मथुरा/वृंदावन, 12 सितंबर 2025: उत्तर प्रदेश के पवित्र धाम वृंदावन में एक ऐसी घटना ने धार्मिक समुदायों के बीच तनाव पैदा कर दिया है, जो सनातन धर्म की गहन आस्थाओं को चुनौती दे रही है। वृंदावन के पागल बाबा विद्युत केंद्र (बिजली विभाग कार्यालय) से भगवान बांके बिहारी, राधा-कृष्ण और भगवान विश्वकर्मा की पवित्र तस्वीरें हटाने का मामला तूल पकड़ चुका है। आरोपी असिस्टेंट इंजीनियर गफरुल हसन पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने पदभार ग्रहण करते ही इन तस्वीरों को दीवार से उतारकर स्टोर रूम में फेंक दिया, जहां पुराने बिजली मीटर रखे जाते हैं। न केवल इतना, बल्कि तस्वीरें दोबारा न लग सकें, इसके लिए दीवारों से कीलें तक उखाड़ ली गईं। इस घटना के बाद हिंदू संगठनों ने उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है और 24 घंटे के अंदर अधिकारी की बर्खास्तगी की मांग की है।
घटना की जड़ें हाल ही में हुई तैनाती में हैं। गफरुल हसन को वृंदावन बिजली विभाग में स्थानांतरित किया गया था। स्थानीय कर्मचारियों और श्रद्धालुओं के अनुसार, कार्यालय में वर्षों से भगवान बांके बिहारी की तस्वीर दीवार पर सुशोभित थी, जिसके आगे दैनिक पूजा-अर्चना होती थी। इसी तरह विश्वकर्मा और राधा-कृष्ण की तस्वीरें भी आस्था का प्रतीक बनी हुई थीं। हसन ने जॉइनिंग के तुरंत बाद इन तस्वीरों को हटाने का आदेश दिया। आरोप है कि तस्वीरें हटाने के बाद उन्हें अपमानजनक तरीके से स्टोर रूम में डाल दिया गया। जब अन्य स्टाफ सदस्यों ने तस्वीरों की दुर्दशा देखकर उन्हें साफ-सुथरा कर वापस लगाने का प्रयास किया, तो हसन ने दोबारा हटा दिया। इससे आगे बढ़ते हुए, उन्होंने दीवारों से कीलें उखाड़ लीं, ताकि भविष्य में ऐसी कोई कोशिश न हो सके।
इसकी भनक वृंदावन के धर्मप्रेमियों को लगते ही आक्रोश फूट पड़ा। सैकड़ों श्रद्धालु, साधु-संत और हिंदू संगठनों जैसे धर्म रक्षा संघ के कार्यकर्ता बिजली विभाग के बाहर सड़क पर उतर आए। प्रदर्शन में नारे गूंज रहे थे – “हुसैन मुर्दाबाद, मुर्दाबाद! बांके बिहारी लाल की जय! सत्य सनातन धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो!”। एक वृद्ध साधु ने कहा, “वृंदावन भगवान कृष्ण की लीला भूमि है। यहां सरकारी दफ्तर हो या निजी, आस्था का अपमान असहनीय है। गफरुल हसन ने ठाकुर जी की फोटो कूड़ेदान में फेंकी। ऐसे व्यक्ति को वृंदावन में रहने का हक नहीं।” प्रदर्शनकारियों ने गफरुल हसन पर धार्मिक कट्टरता का आरोप लगाया, दावा किया कि वह दिन में पांच बार नमाज पढ़ते हैं और हिंदू भावनाओं का सम्मान नहीं करते।
हिंदू संगठनों के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी जारी की। धर्म रक्षा संघ के एक प्रमुख ने कहा, “यह केवल व्यक्तिगत मनमानी नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश लगती है। गफरुल हसन को 24 घंटे में सस्पेंड किया जाए, वरना आंदोलन पूरे उत्तर प्रदेश में फैल जाएगा। बिजली मंत्री एके शर्मा से अपील है कि ऐसे अधिकारियों को बर्खास्त करें, जो विभागों में भ्रष्टाचार और असहिष्णुता फैला रहे हैं।” प्रदर्शन के दौरान वायरल वीडियो और तस्वीरों में खाली दीवारें, उखड़ी कीलें और फेंकी गई तस्वीरें साफ नजर आ रही हैं। गफरुल हसन की फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जहां उन्हें “धार्मिक अपमान करने वाला सरकारी अधिकारी” करार दिया जा रहा है।
वृंदावन की धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए यह घटना और भी चिंताजनक है। भगवान बांके बिहारी का मंदिर लाखों भक्तों का केंद्र है, जहां हर कदम पर कृष्ण भक्ति की झलक मिलती है। यहां सरकारी कार्यालयों में भी आस्था की जगह मानी जाती है – राष्ट्रपति की तस्वीर के साथ-साथ देवी-देवताओं की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह घटना योगी सरकार के सनातन धर्म रक्षा के दावों पर सवाल खड़ी करती है। एक कार्यकर्ता ने कहा, “यह सपा सरकार का दौर नहीं। मोदी-योगी की सरकार में सनातन की ध्वज फहरानी चाहिए। ऐसे लोग विभागों में घुसकर उपभोक्ताओं को परेशान करते हैं और सरकार को बदनाम।
प्रशासन अभी चुप्पी साधे हुए है। मथुरा पुलिस ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने की अपील की, लेकिन कोई आधिकारिक जांच का ऐलान नहीं हुआ। बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं मिला। सोशल मीडिया पर #BankeBihariZindabad, #GafarulHasanMurdaBad और #SanatanDharmKiJay जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद धार्मिक असहिष्णुता का प्रतीक बन सकता है, जो सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाएगा।
यह घटना कई बड़े सवाल खड़े करती है। सरकारी दफ्तरों में आस्था की क्या कीमत? क्या अधिकारी निजी पूर्वाग्रहों से निर्णय ले सकते हैं? क्या इसके पीछे कोई नापाक एजेंडा है, जो हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास कर रहा है? वृंदावन जैसे तीर्थस्थल पर ऐसी घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं। तत्काल जांच और कार्रवाई जरूरी है, ताकि आस्था का अपमान न हो और सद्भाव बना रहे। हिंदू संगठन चेतावनी दे रहे हैं –अगर एक्शन न लिया गया, तो आंदोलन और तेज होगा।
