसी तरह पार्टी के लोग आकाश आनंद के साथ भी हमेशा खड़े रहेंगे।
यूथ पर निगाहें, भविष्य की भी तैयारी
मायावती के मंच से पार्टी की युवा पीढ़ी को तैयार रहने के संकेत भी दिए गए। भाषण के दौरान मायावती ने राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की सराहना करने के साथ ही राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र के बेटे कपिल मिश्र के काम को भी सराहा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कपिल ने कार्यक्रम में फ्री मेडिकल समेत दूसरी व्यवस्थाओं में मदद की है, वह पार्टी के प्रति उनके सेवा भाव को दिखाता है। गुरुवार को बसपा के आयोजन में पहले राष्ट्रीय संयोजक आकाश ने जय भीम के साथ भाषण दिया। उन्होंने कांशीराम को श्रद्धासुमन अर्पित किए और बसपा सुप्रीमो मायावती को अपना इकलौता आदर्श बताया।
