कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अक्सर अपनी विदेश यात्राओं को लेकर चर्चा में रहते हैं। इसी कड़ी में अब उनकी हाल ही में सम्पन्न मलेशिया यात्रा ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। यह यात्रा, जो बिहार में उनकी वोटर अधिकार यात्रा के तुरंत बाद शुरू हुई, न केवल राजनीतिक दलों बल्कि आम जनता और सोशल मीडिया पर भी बहस का केंद्र बन गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और आम आदमी पार्टी (आप) ने इस यात्रा को लेकर तीखी आलोचना की, इसे चुनावी गैर-जिम्मेदारी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। इसके अलावा, यह भी कहा गया कि राहुल गांधी ने मलेशिया में भारत विरोधी तत्वों से मुलाकात की और अपनी सुरक्षा व्यवस्था को भी तार-तार कर दिया, जिसके बारे में उनकी सुरक्षा में लगी टीम ने नाराजगी भी जताई है।
गौरतलब हो राहुल गांधी ने एक सितंबर 2025 को बिहार में अपनी 16 दिन की वोटर अधिकार यात्रा समाप्त की थी, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव के साथ मिलकर 1,300 किलोमीटर की यात्रा की और 25 जिलों में 110 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया। यह यात्रा वोटर लिस्ट रिवीजन (एसआईआर) और वोट चोरी जैसे मुद्दों पर केंद्रित थी। यात्रा खत्म होने के तुरंत बाद, राहुल गांधी के मलेशिया के लंगकावी में छुट्टियां मनाने की खबरें सामने आईं, जिसकी तस्वीरें बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कीं। मालवीय ने तंज कसते हुए लिखा, राहुल गांधी फिर गायब हो गए। इस बार मलेशिया के लंगकावी में गुप्त छुट्टियां मना रहे हैं। क्या यह बिहार की सियासी गर्मी से बचने का प्रयास है या कोई गुप्त बैठक?
इस बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी। बीजेपी ने इसे राहुल गांधी की गैरजिम्मेदारी और जनता से दूरी का प्रतीक बताया, खासकर तब जब बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर थीं और पंजाब बाढ़ की चपेट में था। आप ने भी इस मुद्दे पर हमला बोला, जिसमें उनके मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा, पंजाब में बाढ़ का संकट है, लेकिन राहुल गांधी मलेशिया में छुट्टियां मना रहे हैं। यह विवाद इसलिए और बढ़ गया क्योंकि राहुल गांधी की अनुपस्थिति को उपराष्ट्रपति चुनाव जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ा गया। वहीं राहुल गांधी की मलेशिया यात्रा को लेकर कुछ अनिश्चित दावों में यह कहा गया कि उन्होंने भारत विरोधी तत्वों से मुलाकात की। विशेष रूप से, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और लेखों में जाकिर नाइक का नाम लिया गया, जो एक विवादित इस्लामिक उपदेशक हैं और भारत में कई आपराधिक मामलों में वांछित हैं। हालांकि, इन दावों का कोई ठोस सबूत उपलब्ध नहीं है। न तो बीजेपी और न ही अन्य आलोचकों ने ऐसी किसी मुलाकात की पुष्टि के लिए विश्वसनीय दस्तावेज या तस्वीरें पेश की हैं। इसके बावजूद, बीजेपी ने पहले भी राहुल गांधी की विदेश यात्राओं, जैसे कि 2023 में उनकी अमेरिका यात्रा, को भारत विरोधी तत्वों से जोड़ा था। उधर, राहुल गांधी की मलेशिया यात्रा को लेकर कांग्रेस ने इसे उनका निजी दौरा बताया है, लेकिन कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। यह चुप्पी विपक्षी दलों को और हमलावर होने का मौका दे रही है।
राहुल गांधी पर यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपनी मलेशिया यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ा। बीजेपी नेताओं, विशेष रूप से रविशंकर प्रसाद और अमित मालवीय, ने पहले उनकी विदेश यात्राओं को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया था। इस बार, मलेशिया में उनकी तस्वीरें, जिसमें वे स्कूटी चलाते और कैजुअल कपड़ों में नजर आए, ने इस चर्चा को हवा दी। बीजेपी का दावा है कि विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी को मिलने वाली जेड प्लस सुरक्षा व्यवस्था का पालन नहीं किया गया। सुरक्षा व्यवस्था तोड़ने का आरोप राहुल गांधी की पहले की यात्राओं, जैसे कि वियतनाम दौरे, पर भी लगाया गया था। बीजेपी ने दावा किया कि राहुल गांधी की गुप्त यात्राएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करती हैं, क्योंकि इनका सार्वजनिक खुलासा नहीं किया जाता। हालांकि, यह ध्यान देना जरूरी है कि राहुल गांधी की विदेश यात्राएं निजी हो सकती हैं, और सुरक्षा व्यवस्था का पालन करना उनकी सुरक्षा एजेंसी एसपीजी और सीआरपीएफ की जिम्मेदारी है।
राहुल गांधी की मलेशिया यात्रा पर विवाद का मुख्य कारण जो बताया जा रहा है वह बिहार में चुनावी माहौल के बीच उनका गायब हो जाना है, वहीं पंजाब में बाढ़ संकट, और उपराष्ट्रपति चुनाव जैसे महत्वपूर्ण मौके पर उनकी अनुपस्थिति ने विपक्षी दलों को हमला करने का मौका दिया। बीजेपी और आप ने इसे कांग्रेस की कमजोरी और विपक्षी एकता में दरार के रूप में पेश किया। इसके अलावा, राहुल गांधी की बार-बार विदेश यात्राएं, खासकर तब जब देश में महत्वपूर्ण राजनीतिक या सामाजिक घटनाएं हो रही हों, उनके आलोचकों के लिए एक आसान निशाना बन जाती हैं। कांग्रेस समर्थकों का तर्क है कि राहुल गांधी को भी निजी समय की जरूरत होती है, और उनकी यात्राएं उनके विचारों को ताजा करने में मदद करती हैं। हालांकि, बीजेपी इसे जनता से दूरी और राजनीतिक गैरजिम्मेदारी के रूप में प्रचारित करती है। यह रणनीति बीजेपी के लिए प्रभावी साबित हुई है, क्योंकि यह जनता के बीच एक नकारात्मक छवि बनाती है।
लब्बोलुआब यह है कि राहुल गांधी की मलेशिया यात्रा पर छिड़ा विवाद भारतीय राजनीति में ध्रुवीकरण और प्रचार की रणनीति का एक और उदाहरण है। बीजेपी और आप ने इस मौके का फायदा उठाकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश की, यह विवाद मुख्य रूप से समय की संवेदनशीलता और राजनीतिक अवसरवाद पर टिका है। राहुल गांधी की अनुपस्थिति ने विपक्षी आईएनडीआईए गठबंधन की एकता पर भी सवाल उठाए हैं, जो बिहार के विधानसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण है।
