बिहार-बंगाल चुनाव में GST की दोगुनी माया त्योहारी ऑफर से सियासी खेल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने हाल ही में ‘नेक्स्ट जेन GST 2.0’ लागू किया है, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के आर्थिक विकास और आम जनता के लिए एक बड़ा कदम बताया है। यह कदम न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके पीछे चुनावी रणनीति भी साफ नजर आ रही है। दरअसल, जीएसटी सुधार की घोषणा और इसका क्रियान्वयन ऐसे समय पर किया गया है, जब बिहार और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। वित्त मंत्री ने इसे देश के 140 करोड़ लोगों के लिए मैनिफेस्टो बताया, लेकिन उनके बयान और समयबद्ध निर्णय से यह साफ है कि इसका फोकस बिहार और पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को आकर्षित करना भी है।बिहार में छठ पूजा के समय जीएसटी सुधार लागू होने की बात वित्त मंत्री ने पहले ही सार्वजनिक रूप से कही थी। उनका कहना था कि छठ पूजा से पहले यह रिफॉर्म लागू होगा ताकि आम जनता को इसका लाभ सीधे तौर पर दिखाई दे। इसके तहत कई आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कमी की गई है, जिससे घरेलू खपत को बढ़ावा मिलेगा और व्यापारियों को राहत मिलेगी। वहीं, पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए यह कदम दुर्गा पूजा और दीपावली के समय लागू किया गया। कोलकाता में आयोजित ‘नेक्स्ट जेन जीएसटी 2.0’ कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने साफ किया कि प्रधानमंत्री की सलाह के अनुसार यह सुधार पितृ पक्ष के बाद लागू किया गया ताकि बंगाल समेत पूरे देश के लोग त्योहारों के समय जीएसटी का लाभ उठा सकें।

आर्थिक दृष्टि से देखें तो जीएसटी 2.0 के तहत दरों में कटौती से लगभग 2 लाख करोड़ रुपये उपभोक्ताओं के हाथों में आएंगे। इससे घरेलू खपत में बढ़ोतरी होगी, जो मंदी के दौर में अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। यह सुधार विशेष रूप से छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए लाभकारी साबित होगा। पश्चिम बंगाल में हस्तशिल्प और छोटे उद्योग जैसे शांति निकेतन के चमड़े के उत्पाद, पुरुलिया के मुखौटे, मालदा के आम, दार्जिलिंग की चाय, जूट बैग, होजरी और रेडीमेड गारमेंट्स पर लागू इस कटौती से स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जीएसटी सुधार केवल आर्थिक कदम नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा भी है। बिहार में चुनाव जल्द ही होने वाले हैं, इसलिए छठ पूजा से पहले यह कदम मतदाताओं को आकर्षित करने की योजना का हिस्सा प्रतीत होता है। वहीं, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष होने हैं, लेकिन दुर्गा पूजा के समय इसे लागू करना यह संकेत देता है कि सरकार मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश देना चाहती है। यही नहीं, 2025 के आम बजट में भी बिहार के लोगों के लिए कई राहत उपाय शामिल किए गए थे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वित्त मंत्री और केंद्र सरकार की नजर आगामी चुनावों पर है।

निर्मला सीतारमण ने इसे केवल दरों में कटौती के रूप में नहीं बल्कि पूरे अनुपालन ढांचे को सरल बनाने के रूप में पेश किया। उनका कहना था कि जीएसटी 2.0 छोटे उद्योगों को स्पष्टता प्रदान करेगा और व्यापारियों के लिए नियमों को आसान बनाएगा। इससे केवल बड़े व्यवसाय ही नहीं, बल्कि छोटे व्यवसायों को भी फायदा मिलेगा और यह आर्थिक सुधार हर वर्ग के लोगों तक पहुंचेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश की अर्थव्यवस्था में विश्वास बहाल करने का भी एक प्रयास है। कोविड-19 और उसके बाद की आर्थिक चुनौतियों ने देश के व्यापार और उपभोक्ता विश्वास पर असर डाला था। इस सुधार से न केवल घरेलू खपत में बढ़ोतरी होगी बल्कि निवेशकों के बीच भी सकारात्मक संदेश जाएगा।वहीं, विपक्षी दल इस कदम को चुनावी रणनीति करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध निर्णय लिया गया है। हालांकि, सरकार इस आलोचना को खारिज करती है और इसे राष्ट्रीय आर्थिक हित में लिया गया कदम बताती है।

राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ बिहार और पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। अगले साल केरल, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए, यह सुधार पूरे देश में मतदाताओं के बीच सरकार की छवि सुधारने का भी अवसर प्रदान करेगा। वित्त मंत्री के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि जीएसटी 2.0 एक ऐसा कदम है जो आर्थिक लाभ और राजनीतिक रणनीति दोनों को जोड़ता है।अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह सुधार घरेलू बाजार की मांग को बढ़ावा देगा। कम दरों पर माल और सेवाओं की उपलब्धता से उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ेगी। इससे छोटे और मध्यम व्यवसायों को फायदा होगा, उनकी बिक्री बढ़ेगी और रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। यही नहीं, राज्य विशेष उत्पादों को प्रोत्साहित करने से स्थानीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ेगी।बिहार में छठ पूजा और पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के समय यह सुधार लागू होने से आम जनता के बीच सरकार के सकारात्मक संदेश फैलेंगे। लोगों को सीधे लाभ दिखेगा और त्योहारों के मौसम में क्रय शक्ति में बढ़ोतरी होगी। इस तरह, यह कदम आर्थिक और सामाजिक रूप से दोनों दृष्टियों से लाभकारी है।

कुल मिलाकर, जीएसटी 2.0 केवल कर दरों में कटौती नहीं है। यह आर्थिक सुधार का प्रतीक है, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने का माध्यम है और आगामी चुनावों में मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश फैलाने का भी जरिया है। बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे चुनावी राज्यों में इसका असर विशेष रूप से देखा जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रयासों से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है, बल्कि राजनीतिक रणनीति में भी समझदारी से कदम उठा रही है।इस पूरी प्रक्रिया से यह संदेश जाता है कि चुनावी मौसम और आर्थिक सुधार दोनों एक साथ संभव हैं। उपभोक्ता राहत, व्यापारिक सशक्तिकरण और चुनावी रणनीति का संतुलन जीएसटी 2.0 के माध्यम से साधा गया है। अब यह देखना बाकी है कि आगामी चुनावों में इसका राजनीतिक प्रभाव कितना मजबूत होगा और देश की अर्थव्यवस्था पर इसका दीर्घकालिक असर कैसा रहेगा।

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