रायबरेली, जो लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है, वहां मंगलवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सांसद राहुल गांधी के काफिले को रोक लिया। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि राहुल गांधी ने हाल ही में अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के बारे में अपशब्द कहे, जिसके विरोध में वे सड़क पर उतर आए। बीजेपी समर्थकों की यह कार्रवाई अचानक से हुई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन को हालात संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह अपने समर्थकों के साथ राहुल गांधी के रास्ते में धरने पर बैठ गए। राहुल वापस जाओ के नारे लगाए। विरोध प्रदर्शन के चलते राहुल का काफिला करीब 1 किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया।पुलिस मंत्री दिनेश सिंह को उठाने पहुंची तो भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ धक्कामुक्की भी हुई।
बुधवार सुबह साढ़े 8 बजे राहुल गांधी दिल्ली स्थित अपने आवास से रायबरेली के लिए रवाना हुए। दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट लेकर लखनऊ पहुंचे और वहां से सड़क मार्ग से रायबरेली पहुंचे। हरचंदपुर में गाड़ी रुकवाकर सपा नेताओं से मुलाकात की।राहुल गांधी आज और कल यानी 10 और 11 सितंबर को रायबरेली में रहेंगे। इस दौरान वे बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे, प्रशासन की दिशा बैठक में शामिल होंगे और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद यह उनका छठा रायबरेली दौरा है। इससे पहले वे 29 और 30 अप्रैल को रायबरेली आए थे जैसे ही उनका काफिला जिला मुख्यालय की ओर बढ़ रहा था, उसी दौरान भाजपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए और नारेबाजी करते हुए गाड़ियों का रास्ता रोक दिया। इस दौरान ‘राहुल गांधी माफी मांगो’ और ‘मोदी जी की मां का अपमान बंद करो’ जैसे नारे लगातार लगाए गए। विरोध इतना तीव्र था कि कुछ कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के वाहन के सामने बैठ कर रास्ता जाम करने का प्रयास भी किया।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। कई थानों से फोर्स मौके पर पहुंची और बैरिकेडिंग कर काफिले को आगे बढ़ाने की कोशिशें की गईं। जब स्थिति हाथ से निकलती देखी गई तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को हटाया और काफिले को सुरक्षित रास्ते से गंतव्य तक पहुंचाया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया ताकि स्थिति बेकाबू न हो। शहर में थोड़ी देर तक यातायात बाधित रहा और आम जनता को भी असुविधा का सामना करना पड़ा।बीजेपी नेताओं का कहना है कि मातृशक्ति का अपमान किसी भी हाल में सहन नहीं किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान राजनीतिक मर्यादा के बिल्कुल विपरीत है। रायबरेली जिले के भाजपा अध्यक्ष ने प्रेस से कहा कि प्रधानमंत्री की मां का अपमान करोड़ों भारतीयों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसा है। उनका कहना था कि राजनीति में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर इस प्रकार की टिप्पणी भाजपा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।
दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि भाजपा द्वारा इस मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी ने किसी तरह का व्यक्तिगत अपशब्द नहीं कहा, बल्कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर प्रचारित किया जा रहा है ताकि जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा सके। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता इस तरह की सड़क पर उतरने वाली राजनीति कर जिले में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के काफिले को रोकने की घटना को लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावी माहौल में इस तरह के टकराव बढ़ सकते हैं। रायबरेली, जहां से सोनिया गांधी और बाद में राहुल गांधी ने प्रतिनिधित्व किया है, हमेशा से कांग्रेस के प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है। भाजपा लंबे समय से यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में इस विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से जनता में संदेश देने की कोशिश साफ दिखाई देती है कि विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत हमले का जवाब दिया जाएगा।
इस घटना के बाद प्रशासन ने जिले में सुरक्षा बढ़ा दी है। मुख्य चौराहों, कार्यक्रम स्थलों और कांग्रेस दफ्तर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि राहुल गांधी के खिलाफ यह विरोध आने वाले समय में उनके लिए चुनौती खड़ी कर सकता है। रायबरेली जैसे सीट पर भाजपा यदि आक्रामक तरीके से जनभावनाओं को भुनाने की कोशिश करती है तो कांग्रेस को मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि कांग्रेस का रुख यह है कि जनता विकास और रोजगार के असली मुद्दों पर ध्यान देगी और राजनीतिक शोर-शराबे के बावजूद उनका समर्थन पार्टी के साथ रहेगा।रायबरेली की इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि राजनीति में शब्दों के मायने कितने बड़े हो सकते हैं। एक बयान से ही सियासी पारा चढ़ सकता है और सड़क पर सीधे टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में भाजपा इस विरोध को किस हद तक आगे बढ़ाती है और कांग्रेस किस तरह से अपने बयान को लेकर सफाई देती है। फिलहाल राहुल गांधी का काफिला तो सुरक्षित निकल गया, लेकिन उनका राजनीतिक सफर इस विवाद से कितनी गहराई तक प्रभावित होगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
