राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में चंद्रपुरम पोनुसामी (सीपी) राधाकृष्णन को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई। राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित भव्य शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला,कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे जैसे प्रमुख नेता मौजूद रहे। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी इस अवसर पर शिरकत की, जो उनके इस्तीफे के बाद उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी। हालांकि, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अनुपस्थिति ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया, जिस पर बीजेपी ने कांग्रेस को निशाना बनाते हुए मोर्चा खोल दिया। शपथग्रहण समारोह सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर शुरू हुआ, जब राष्ट्रपति मुर्मु ने राधाकृष्णन को अंग्रेजी में शपथ दिलाई। 67 वर्षीय राधाकृष्णन ने लाल कुर्ता पहनकर शपथ ली और राष्ट्र के प्रति निष्ठा का संकल्प दोहराया। समारोह में पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और हामिद अंसारी भी उपस्थित थे। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मजही, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और विभिन्न राज्यों के राज्यपालों ने भी हिस्सा लिया। शपथ के बाद राधाकृष्णन ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।
यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों से अचानक इस्तीफे के बाद कराया गया था। धनखड़ का इस्तीफा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा, क्योंकि विपक्ष ने उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठाए थे। आज के समारोह में धनखड़ की उपस्थिति ने इन अटकलों को विराम दिया। उनकी पत्नी सुनीता धनखड़ के साथ वे पूर्व राष्ट्रपतियों और उपराष्ट्रपतियों की पंक्ति में बैठे नजर आए। धनखड़ ने समारोह के दौरान कोई बयान नहीं दिया, लेकिन उनकी मौजूदगी ने सत्ता पक्ष को राहत दी। एनडीए के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ष्धनखड़ जी की उपस्थिति संवैधानिक परंपराओं का सम्मान है। वे हमेशा राष्ट्रहित में खड़े रहे हैं।राधाकृष्णन का चुनाव 9 सितंबर को हुआ था, जिसमें उन्होंने एनडीए की ओर से 452 वोट हासिल कर विपक्ष के उम्मीदवार और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हराया था। सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले, जबकि 15 वोट अमान्य घोषित किए गए। मतदान में 98.20 प्रतिशत की ऊंची भागीदारी रही। राधाकृष्णन, जो महाराष्ट्र के राज्यपाल थे, ने चुनाव जीतने के बाद अपना इस्तीफा दे दिया था। वे तमिलनाडु से बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से गहरे जुड़े हुए हैं। 1998 और 1999 में वे कोयंबटूर से लोकसभा सदस्य चुने गए थे। 2004-2007 तक तमिलनाडु बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके राधाकृष्णन को दक्षिण भारत में पार्टी की मजबूती का श्रेय दिया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद राधाकृष्णन को बधाई दी थी। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, सीपी राधाकृष्णन जी को 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव जीतने पर बधाई। उनका जीवन हमेशा समाज सेवा और गरीब-वंचितों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित रहा है। मुझे विश्वास है कि वे एक उत्कृष्ट उपराष्ट्रपति सिद्ध होंगे, जो हमारे संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करेंगे।ष् समारोह में मोदी ने राधाकृष्णन से व्यक्तिगत मुलाकात भी की।हालांकि, समारोह का एक नकारात्मक पहलू विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अनुपस्थिति रही। लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उन्हें आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे गुजरात दौरे पर होने के कारण समारोह में नजर नहीं आए। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी हिस्सा नहीं लिया। कांग्रेस ने इसे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम बताया, लेकिन बीजेपी ने इसे असम्मानपूर्ण बताते हुए कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया।
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने पत्रकारों से कहा, ष्राहुल गांधी जी ने एक महत्वपूर्ण संवैधानिक समारोह का बहिष्कार किया है। यह लोकतंत्र के प्रति उनकी गैर-जिम्मेदारी दर्शाता है। जब देश के उपराष्ट्रपति का शपथग्रहण हो रहा हो, तब गुजरात घूमना क्या प्राथमिकता है? कांग्रेस हमेशा संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करने की बात करती है, लेकिन खुद इसका पालन नहीं करती। एक अन्य बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, ष्राहुल गांधी की अनुपस्थिति कांग्रेस की राजनीतिक दिवालियापन को उजागर करती है। वे संसद में उपस्थित रहने के बजाय छुट्टियां मनाते हैं। यह विपक्ष की भूमिका के अनुरूप नहीं है।बीजेपी ने इस मुद्दे को कांग्रेस के खिलाफ व्यापक प्रचार का हथियार बनाने का फैसला किया है। पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर राहुल गांधी की अनुपस्थिति को ष्संवैधानिक उपेक्षाष् बताते हुए पोस्ट साझा किए जा रहे हैं। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, ष्राहुल गांधी ने उपराष्ट्रपति शपथग्रहण को नजरअंदाज किया। क्या यह विपक्ष का राष्ट्र के प्रति रवैया है? कांग्रेस की यह हरकत जनता कभी माफ नहीं करेगी।ष् विपक्षी दलों ने भी इसकी निंदा की है। तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने कहा, ष्यह एक गलती है, लेकिन बीजेपी इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है।ष्
कांग्रेस ने जवाब में कहा कि राहुल गांधी का गुजरात दौरा किसानों और युवाओं से जुड़ने के लिए था, जो एक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनाते ने कहा, ष्हम सभी संवैधानिक आयोजनों का सम्मान करते हैं, लेकिन क्षेत्रीय दौरे महत्वपूर्ण हैं। बीजेपी राजनीतिक लाभ के लिए इसे तोड़-मरोड़ रही है।ष् फिर भी, यह विवाद आगामी संसदीय सत्रों में तनाव बढ़ा सकता है।राधाकृष्णन अब राज्यसभा के सभापति के रूप में भी कार्यभार संभालेंगे। उनकी नियुक्ति को एनडीए की मजबूत एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि राधाकृष्णन का सहयोगी स्वभाव राज्यसभा में बहसों को संतुलित करेगा। पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ के आक्रामक रुख के विपरीत, राधाकृष्णन को संयमित नेता के रूप में देखा जा रहा है।यह शपथग्रहण न केवल एक नई शुरुआत है, बल्कि राजनीतिक गतिशीलता को भी दर्शाता है। जहां सत्ता पक्ष उत्साह से भरा है, वहीं विपक्ष पर निशाना साधा जा रहा है। कुल मिलाकर, यह घटना भारतीय लोकतंत्र की जीवंतता को प्रतिबिंबित करती है।
